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जिला अस्पताल: मंत्री जी के जाते ही बेड से गायब हुई चादरें, कमरों में लटके ताले
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मैनपुरी। जिला अस्पताल का बृहस्पतिवार को राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जिला अस्पताल की जो तस्वीर उन्हें दिखाई वह 24 घंटे में ही बदल गईं। शुक्रवार को मरीजों के बेड से चादरें गायब थीं तो अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा था। अनुपलब्धता के चलते मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी गईं।
राज्यमंत्री जब जिला अस्पताल पहुंचे बेड पर साफ सुथरी चादरें बिछी थीं। एक मरीज द्वारा दवा न मिलने की शिकायत पर खुद सीएमएस डॉ. अरविंद कुमार गर्ग ने सभी दवाएं उपलब्ध होने की बात कही थी लेकिन अगले ही दिन सुविधाएं और दवा के दावे काफूर हो गए। अमर उजाला की पड़ताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका मिला। इससे मरीजों को मायूसी हाथ लगी। अस्पताल में स्क्रीनिंग तो दूर खुद कर्मचारी बिना मास्क के नजर आए।
12 बजे बंद थी मेस, चार्ज हो रहा था ई-रिक्शा
जिला अस्पताल की मेस में राज्यमंत्री को सब कुछ ठीक मिला था। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे ही मेस बंद हो चुकी थी जबकि मेस का संचालन दोपहर 12 से एक बजे तक किया जाता है। मेस की बिजली से यहां तैनात कर्मचारी गोविंद द्वारा ई-रिक्शा चार्ज किया जा रहा था।
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सभी दवाएं बाहर से मंगाईं
शहर के पॉवर हाउस निवासी जोगेंद्र कुमार चार साल की बेटी को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। उसके पैर में फ्रैक्चर था। उन्हें एक्सरे कराने के लिए बाहर भेज दिया गया। जोगेंद्र ने बताया कि बेटी का सही उपचार नहीं किया गया। केवल पैर के ऊपर पट्टी बांध दी। सभी दवाएं बाहर से लाने के लिए एक पर्ची दे दी गई।
तीमारदार ने खींचा स्ट्रेचर
शहर के मोहल्ला भरतवाल निवासी 80 वर्षीय कमला देवी का पैर टूट गया है। बेटा अनूप कुमार उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। गेट से वे खुद ही अपनी मां को गोद में उठाकर अंदर ले गए। वहीं वार्डब्वॉय ने प्लॉस्टर चढ़ने के बाद स्ट्रेचर अनूप को थमा दिया। वे किसी तरह स्ट्रेचर को लेकर जिला अस्पताल के गेट तक पहुंचे।
बेड पर नजर नहीं आई चादरें
जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 42 में बेड नंबर एक पर रामनिवास भर्ती थे। उन्हें जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से चादर उपलब्ध नहीं कराई गई। मरीज के साथ आईं महिला पप्पी देवी ने बताया कि उन्होंने दो बार स्टॉफ से चादर मांगी, लेकिन उन्हें नहीं दी गई। वार्ड के अन्य बेडों पर भी नजारा कुछ ऐसा ही था। चादर नहीं बिछीं थीं।
चेहरे से गायब हो गए मास्क
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष के पास ही स्थित आयुष्मान कक्ष में तीन कर्मचारी मौजूद थे। किसी ने भी मास्क नहीं लगाया हुआ था। वहीं बृहस्पतिवार को राज्यमंत्री के दौरे के समय कर्मचारी मास्क लगाए हुए थे। ऐसे में साफ है कि मास्क कोरोना से बचाव के लिए नहीं बल्कि मंत्री के दौरे के लिए लगाया गया था।
जिला अस्पताल में जो भी अव्यवस्थाएं मिली हैं उन्हें सीएमएस से बात कर दूर कराया जाएगा। स्टाफ को अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पीपी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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राज्यमंत्री जब जिला अस्पताल पहुंचे बेड पर साफ सुथरी चादरें बिछी थीं। एक मरीज द्वारा दवा न मिलने की शिकायत पर खुद सीएमएस डॉ. अरविंद कुमार गर्ग ने सभी दवाएं उपलब्ध होने की बात कही थी लेकिन अगले ही दिन सुविधाएं और दवा के दावे काफूर हो गए। अमर उजाला की पड़ताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका मिला। इससे मरीजों को मायूसी हाथ लगी। अस्पताल में स्क्रीनिंग तो दूर खुद कर्मचारी बिना मास्क के नजर आए।
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12 बजे बंद थी मेस, चार्ज हो रहा था ई-रिक्शा
जिला अस्पताल की मेस में राज्यमंत्री को सब कुछ ठीक मिला था। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे ही मेस बंद हो चुकी थी जबकि मेस का संचालन दोपहर 12 से एक बजे तक किया जाता है। मेस की बिजली से यहां तैनात कर्मचारी गोविंद द्वारा ई-रिक्शा चार्ज किया जा रहा था।
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सभी दवाएं बाहर से मंगाईं
शहर के पॉवर हाउस निवासी जोगेंद्र कुमार चार साल की बेटी को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। उसके पैर में फ्रैक्चर था। उन्हें एक्सरे कराने के लिए बाहर भेज दिया गया। जोगेंद्र ने बताया कि बेटी का सही उपचार नहीं किया गया। केवल पैर के ऊपर पट्टी बांध दी। सभी दवाएं बाहर से लाने के लिए एक पर्ची दे दी गई।
तीमारदार ने खींचा स्ट्रेचर
शहर के मोहल्ला भरतवाल निवासी 80 वर्षीय कमला देवी का पैर टूट गया है। बेटा अनूप कुमार उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। गेट से वे खुद ही अपनी मां को गोद में उठाकर अंदर ले गए। वहीं वार्डब्वॉय ने प्लॉस्टर चढ़ने के बाद स्ट्रेचर अनूप को थमा दिया। वे किसी तरह स्ट्रेचर को लेकर जिला अस्पताल के गेट तक पहुंचे।
बेड पर नजर नहीं आई चादरें
जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 42 में बेड नंबर एक पर रामनिवास भर्ती थे। उन्हें जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से चादर उपलब्ध नहीं कराई गई। मरीज के साथ आईं महिला पप्पी देवी ने बताया कि उन्होंने दो बार स्टॉफ से चादर मांगी, लेकिन उन्हें नहीं दी गई। वार्ड के अन्य बेडों पर भी नजारा कुछ ऐसा ही था। चादर नहीं बिछीं थीं।
चेहरे से गायब हो गए मास्क
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष के पास ही स्थित आयुष्मान कक्ष में तीन कर्मचारी मौजूद थे। किसी ने भी मास्क नहीं लगाया हुआ था। वहीं बृहस्पतिवार को राज्यमंत्री के दौरे के समय कर्मचारी मास्क लगाए हुए थे। ऐसे में साफ है कि मास्क कोरोना से बचाव के लिए नहीं बल्कि मंत्री के दौरे के लिए लगाया गया था।
जिला अस्पताल में जो भी अव्यवस्थाएं मिली हैं उन्हें सीएमएस से बात कर दूर कराया जाएगा। स्टाफ को अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पीपी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।