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उन्होंने रेत पर महल बनाए एडीए को दिखी बाउंड्री
राजीव शर्मा
Updated Sun, 01 Feb 2015 01:47 AM IST
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शहर में कालिंदी ने ऐसे ही दम नहीं तोड़ा। इसके रेत पर जब कंकरीट की बहुमंजिला इमारतें और कालोनियां विकसित हो रही थीं, तब आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने आंखें मूंद रखी थीं। मिलीभगत का आलम यह था कि एक के बाद एक कई ऊंची इमारतें खड़ी होती गईं और एडीए महज अवैध बाउंड्री बनाने का नोटिस देता रहा। अंत में कागजी खानापूर्ति कर फाइलें भी बंद कर दीं।
वर्ष 2013 जुलाई में लगभग 28 लोगों को यमुना किनारे अवैध निर्माण करने पर नोटिस दिया गया। मगर, यह अवैध इमारत का नहीं, बल्कि अवैध बाउंड्री के निर्माण को लेकर था। नोटिस में लिखा कि ‘निर्माणकर्ता ने मौके पर अवैध बाउंड्री बना ली है। निर्माण से संबंधित कोई स्वीकृति भी नहीं दिखाई गई।’ इतना ही नहीं कुछ लोगों को तो ट्यूबवेल के लिए 8*8 का एक कमरा बनाने पर नोटिस दिया गया। इन नोटिसों पर भूखंड संख्या इंगित नहीं थी, ताकि पता न चले कि किस व्यक्ति को, किस जगह के लिए नोटिस दिया गया है। इसी तरह के कुछ बिल्डरों को वर्ष 2014 में नोटिस दिए गए। सूत्रों की मानें तो एडीए इस तरह के अब तक 48 लोगों को नोटिस जारी कर चुका है। बिल्डरों को अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए निश्चित समय भी दिया गया। मगर, महीनों गुजर जाने के बाद भी वे एडीए अधिकारियों के समक्ष न तो खुद प्रस्तुत हुए और न ही कोई साक्ष्य भेजा। हां, इस बीच इमारतें जरूर बनकर तैयार हो गईं।
आरटीआई से मिली प्रतिलिपि
आरटीआई एक्टिविस्ट और सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने यमुना किनारे हुए अवैध निर्माणों के संबंध में एडीए द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में सवाल किए थे। इसी के जवाब में एडीए ने उन्हें नोटिसों की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई हैं।
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एनजीटी भी हुआ सख्त
यमुना में अवैध निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त है। उसने नदी में निर्माण पर न सिर्फ रोक लगा दी है बल्कि पकड़े जाने पर सजा के साथ-साथ पचास हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया है। इन्हीं सब से बचने के लिए एडीए के कर्मचारियों ने नोटिसों सहित तमाम कागजों की मोटी फाइल तैयार कर ली है।
कई विभागों की मिलीभगत से यमुना में अवैध निर्माण हुए हैं। इसमें एडीए की मिलीभगत सबसे ज्यादा है। जल्द ही इस संबंध में एनजीटी में केस दायर किया जाएगा।
- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी
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वर्ष 2013 जुलाई में लगभग 28 लोगों को यमुना किनारे अवैध निर्माण करने पर नोटिस दिया गया। मगर, यह अवैध इमारत का नहीं, बल्कि अवैध बाउंड्री के निर्माण को लेकर था। नोटिस में लिखा कि ‘निर्माणकर्ता ने मौके पर अवैध बाउंड्री बना ली है। निर्माण से संबंधित कोई स्वीकृति भी नहीं दिखाई गई।’ इतना ही नहीं कुछ लोगों को तो ट्यूबवेल के लिए 8*8 का एक कमरा बनाने पर नोटिस दिया गया। इन नोटिसों पर भूखंड संख्या इंगित नहीं थी, ताकि पता न चले कि किस व्यक्ति को, किस जगह के लिए नोटिस दिया गया है। इसी तरह के कुछ बिल्डरों को वर्ष 2014 में नोटिस दिए गए। सूत्रों की मानें तो एडीए इस तरह के अब तक 48 लोगों को नोटिस जारी कर चुका है। बिल्डरों को अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए निश्चित समय भी दिया गया। मगर, महीनों गुजर जाने के बाद भी वे एडीए अधिकारियों के समक्ष न तो खुद प्रस्तुत हुए और न ही कोई साक्ष्य भेजा। हां, इस बीच इमारतें जरूर बनकर तैयार हो गईं।
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आरटीआई से मिली प्रतिलिपि
आरटीआई एक्टिविस्ट और सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने यमुना किनारे हुए अवैध निर्माणों के संबंध में एडीए द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में सवाल किए थे। इसी के जवाब में एडीए ने उन्हें नोटिसों की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई हैं।
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एनजीटी भी हुआ सख्त
यमुना में अवैध निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त है। उसने नदी में निर्माण पर न सिर्फ रोक लगा दी है बल्कि पकड़े जाने पर सजा के साथ-साथ पचास हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया है। इन्हीं सब से बचने के लिए एडीए के कर्मचारियों ने नोटिसों सहित तमाम कागजों की मोटी फाइल तैयार कर ली है।
कई विभागों की मिलीभगत से यमुना में अवैध निर्माण हुए हैं। इसमें एडीए की मिलीभगत सबसे ज्यादा है। जल्द ही इस संबंध में एनजीटी में केस दायर किया जाएगा।
- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी