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संजलि हत्याकांड: पेट्रोल डाला फिर फेंकी सुलगती सिगरेट, जिंदा जला दी थी छात्रा...परिवार को इंसाफ का इंतजार
Thu, 18 Dec 2025 02:43 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 02:43 AM IST
सार
आगरा के लालऊ गांव की रहने वाली दसवीं की छात्रा संजलि को गांव के बाहर जिंदा जलाया गया था। घटना को सुनकर लोगों के दिल दहल गए थे।
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Sanjali Murder Case
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के लालऊ में 7 साल पहले हुए संजलि हत्याकांड ने पूरे आगरा को हिलाकर रख दिया था। बृहस्पतिवार को पूरा परिवार हर साल की तरह संजलि के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए की सातवीं बरसी मनाएगा।
कक्षा 10 की छात्रा संजलि स्कूल से घर लौट रही थी, इसी बीच उसके ताऊ के लड़के योगेश और उसके दो साथियों ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान माैत हो गई। घटना के दो दिन बाद संजलि के ताऊ के लड़के योगेश ने विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। कुछ दिन बाद पुलिस ने मामले में खुलासा करते हुए आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा था।
करीब 6 साल बाद इस मामले में गांव कलवारी निवासी विजय व भवनपुरा निवासी आकाश को कोर्ट ने दोषी माना और दोनों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। दोनों आरोपी तब से जेल में बंद हैं। मां अनीता, बहन अंजलि, प्रज्ञा, भाई प्रवीण और गरुड़ आज भी अपनी बहन को याद कर भावुक हो जाते हैं। मां ने बताया कि हत्याकांड के बाद जनप्रतिनिधियों ने सहायता के कई वादे किए गए थे लेकिन परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी।
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कक्षा 10 की छात्रा संजलि स्कूल से घर लौट रही थी, इसी बीच उसके ताऊ के लड़के योगेश और उसके दो साथियों ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान माैत हो गई। घटना के दो दिन बाद संजलि के ताऊ के लड़के योगेश ने विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। कुछ दिन बाद पुलिस ने मामले में खुलासा करते हुए आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा था।
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करीब 6 साल बाद इस मामले में गांव कलवारी निवासी विजय व भवनपुरा निवासी आकाश को कोर्ट ने दोषी माना और दोनों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। दोनों आरोपी तब से जेल में बंद हैं। मां अनीता, बहन अंजलि, प्रज्ञा, भाई प्रवीण और गरुड़ आज भी अपनी बहन को याद कर भावुक हो जाते हैं। मां ने बताया कि हत्याकांड के बाद जनप्रतिनिधियों ने सहायता के कई वादे किए गए थे लेकिन परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी।
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