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Agra News: गांव में हो रही चर्चा आखिर अरुण कैसे बन गया शूटर
Sat, 22 Apr 2023 01:00 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 22 Apr 2023 01:00 AM IST
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कासगंज। अतीक व अशरफ की हत्या करने वाले तीन में से एक जिले के शूटर अरुण मौर्य के कादरवाड़ी गांव में पुलिस की चहलकदमी जारी है। शूटर के घर में अभी भी ताले पड़े हैं, घर के बाहर अनाज बिखरा पड़ा है। इस बीच अमर उजाला की टीम जब शूटर के गांव पहुंची, तो हैरान कर देने वाली जानकारी मिली। अरुण मौर्य का गांव में बहुत आना-जाना नहीं था, लेकिन जब पिछली साल वह अपने घर आया तो काफी गुमसुम रहता था। ग्रामीणों के बीच अब भी इस बात की चर्चा है कि आखिर अरुण कैसे इतना बढ़ा शूटर बन गया। घटना के बाद से गांव के लोगों की उसको लेकर जिज्ञासाएं बढ़ी हैं और समाचारों व सोशल मीडिया के माध्यम से शूटर के बारे में मिल रहीं नई नई जानकारियों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।
प्रधान प्रतिनिधि प्रभात सक्सेना ने बताया कि अरुण मौर्य के पिता को कोई भी दीपक नाम से नहीं जानता है। गांव में उसे सभी मैनेजर कहते हैं। प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या के बाद जब अरुण मौर्य का नाम प्रकाश में आया तो पुलिस उसके पिता दीपक को तलाशती हुई गांव में आई। ग्रामीणों ने पूछताछ के दौरान इस नाम के शख्स की पहचान करने से मना किया, लेकिन बाद में उसकी पहचान मैनेजर के नाम से हो सकी। इसके बाद ग्रामीण पुलिस को उसके घर ले गए। हालांकि जब पुलिस गांव में पहुंची उससे पहले ही अरुण के पिता और बाकी का परिवार गांव से फरार हो चुका था। उन्हें जानकारी मिल गई थी कि बेटे अरुण ने प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या कर दी है। घर के पालतू जानवर घर के बाहर बंधे हुए थे और सामान बिखरा हुआ था। ग्रामीणों को भी ये विश्वास नहीं हो रहा था कि अरुण इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है।
ग्रामीण राजेश ने बताया कि अरुण पिछले साल गांव करीब छह दिन के लिए आया था। उसकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन वह और युवाओं की तरह न तो किसी से बात करता था और नाहीं किसी से मिलता जुलता था। साफ शब्दों में कहें तो वो गुमसुम सा रहता था। घर से निकलने के बाद कुछ देर अपने पिता के साथ गोलगप्पे की ठेल पर खड़ा हो जाता था और बाद में फिर घर में चला जाता था।
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ग्रामीण राकेश शर्मा ने बताया कि अरुण के पिता उनके घर से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को अंदाजा भी नहीं था कि गुमसुम रहने वाले अरुण मौर्य की चुप्पी के पीछे इतना बड़ी साजिश है। क्योंकि अरुण मौर्य का कासगंज में न तो कोई आपराधिक रिकॉर्ड है और नाहीं कभी उसका किसी से कोई विवाद हुआ था। बीते दिन प्रयागराज से आई पुलिस टीम ने कासगंज के थानों में अरुण मौर्य के आपराधिक इतिहास को लेकर छानबीन भी की, लेकिन पुलिस टीम के हाथ कुछ भी नहीं लगा।
कासगंज। शूटर अरुण का पिता दीपक उर्फ मैनेजर जब घर से गायब हुआ तो उसकी भैंस खूंटे पर बंधी थी। जब पुलिस ने भैंस को चारे पानी के लिए परेशान होता देखा तो पड़ोसी को भैंस के चारे पानी के इंतजाम की जिम्मेदारी सौंपी। तब से पड़ोसी भैंस की देखभाल कर रहे हैं।
कासगंज। ग्रामीणों ने बताया कि शूटर का पिता दीपक (मैनेजर) गांव के प्राथमिक विद्यालय के सामने कनेर के पेड़ के पास ठेला लगाकर गोलगप्पे, टिक्की, चाऊमीन आदि बेचता था। इसके बाद कभी बाजार की तरफ ठेला ले जाता था।
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प्रधान प्रतिनिधि प्रभात सक्सेना ने बताया कि अरुण मौर्य के पिता को कोई भी दीपक नाम से नहीं जानता है। गांव में उसे सभी मैनेजर कहते हैं। प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या के बाद जब अरुण मौर्य का नाम प्रकाश में आया तो पुलिस उसके पिता दीपक को तलाशती हुई गांव में आई। ग्रामीणों ने पूछताछ के दौरान इस नाम के शख्स की पहचान करने से मना किया, लेकिन बाद में उसकी पहचान मैनेजर के नाम से हो सकी। इसके बाद ग्रामीण पुलिस को उसके घर ले गए। हालांकि जब पुलिस गांव में पहुंची उससे पहले ही अरुण के पिता और बाकी का परिवार गांव से फरार हो चुका था। उन्हें जानकारी मिल गई थी कि बेटे अरुण ने प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या कर दी है। घर के पालतू जानवर घर के बाहर बंधे हुए थे और सामान बिखरा हुआ था। ग्रामीणों को भी ये विश्वास नहीं हो रहा था कि अरुण इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है।
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ग्रामीण राजेश ने बताया कि अरुण पिछले साल गांव करीब छह दिन के लिए आया था। उसकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन वह और युवाओं की तरह न तो किसी से बात करता था और नाहीं किसी से मिलता जुलता था। साफ शब्दों में कहें तो वो गुमसुम सा रहता था। घर से निकलने के बाद कुछ देर अपने पिता के साथ गोलगप्पे की ठेल पर खड़ा हो जाता था और बाद में फिर घर में चला जाता था।
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ग्रामीण राकेश शर्मा ने बताया कि अरुण के पिता उनके घर से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को अंदाजा भी नहीं था कि गुमसुम रहने वाले अरुण मौर्य की चुप्पी के पीछे इतना बड़ी साजिश है। क्योंकि अरुण मौर्य का कासगंज में न तो कोई आपराधिक रिकॉर्ड है और नाहीं कभी उसका किसी से कोई विवाद हुआ था। बीते दिन प्रयागराज से आई पुलिस टीम ने कासगंज के थानों में अरुण मौर्य के आपराधिक इतिहास को लेकर छानबीन भी की, लेकिन पुलिस टीम के हाथ कुछ भी नहीं लगा।
कासगंज। शूटर अरुण का पिता दीपक उर्फ मैनेजर जब घर से गायब हुआ तो उसकी भैंस खूंटे पर बंधी थी। जब पुलिस ने भैंस को चारे पानी के लिए परेशान होता देखा तो पड़ोसी को भैंस के चारे पानी के इंतजाम की जिम्मेदारी सौंपी। तब से पड़ोसी भैंस की देखभाल कर रहे हैं।
कासगंज। ग्रामीणों ने बताया कि शूटर का पिता दीपक (मैनेजर) गांव के प्राथमिक विद्यालय के सामने कनेर के पेड़ के पास ठेला लगाकर गोलगप्पे, टिक्की, चाऊमीन आदि बेचता था। इसके बाद कभी बाजार की तरफ ठेला ले जाता था।