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भिड़े तो कई बार, अब हुआ सीधे वार
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:00 AM IST
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एनएसयूआइ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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केंद्रीय राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया के साथ एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का विवाद काफी पुराना है। दोनों में तनातनी कई बार हो चुकी है। लेकिन इस बार कहानी अलग थी। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मंत्री नहीं, उनकी बेटी की कार रोकी। इसका पता चलते ही मंत्री समर्थक गुस्से में आ गए। उन्होंने जैसे ही एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को देखा, उन पर टूट पड़े। उस समय उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने थप्पड़ मारे तो वे भागने लगे। थोड़ा आगे निकले, तो फिर से पकड़ लिया। घूंस चले, पत्थर मारे। बस यही कहे जा रहे थे रोकनी थी तो मंत्री का कार रोकते, उनकी बेटी को क्यों रोका? करीब 20 मिनट तक उनकी पिटाई चली। बवाल बढ़ जाने के बाद पुलिस पहुंची। उस समय तक कठेरिया समर्थक हावी थे। पुलिस ने लाठी फटकारकर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को बचाया।
ऐसे हुआ बवाल
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में बीएड काउंसलिंग के चलते चीफ प्रॉक्टर ने बाहरी तत्वों का प्रवेश बंद कर दिया है। ऐसे में एनएसयूआई कार्यकर्ता अंदर कैसे प्रवेश कर गए। कार्यकर्ता कैंपस के अंदर करीब घंटे भर तक रहे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने भी उन्हें बाहर जाने के लिए नहीं कहा। यहां तक कि चीफ प्राक्टर भी आ गए थे। इससे साफ है कि शह मिलने के बाद ही कार्यकर्ता वहां जमे रहे। इसी बीच मंत्री कठेरिया की बेटी ट्यूशन पढ़कर घर लौट रही थी। तो उन्होंने कार को रोक लिया। आवास कैंपस में ही है।
साल भर से चल रहा विवाद
एनएसयूआई ने पिछले एक साल से मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। एनएसयूआई कार्यकर्ता तीन मांगों के लिए चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। पहली मांग, मंत्री कठेरिया की मार्कशीट-डिग्री सार्वजनिक की जाए। विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में अवैध तरीके से निवास कर रहे हैं, यहां अवैध निर्माण भी कराया है, उनसे आवास खाली कराया जाएं और तीसरी, 2009 से सांसद बनने के बाद से अब तक विश्वविद्यालय की ओर से वेतन भुगतान भी सार्वजनिक किया जाए। इन मांगों के लिए कार्यकर्ता कुलसचिव, कुलपति का कई बार घेराव भी कर चुके हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित किसी भी कार्यक्रम में उनके अतिथि बनाए जाने पर भी विरोध करते रहे हैं।
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बवाल दर बवाल
सात जुलाई 2015: विवि के गेस्ट हाउस पर मंत्री से आवास खाली करने की मांग पर एनएसयूआई का धरना, समर्थकों ने पीटा।
29 दिसंबर 2015: कैंपस स्थित आवास के बाहर फायरिंग, एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर आरोप।
एक मई 2016: विवि में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी कार्यशाला में मंत्री को मुख्य अतिथि बनाने पर प्रदर्शन।
छह जून 2016: कुलसचिव का घेराव कर मंत्री की मार्कशीट सार्वजनिक करने की मांग की।
कठेरिया के निवास पर फायरिंग में भी है नामजद
बीते महीनों में मंत्री कठेरिया के निवास के बाहर फायरिंग हुई थी, उस वक्त कठेरिया अपनी कार में सवार होकर जा रहे थे। इसमें भी मंत्री ने फायरिंग में इन छात्र नेताओं के नाम एफआईआर कराई थी।
भाजपाइयों ने की गिरफ्तारी की मांग
भाजपाइयों ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे ने कहा है कि भाजपा के बढ़ते जनाधार से कांग्रेस और एनएसयूआई बौखला गई है। इस तरह की हरकत को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए तो भाजपा आंदोलन करने पर बाध्य होगी।
