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पेड़ी का पूरा गन्ना खपा, अब पौध गन्ना खपाने का लक्ष्य
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कासगंज की न्यौली चीनी मिल पर पेराई को पहुंचा गन्ना
- फोटो : KASGANJ
कासगंज। न्यौली चीनी मिल का चक्का इस बार व्यवस्थित रूप से घूमा तो फिर किसानों की मुसीबतें कुछ कम हो गईं। तभी तो पेड़ी किस्म के पूरे क्षेत्रफल के पूरे गन्ने की खपत हो चुकी है। जबकि पौध किस्म के गन्ने को खपाने का लक्ष्य आगे बढ़ा दिया गया है। मिल ने अब तक कुल क्षेत्रफल में से 50 फीसद क्षेत्रफल गन्ने की खरीद पूरी कर ली है।
गन्ने की पेराई के साथ-साथ कटाई भी चल रही है। तेजी के साथ किसान गन्ना खपाने में जुटे हैं। जिले में गन्ने की खेती दो तरीके से की जाती है। पहला पेड़ी तरीका, दूसरा पौध तरीका। पेड़ी तरीका है कि जो पौध तरीकेे से गन्ने की फसल एक बार तैयार की जाती है और फिर जब यह फसल काट ली जाती है तो उसका अवशेष बचता है वह फिर पौधा बनने लगता है।
उसके बाद अगली फसल जल्दी तैयार हो जाती है। जिससे उसकी कटाई भी अगली बार जल्दी हो जाती है। जबकि पौध तरीका यह है कि फरवरी मार्च माह में बसंतकालीन गन्ने की बुवाई होती है। खेत में कृषियंत्र के माध्यम से दो फुट की नाली बनाई जाती है और फिर गन्ने के छोटे छोटे भाग बीज के रूप में बोए जाते हैं। यह फसल पहली बार में देरी से तैयार होती है। इसलिए इसकी कटाई भी बाद में होती है। पेड़ी विधि से तैयार हुई फसल के पूरे रकबे की खरीद चीनी मिल ने कर ली है। अब पौध विधि की फसल की खरीद पर जोर है।
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आंकड़ों की नजर में
- 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार हुई है गन्ने की फसल।
- 4.5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पेड़ी विधि से हुई थी फसल।
- 30 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद का चीनी मिल ने तय किया है लक्ष्य।
- 25 लाख क्विंटल गन्ना अब तक चीनी मिल ने खरीदा।
दिया नोटिस तो तेज हुआ भुगतान
गन्ना विभाग ने न्यौली चीनी मिल को पुराने पेराई सत्र के बकाए का भुगतान करने के बार बार निर्देश दिए। पिछले दिनों फिर से नोटिस दिया। अब पिछली बार के कुल बकाए में से 58 प्रतिशत तक भुगतान न्यौली चीनी मिल ने किसानों के खातों में किया है। कुल 48 करोड़ रुपये न्यौली चीनी मिल पर किसानों का बकाया था।
- पेड़ी विधि से तैयार गन्ने की फसल चीनी मिल ने खरीद ली है। जब कि पौध विधि से तैयार हुई फसल खरीदने पर बेहद जोर है। किसानों का पूरा गन्ना खरीदा जाएगा। - ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
- पुराने बकाए का भुगतान किया जा रहा है। पिछले साल 31 जनवरी तक जो गन्ना खरीदा था उसकी एडवाइज बैंक को भेजी जा चुकी है। किसान अपना गन्ना डायवर्ट न करें। चीनी मिल गन्ना खरीद को गंभीर है। - एसपी सिंह, महाप्रबंधक, न्यौली चीनी मिल।
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गन्ने की पेराई के साथ-साथ कटाई भी चल रही है। तेजी के साथ किसान गन्ना खपाने में जुटे हैं। जिले में गन्ने की खेती दो तरीके से की जाती है। पहला पेड़ी तरीका, दूसरा पौध तरीका। पेड़ी तरीका है कि जो पौध तरीकेे से गन्ने की फसल एक बार तैयार की जाती है और फिर जब यह फसल काट ली जाती है तो उसका अवशेष बचता है वह फिर पौधा बनने लगता है।
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उसके बाद अगली फसल जल्दी तैयार हो जाती है। जिससे उसकी कटाई भी अगली बार जल्दी हो जाती है। जबकि पौध तरीका यह है कि फरवरी मार्च माह में बसंतकालीन गन्ने की बुवाई होती है। खेत में कृषियंत्र के माध्यम से दो फुट की नाली बनाई जाती है और फिर गन्ने के छोटे छोटे भाग बीज के रूप में बोए जाते हैं। यह फसल पहली बार में देरी से तैयार होती है। इसलिए इसकी कटाई भी बाद में होती है। पेड़ी विधि से तैयार हुई फसल के पूरे रकबे की खरीद चीनी मिल ने कर ली है। अब पौध विधि की फसल की खरीद पर जोर है।
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आंकड़ों की नजर में
- 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार हुई है गन्ने की फसल।
- 4.5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पेड़ी विधि से हुई थी फसल।
- 30 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद का चीनी मिल ने तय किया है लक्ष्य।
- 25 लाख क्विंटल गन्ना अब तक चीनी मिल ने खरीदा।
दिया नोटिस तो तेज हुआ भुगतान
गन्ना विभाग ने न्यौली चीनी मिल को पुराने पेराई सत्र के बकाए का भुगतान करने के बार बार निर्देश दिए। पिछले दिनों फिर से नोटिस दिया। अब पिछली बार के कुल बकाए में से 58 प्रतिशत तक भुगतान न्यौली चीनी मिल ने किसानों के खातों में किया है। कुल 48 करोड़ रुपये न्यौली चीनी मिल पर किसानों का बकाया था।
- पेड़ी विधि से तैयार गन्ने की फसल चीनी मिल ने खरीद ली है। जब कि पौध विधि से तैयार हुई फसल खरीदने पर बेहद जोर है। किसानों का पूरा गन्ना खरीदा जाएगा। - ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
- पुराने बकाए का भुगतान किया जा रहा है। पिछले साल 31 जनवरी तक जो गन्ना खरीदा था उसकी एडवाइज बैंक को भेजी जा चुकी है। किसान अपना गन्ना डायवर्ट न करें। चीनी मिल गन्ना खरीद को गंभीर है। - एसपी सिंह, महाप्रबंधक, न्यौली चीनी मिल।