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थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीद मामले में डीएम ने बैठाई जांच
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मैनपुरी। कोरोना से बचाव के लिए ग्राम पंचायतों ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद बाजार से अधिक कीमत पर खरीद की। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच के आदेश के बाद पंचायत सचिवों में खलबली मच गई है।
शासन ने आदेश दिया था कि सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत निधि से थर्मल स्कैन और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद कर उन्हें आशा कार्यकर्ता को उपलब्ध कराया जाए जिससे वे ग्रामीणों की स्क्रीनिंग कर सकें। पंचायतों ने इनकी खरीद तो कर ली, लेकिन बाजार में उपलब्ध कीमत से अधिक का भुगतान किया गया।
अमर उजाला ने इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को मामले की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। आदेश आने के बाद पंचायतों सचिवों की परेशानी बढ़ गई है। जांच में उनकी पोल खुलना तय है।
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एक ही जगह से हुई आपूर्ति
पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद के लिए पंचायत सचिव स्वतंत्र थे लेकिन इसमें भी विभागीय कर्मचारियों ने मामला केंद्रीकृत कर दिया। एक ही व्यक्ति ने पूरे सामान की खरीद कर उसे ग्राम पंचायतों में भेजा। ऐसे में जांच में उनकी भी पोल खुलने का डर सता रहा है।
ये था मामला
पंचायतों में खरीदे गए पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर बाजार में महज तीन हजार रुपये में उपलब्ध है। अमर उजाला ने मेडिकल स्टोर के साथ ही केमिस्ट एसोसिएशन से भी इसकी पुष्टि की थी। वहीं पंचायतों ने इनकी खरीद के लिए 55 सौ से छह हजार रुपये का भुगतान किया गया है। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
जिलाधिकारी के जो भी आदेश मिले हैं, उसके अनुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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शासन ने आदेश दिया था कि सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत निधि से थर्मल स्कैन और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद कर उन्हें आशा कार्यकर्ता को उपलब्ध कराया जाए जिससे वे ग्रामीणों की स्क्रीनिंग कर सकें। पंचायतों ने इनकी खरीद तो कर ली, लेकिन बाजार में उपलब्ध कीमत से अधिक का भुगतान किया गया।
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अमर उजाला ने इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को मामले की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। आदेश आने के बाद पंचायतों सचिवों की परेशानी बढ़ गई है। जांच में उनकी पोल खुलना तय है।
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एक ही जगह से हुई आपूर्ति
पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद के लिए पंचायत सचिव स्वतंत्र थे लेकिन इसमें भी विभागीय कर्मचारियों ने मामला केंद्रीकृत कर दिया। एक ही व्यक्ति ने पूरे सामान की खरीद कर उसे ग्राम पंचायतों में भेजा। ऐसे में जांच में उनकी भी पोल खुलने का डर सता रहा है।
ये था मामला
पंचायतों में खरीदे गए पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर बाजार में महज तीन हजार रुपये में उपलब्ध है। अमर उजाला ने मेडिकल स्टोर के साथ ही केमिस्ट एसोसिएशन से भी इसकी पुष्टि की थी। वहीं पंचायतों ने इनकी खरीद के लिए 55 सौ से छह हजार रुपये का भुगतान किया गया है। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
जिलाधिकारी के जो भी आदेश मिले हैं, उसके अनुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।