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Agra News: कोर्ट की खबरःः बीमा कंपनी देगी चोरी हुए टैंपो की पूरी धनराशि
Tue, 12 Aug 2025 11:29 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 12 Aug 2025 11:29 PM IST
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मैनपुरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को एक चोरी हुए टैंपो की बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही टैंपो की बीमा राशि पर छह प्रतिशत ब्याज और हर्जाना भी देना होगा।
गांव रूपपुर अंजनी के निवासी संजय यादव ने बताया कि 2013 में एक टैंपो खरीदा था और उसका बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से कराया। बीमा की धनराशि 1,13,000 रुपये तय की गई थी और यह 27 जुलाई 2015 से 26 जुलाई 2016 तक वैध था। 3 जुलाई 2016 की रात को जिला अस्पताल के पास से उनका टैंपो चोरी हो गया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने और बीमा कंपनी को सूचित करने के बाद भी जब बीमा की राशि का भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने 28 जून 2019 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दावा दायर किया। याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय और सदस्यों नीतिका दास व नंद कुमार ने बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि बीमा की धनराशि 1,13,000 रुपये का भुगतान किया जाए। दावा दायर करने की तिथि से इस राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी दिया जाए। इसके अतिरिक्त 13 हजार रुपये का हर्जाना भी दिया जाएगा, जिसमें 8 हजार रुपये मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए और 5 हजार रुपये वाद व्यय के लिए शामिल हैं। यह पूरी धनराशि बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के खाते में जमा करनी होगी।
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गांव रूपपुर अंजनी के निवासी संजय यादव ने बताया कि 2013 में एक टैंपो खरीदा था और उसका बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से कराया। बीमा की धनराशि 1,13,000 रुपये तय की गई थी और यह 27 जुलाई 2015 से 26 जुलाई 2016 तक वैध था। 3 जुलाई 2016 की रात को जिला अस्पताल के पास से उनका टैंपो चोरी हो गया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने और बीमा कंपनी को सूचित करने के बाद भी जब बीमा की राशि का भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने 28 जून 2019 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दावा दायर किया। याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय और सदस्यों नीतिका दास व नंद कुमार ने बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि बीमा की धनराशि 1,13,000 रुपये का भुगतान किया जाए। दावा दायर करने की तिथि से इस राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी दिया जाए। इसके अतिरिक्त 13 हजार रुपये का हर्जाना भी दिया जाएगा, जिसमें 8 हजार रुपये मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए और 5 हजार रुपये वाद व्यय के लिए शामिल हैं। यह पूरी धनराशि बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के खाते में जमा करनी होगी।
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