मंत्री के अवैध कब्जे की शिकायत भाजपा की वेबसाइट पर करने गए थे। मंत्री के समर्थक आए और कार्यकर्ताओं को पीटने लगे। इनके साथ हथियारबंद लोग भी थे।
- अमित सिंह, एनएसयूआई महासचिव
एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को मेरे बेटी को रोकने का जो प्रयास किया वह निंदनीय हैै। उनका यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। कांग्रेस के आला पदाधिकारियों को ऐसे कार्यकर्ताओं के क्रियाकलापों की समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीति मुद्दे भूल व्यक्तिगत रंजिश मानकर मेरे परिवार को निशाना बना रहे हैं एनएसयूआई कार्यकर्ता।
- डा. रामशंकर कठेरिया, केंद्रीय राज्यमंत्री
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ऐसे हुआ बवाल
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में बीएड काउंसलिंग के चलते चीफ प्रॉक्टर ने बाहरी तत्वों का प्रवेश बंद कर दिया है। ऐसे में एनएसयूआई कार्यकर्ता अंदर कैसे प्रवेश कर गए। कार्यकर्ता कैंपस के अंदर करीब घंटे भर तक रहे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने भी उन्हें बाहर जाने के लिए नहीं कहा। यहां तक कि चीफ प्राक्टर भी आ गए थे। इससे साफ है कि शह मिलने के बाद ही कार्यकर्ता वहां जमे रहे। इसी बीच मंत्री कठेरिया की बेटी ट्यूशन पढ़कर घर लौट रही थी। तो उन्होंने कार को रोक लिया। आवास कैंपस में ही है।
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साल भर से चल रहा विवाद
एनएसयूआई ने पिछले एक साल से मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। एनएसयूआई कार्यकर्ता तीन मांगों के लिए चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। पहली मांग, मंत्री कठेरिया की मार्कशीट-डिग्री सार्वजनिक की जाए। विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में अवैध तरीके से निवास कर रहे हैं, यहां अवैध निर्माण भी कराया है, उनसे आवास खाली कराया जाएं और तीसरी, 2009 से सांसद बनने के बाद से अब तक विश्वविद्यालय की ओर से वेतन भुगतान भी सार्वजनिक किया जाए। इन मांगों के लिए कार्यकर्ता कुलसचिव, कुलपति का कई बार घेराव भी कर चुके हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित किसी भी कार्यक्रम में उनके अतिथि बनाए जाने पर भी विरोध करते रहे हैं।
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बवाल दर बवाल
सात जुलाई 2015: विवि के गेस्ट हाउस पर मंत्री से आवास खाली करने की मांग पर एनएसयूआई का धरना, समर्थकों ने पीटा।
29 दिसंबर 2015: कैंपस स्थित आवास के बाहर फायरिंग, एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर आरोप।
एक मई 2016: विवि में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी कार्यशाला में मंत्री को मुख्य अतिथि बनाने पर प्रदर्शन।
छह जून 2016: कुलसचिव का घेराव कर मंत्री की मार्कशीट सार्वजनिक करने की मांग की।
कठेरिया के निवास पर फायरिंग में भी है नामजद
बीते महीनों में मंत्री कठेरिया के निवास के बाहर फायरिंग हुई थी, उस वक्त कठेरिया अपनी कार में सवार होकर जा रहे थे। इसमें भी मंत्री ने फायरिंग में इन छात्र नेताओं के नाम एफआईआर कराई थी।
भाजपाइयों ने की गिरफ्तारी की मांग
भाजपाइयों ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे ने कहा है कि भाजपा के बढ़ते जनाधार से कांग्रेस और एनएसयूआई बौखला गई है। इस तरह की हरकत को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए तो भाजपा आंदोलन करने पर बाध्य होगी।
मंत्री के अवैध कब्जे की शिकायत भाजपा की वेबसाइट पर करने गए थे। मंत्री के समर्थक आए और कार्यकर्ताओं को पीटने लगे। इनके साथ हथियारबंद लोग भी थे।
- अमित सिंह, एनएसयूआई महासचिव
एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को मेरे बेटी को रोकने का जो प्रयास किया वह निंदनीय हैै। उनका यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। कांग्रेस के आला पदाधिकारियों को ऐसे कार्यकर्ताओं के क्रियाकलापों की समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीति मुद्दे भूल व्यक्तिगत रंजिश मानकर मेरे परिवार को निशाना बना रहे हैं एनएसयूआई कार्यकर्ता।
- डा. रामशंकर कठेरिया, केंद्रीय राज्यमंत्री