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क्षय रोग कार्यालय खाली करने को उठापटक
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रफ़रोजाबाद ! जिला अस्पताल स्थित जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित होने के बाद राष्ट्रीय कार्यक्रम जिला क्षय रोग विभाग की मुसीबत बढ़ गई हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर से क्षय रोग कार्यालय हटाने के लिए एक माह का अल्टीमेटम दिया गया है। हालांकि अभी तक टीबी विभाग कहां स्थानांतरित होगा? तय नहीं हो सका है। विधानसभा में भी टीबी कार्यालय को खाली करने का मुद्दा उठ चुका है। हालांकि सीएमओ ने नियमों का हवाला देते हुए वैकल्पिक व्यवस्था न होने तक क्षय रोग कार्यालय मेडिकल कॉलेज में ही संचालित करने की बात कही है।
जिला अस्पताल परिसर में टीबी विभाग संचालित है। यहां से टीबी मरीजों को इलाज के साथ सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ दिलाया जाता है लेकिन अब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित कर दिया है। ऐसे में टीबी क्लीनिक को खाली करने के लिए मेडिकल कॉलेज की ओर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
विधानसभा में टीबी क्लीनिक को खाली करने का मामला भी उठाया जा चुका है। इधर, सीएमओ ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखा है। इसमें नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चिकित्सालयों में तैनात मानव संसाधन की प्रति नियुक्ति तीन वर्ष मानी जाएगी। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था होने तक राष्ट्रीय कार्यक्रम, पोस्टमार्टम आदि सुविधाएं मेडिकल कॉलेज में ही संचालित करने का नियम है।
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- राष्ट्रीय कार्यक्रम को बंद नहीं किया जा सकता है। प्राचार्य का टीबी क्लीनिक को खाली करने के लिए पत्र आ चुके हैं। हमने डीएम को टीबी विभाग के लिए भूमि आवंटन करने के लिए पत्र लिखा है।
डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी क्षय रोग अधिकारी
- मेडिकल कॉलेज में नया बैच शुरू होगा। ऐसे में क्लीनिक में शिक्षण कार्य भी कराया जाएगा। मशीनें भी स्थापित की जाएंगी। इसलिए जगह की आवश्यकता रहेगी। इसलिए हमने क्षय रोग कार्यालय को खाली करने के लिए पत्र लिखा है।
डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज
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जिला अस्पताल परिसर में टीबी विभाग संचालित है। यहां से टीबी मरीजों को इलाज के साथ सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ दिलाया जाता है लेकिन अब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित कर दिया है। ऐसे में टीबी क्लीनिक को खाली करने के लिए मेडिकल कॉलेज की ओर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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विधानसभा में टीबी क्लीनिक को खाली करने का मामला भी उठाया जा चुका है। इधर, सीएमओ ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखा है। इसमें नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चिकित्सालयों में तैनात मानव संसाधन की प्रति नियुक्ति तीन वर्ष मानी जाएगी। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था होने तक राष्ट्रीय कार्यक्रम, पोस्टमार्टम आदि सुविधाएं मेडिकल कॉलेज में ही संचालित करने का नियम है।
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- राष्ट्रीय कार्यक्रम को बंद नहीं किया जा सकता है। प्राचार्य का टीबी क्लीनिक को खाली करने के लिए पत्र आ चुके हैं। हमने डीएम को टीबी विभाग के लिए भूमि आवंटन करने के लिए पत्र लिखा है।
डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी क्षय रोग अधिकारी
- मेडिकल कॉलेज में नया बैच शुरू होगा। ऐसे में क्लीनिक में शिक्षण कार्य भी कराया जाएगा। मशीनें भी स्थापित की जाएंगी। इसलिए जगह की आवश्यकता रहेगी। इसलिए हमने क्षय रोग कार्यालय को खाली करने के लिए पत्र लिखा है।
डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज