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दो ठेकेदारों पर एफआईआर के बाद मची खलबली
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कासगंज। लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर जनपद के दो ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई ने दोनों फर्मों के ठेकेदारों के खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया है। परेशान स्थानीय ठेकेदार कानूनी सलाह ले रहे हैं।
सीबीआई द्वारा लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराने की जानकारी यहां ठेकेदारों को मिल गई है। अमांपुर की जनता मशीनरी स्टोर के ठेकेदार दिनेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस फर्म को लगभग 37 लाख रुपये की लागत से कुड़िया घाट पर जलकुंभी व सिल्ट सफाई का ठेका मिला था। घाट के खेत नंबर एक से नौ तक इसी फर्म को सिल्ट सफाई करनी थी। वहीं संतोष एंटरप्राइजेज व सप्लायर फर्म के ठेकेदार संतोष यादव को स्टोन बोल्डर का ठेका मिला था। 35 लाख रुपये की लागत से कुड़िया घाट हील ब्रिज पर स्टोन की आपूर्ति करनी थी। काम में सीबीआई ने अनियमितता होने की अंदेशा माना है। ऐसे में दोनों ही फर्मों के कार्य की जांच की जा रही है।
ठेकेदार संतोष यादव ने बताया कि उन्हें नियमानुसार वर्क ऑर्डर मिला और उन्होंने उसी के आधार पर स्टोन की आपूर्ति की थी। 35 लाख रुपये के कार्य की स्वीकृति मिली थी। उन्होंने अपना काम ईमानदारी के साथ कराया और सभी दस्तावेज मौजूद हैं। सीबीआई के द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है, इसकी भनक तो लगी है लेकिन कोई प्रमाणित प्रति नहीं मिली है और न ही लखनऊ से कोई फोन कॉल आई है। यदि कोई जवाब मांगा जाता है तो कानूनी सलाह लेकर जवाब दिया जाएगा।
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सीबीआई द्वारा लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराने की जानकारी यहां ठेकेदारों को मिल गई है। अमांपुर की जनता मशीनरी स्टोर के ठेकेदार दिनेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस फर्म को लगभग 37 लाख रुपये की लागत से कुड़िया घाट पर जलकुंभी व सिल्ट सफाई का ठेका मिला था। घाट के खेत नंबर एक से नौ तक इसी फर्म को सिल्ट सफाई करनी थी। वहीं संतोष एंटरप्राइजेज व सप्लायर फर्म के ठेकेदार संतोष यादव को स्टोन बोल्डर का ठेका मिला था। 35 लाख रुपये की लागत से कुड़िया घाट हील ब्रिज पर स्टोन की आपूर्ति करनी थी। काम में सीबीआई ने अनियमितता होने की अंदेशा माना है। ऐसे में दोनों ही फर्मों के कार्य की जांच की जा रही है।
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ठेकेदार संतोष यादव ने बताया कि उन्हें नियमानुसार वर्क ऑर्डर मिला और उन्होंने उसी के आधार पर स्टोन की आपूर्ति की थी। 35 लाख रुपये के कार्य की स्वीकृति मिली थी। उन्होंने अपना काम ईमानदारी के साथ कराया और सभी दस्तावेज मौजूद हैं। सीबीआई के द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है, इसकी भनक तो लगी है लेकिन कोई प्रमाणित प्रति नहीं मिली है और न ही लखनऊ से कोई फोन कॉल आई है। यदि कोई जवाब मांगा जाता है तो कानूनी सलाह लेकर जवाब दिया जाएगा।
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