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Agra News: रूठा राज्य पक्षी सारस... दो दिन की गिनती में एक भी नहीं मिला
Fri, 19 Dec 2025 02:52 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 19 Dec 2025 02:52 AM IST
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सारस का फाइल फोटो
बाह(आगरा)। चंबल में 10 साल पहले बर्ड फेस्टिवल का आयोजन हुआ था। चंबल सफारी जरार में सारस विलेज स्थापित किया गया था। विदेशी विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस के लिए वेटलैंड्स विकसित किए जाने पर जोर दिया था लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि यूपी का राज्य पक्षी सारस यमुना-चंबल की वादियों से रूठ गया है। 15-16 दिसंबर को दो दिन चली गणना में यमुना-चंबल पट्टी क्षेत्र में एक भी सारस नहीं मिला। वेटलैंड्स सिकुड़ने को इनके रूठने की अहम वजह माना जा रहा है।
चंबल सेंक्चुअरी के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक दो दिन गणना कराई गई लेकिन एक भी सारस नहीं मिला। सामाजिक वानिकी जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह ने बताया कि रेंज में यमुना के बीहड़ से लेकर नदी किनारे के क्षेत्र में दो दिन सारस की गणना का काम चला, सुबह-शाम हुई गणना में एक भी सारस नहीं दिखाई दिया है।
बुजुर्ग किसान कचौराघाट के सुरेश चंद्र शर्मा, चमरौआ के सुरेश पचौरी, जरार के जोधाराम, बिजौली के सोवरन सिंह ने बताया कि दो दशक पहले तक खेत-खलिहान और तालाब-पोखर के आसपास सारस के जोड़े दिखते थे। खेतों के टीलों पर घोंसला बनाकर अंडे देते थे। अब गांवों में वेटलैंड नहीं रहे इसलिए सारस दिखना भी बंद हो गए हैं।
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चंबल सेंक्चुअरी के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक दो दिन गणना कराई गई लेकिन एक भी सारस नहीं मिला। सामाजिक वानिकी जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह ने बताया कि रेंज में यमुना के बीहड़ से लेकर नदी किनारे के क्षेत्र में दो दिन सारस की गणना का काम चला, सुबह-शाम हुई गणना में एक भी सारस नहीं दिखाई दिया है।
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बुजुर्ग किसान कचौराघाट के सुरेश चंद्र शर्मा, चमरौआ के सुरेश पचौरी, जरार के जोधाराम, बिजौली के सोवरन सिंह ने बताया कि दो दशक पहले तक खेत-खलिहान और तालाब-पोखर के आसपास सारस के जोड़े दिखते थे। खेतों के टीलों पर घोंसला बनाकर अंडे देते थे। अब गांवों में वेटलैंड नहीं रहे इसलिए सारस दिखना भी बंद हो गए हैं।
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