अतिक्रमण से पटा ताजनगरी का फुटपाथः लाइफलाइन कही जाने वाली रोड पर जोखिम उठा रहे पैदल राहगीर, आए दिन होते हादसे
आगरा में प्रमुख मार्ग अतिक्रमण से पटा पड़ा है। यहां पैदल राहगीरों का निकलना मुश्किल हो रहा है। वह जान जोखिम में डालकर सड़क से निकलने को मजबूर हैं। कई बार राहगीर हाजसे का भी शिकार हो चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली एमजी रोड पर फुटपाथ चलने लायक नहीं है। यहां 20 किमी क्षेत्र में फुटपाथ पर अतिक्रमण है। इन्हें हटाने के नाम पर अफसर आंख मूंदे हुए हैं। इसके कारण पैदल राहगीरों को सड़क पर चलना पड़ रहा है। जहां उनकी जान को जोखिम है। सबसे ज्यादा सड़क हादसे पैदल यात्रियों के साथ हो रहे हैं।
भगवान टॉकीज से हरीपर्वत, कलेक्ट्रेट होते हुए अवंतीबाई चौराहा तक एमजी रोड पर सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ पर अतिक्रमण है। कहीं ठेल-ढकेल, तो कहीं बाजार सज रहा है। स्पीड कलर लैब से यूथ हॉस्टल तक फुटपाथ पर कब्जे हैं। हरीपर्वत थाने के सामने व सेंट जॉस कॉलेज से राजा की मंडी तक फुटपाथ पर अतिक्रमण है। एसएन इमरजेंसी के सामने फुटपाथ एबुलेंस से घिरा रहता है। एमजी रोड पर करीब 20 किमी. फुटपाथ चलने लायक नहीं। है।
शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं
आईएमए के पूर्व सचिव संजय चुतर्वेदी ने बताया कि देहली गेट, बाग फरजाना और एमजी रोड पर फुटपाथ खाली कराने और अतिक्रमण हटवाने के लिए तीन बार मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी शिकायत को फुटबाल बना रहे हैं। कभी कहते हैं पीडब्ल्यूडी की सड़क है, वह अतिक्रमण हटाएंगे। कभी आगरा विकास प्राधिकरण की सड़क बताकर शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया जाता है।
हमेशा बना रहता जोखिम
उन्होंने कहा कि फुटपाथ खाली नहीं होने के कारण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ता है। जहां वाहन दौड़ते हैं। सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की जान का हर वक्त जोखिम बना रहता है। सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की जान जा चुकी हैं। उधर, जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल का कहना है कि शहर के सभी प्रमुख मार्गों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश नगर निगम को दिए हैं। हर सप्ताह इसकी समीक्षा भी की जाएगी।