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दर्द से तड़पती रही मां, मासूम बेटी ने इलाज की लगाई गुहार, नहीं पिघले 'धरती के भगवान'
Wed, 26 Feb 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 26 Feb 2020 12:08 AM IST
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दर्द से तड़पती रही महिला मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की एक और लापरवाही सामने आई। घड़ी वाली इमारत में महिला मरीज 30 घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया। प्राचार्य के पास शिकायत पहुंचने के बाद ही उसे शाम को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
अर्जुन नगर निवासी 30 साल की राधा सोमवार सुबह 11 बजे घड़ी वाली इमारत में आई। वह अनेक बीमारियों से पीड़ित है। इसे भर्ती करने के लिए पति राकेश कुमार कई बार चिकित्सकों के पास गए, लेकिन उसे टहलाते रहे।
उसने मरीज की हालत ज्यादा खराब होने का हवाला भी दिया, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। उसकी आठ साल की बेटी भूरी भी लगातार डॉक्टरों के चक्कर काटती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर पति ने राधा को घड़ीवाली इमारत की गैलरी में ही लिटा दिया।
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इसकी शिकायत मंगलवार को प्राचार्य के पास पहुंची तो उनके निर्देश पर शाम करीब पांच बजे उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि इस लापरवाही पर स्टाफ को चेतावनी भी दी गई है।
जूनियर डॉक्टरों ने पहुंचाया इमरजेंसी
प्राचार्य के निर्देश पर राधा को भर्ती कराने की पहल जूनियर डॉक्टरों ने की। जब वे राधा के पास पहुंचे, उसके साथ सिर्फ आठ साल की बेटी ही थी। जूनियर डॉक्टरों ने नर्सिंग स्टाफ से उसे भर्ती कराने को कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। तब जूनियर डॉक्टरों ने एंबुलेंस मंगाई और खुद जाकर उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया।
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अर्जुन नगर निवासी 30 साल की राधा सोमवार सुबह 11 बजे घड़ी वाली इमारत में आई। वह अनेक बीमारियों से पीड़ित है। इसे भर्ती करने के लिए पति राकेश कुमार कई बार चिकित्सकों के पास गए, लेकिन उसे टहलाते रहे।
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उसने मरीज की हालत ज्यादा खराब होने का हवाला भी दिया, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। उसकी आठ साल की बेटी भूरी भी लगातार डॉक्टरों के चक्कर काटती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर पति ने राधा को घड़ीवाली इमारत की गैलरी में ही लिटा दिया।
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इसकी शिकायत मंगलवार को प्राचार्य के पास पहुंची तो उनके निर्देश पर शाम करीब पांच बजे उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि इस लापरवाही पर स्टाफ को चेतावनी भी दी गई है।
जूनियर डॉक्टरों ने पहुंचाया इमरजेंसी
प्राचार्य के निर्देश पर राधा को भर्ती कराने की पहल जूनियर डॉक्टरों ने की। जब वे राधा के पास पहुंचे, उसके साथ सिर्फ आठ साल की बेटी ही थी। जूनियर डॉक्टरों ने नर्सिंग स्टाफ से उसे भर्ती कराने को कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। तब जूनियर डॉक्टरों ने एंबुलेंस मंगाई और खुद जाकर उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया।