फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   These women became independent by fighting difficulties in Agra

आगरा: बुलंद हौसले के आगे बौनी पड़ गईं बाधाएं, अपने पैरों पर खड़ी हुईं 'अपराजिताएं'

Wed, 11 May 2022 04:58 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 11 May 2022 04:58 PM IST
सार

जब मन में दृढ़ विश्वास हो, बाधाएं भी राह में रोड़ा नहीं बनतीं। ऐसा कर दिखाया है इन महिलाओं ने। इन महिलाओं ने मुश्किलों को हराकर आत्मनिर्भर बनने के लिए नई राह बनाई है। 

विज्ञापन
These women became independent by fighting difficulties in Agra
रेखा, सुनीता और विमलेश रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी की बस्तियों में रहने वाली साधारण महिलाएं अपने कौशल से जीवन का नया सफर शुरू करने जा रही हैं। ये वो महिलाएं हैं जो शादी के बाद पूरी तरह से अपने पति पर आश्रित थीं। किसी की जिंदगी में शराबी पति ने कोहराम मचा रखा था तो किसी का पति हर रोज पीटता था। किसी के पति की मौत के बाद घर के हालात काफी खराब हो चुके थे। बुलंद हौसले से उनके आगे की सभी बाधाएं बौनी पड़ गईं।

विज्ञापन


इन अपराजिताओं ने एक बार जो अपने पैरों पर खड़ा होने की ठानी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। कढ़ाई, बुनाई, सिलाई, ब्यूटीशियन आदि का कोर्स किया। अपने कौशल के बल पर यह महिलाएं विभिन्न कंपनियों में नौकरी पा चुकी हैं। 

विज्ञापन

अब परिवार का खर्चा चला सकूंगी : सुनीता पांडे 

बसेरा कॉलोनी, दयालबाग के पास स्थित बस्ती की रहने वाली 30 साल की सुनीता पांडे के चेहरे पर सालों पहले खो चुकी खुशी फिर से दिखने लगी है। सुनीत ने बताया कि पति आए दिन पीटता था, गालियां देता था। वह काफी परेशान रहती थीं। ऐसे में उसने अपने पैरों पर खड़ा होने का फैसला किया। करीब आठ महीने पहले उन्होंने ब्यूटिशियन के कोर्स में दाखिला लिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन


अब उनको एक ब्यूटी पार्लर में नौकरी मिल गई है। प्रारंभिक वेतन दस हजार रुपये प्रति माह है। जून में वह नौकरी ज्वाइन करेंगी। सुनीता पांडे ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी। नौकरी मिलने से उनमें आत्मविश्वास आया है कि कुछ समस्या आई तो वह परिवार का खर्चा चला सकेंगी। अब पति ने भी मारपीट छोड़ दी है।

फैसला किया तो सब सही होता गया : रेखा सिंह 

स्वामी बाग के पास की बस्ती में रहने वाली 30 साल की रेखा सिंह ने करीब एक साल पहले अपने पैरों पर खड़ा होने का फैसला लिया। पति को शराब पीने की आदत है। इसको लेकर उसकी पति से रोज ही तकरार होती। मारपीट भी हो जाती। रेखा ने बताया कि काम करने का फैसला किया तो बाधाएं खत्म होती गईं। 

पहले सिलाई-कढ़ाई का कोर्स किया, फिर नौकरी की तलाश। कुछ दिन तक तो ऐसा लगा कि नौकरी नहीं लगेगी। फिर एक कंपनी रेडीमेड कपड़े बनाने वाली कंपनी में कोशिश की। अब एक जून से वह नौकरी करने लगेंगी। सालों बाद राहत मिली है। उनके तीन बेटियां हैं। अब विश्वास है कि उनको तकलीफ नहीं होने देंगी।

नौकरी मिलने से कम हो रही हैं मुश्किलें : विमलेश रावत 

29 साल की विमलेश रावत अनुपम बाग कॉलोनी के पास की बस्ती में रहती हैं। बीमार रहने के कारण उनके पति नौकरी नहीं कर सकते। कोशिश की लेकिन बीमारी के कारण अधिक छुट्टियां लेने से कई बार उनकी नौकरी छूट चुकी है। विमलेश ने बताया कि घर का खर्चा चलाना काफी मुश्किल हो रहा था। 

ऐसे में उन्होंने ब्यूटीशियन का कोर्स करने का फैसला लिया। कोर्स करने के बाद उन्होंने कोशिश की तो एक बड़ी सैलून चेन में उनको नौकरी मिल गई। बोलीं कि नौकरी लगने के बाद धीरे-धीरे मुश्किलें कम हो रही हैं। परिवार में दो बेटे हैं।

नौकरी मिलने से मिल गई नई ऊर्जा : शारदा देवी

वर्ष 2014 में जगनपुरा की रहने वाली 35 साल की शारदा देवी के पति का देहांत हो गया। इससे पहले उन्होंने कभी बाहर नौकरी के बारे में सोचा भी नहीं था। कुछ समय में ही पैसा खत्म हो गया। किसी तरह काम चलता। मुश्किलों से लड़ते-लड़ते निराशा होने लगी थी। कभी कोई काम मिल जाता तो ठीक अन्यथा रिश्तेदारों की मदद लेनी पड़ती। 

आठ महीने पहले उन्होंने कढ़ाई-बुनाई का प्रशिक्षण लिया। अब एक व्यापारिक संस्था में उनकी नौकरी लग गई है। इसी महीने से नौकरी शुरू की है। शारदा ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। नौकरी मिलने से एक नई ऊर्जा मिली है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकूंगी। 

एक पहल ने परखी प्रतिभा 

बस्तियों की महिलाओं को प्लेटफॉर्म देने के लिए एक पहल संस्था आगे आई है। संस्था की अध्यक्ष ईबा गर्ग का कहना है कि हमने ऐसी महिलाओं को चिह्नित किया है, जिनमें प्रतिभा थी। इन महिलाओं के कुछ कर गुजरने की सोच को परखा है। इसके बाद इन्हें विभिन्न कोर्स में प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही कंपनियों को प्लेसमेंट के लिए बुलाया। उन्होंने बताया कि शहर की विभिन्न बस्तियों से 40 महिलाओं ने अपने कार्य कौशल के दम पर नौकरी पाई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed