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Agra News: मृतक की विधवा को देने होंगे 7.50 लाख रुपये और ब्याज

Sun, 13 Jul 2025 01:27 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sun, 13 Jul 2025 01:27 AM IST
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The deceased's widow will have to be given Rs 7.50 lakh plus interest
मैनपुरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी की लखनऊ शाखा के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। बीमाधारक की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को धनराशि न देने के मामले में दायर याचिका पर आदेश दिया है कि बीमा कंपनी मृतक की पत्नी को दो माह के भीतर 7.50 लाख रुपये का भुगतान करे। याचिका दायर होने की तिथि से इस राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज भी अदा करे। साथ ही 10 हजार रुपये मानसिक कष्ट के रूप में और 6 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी भुगतान करे। इटावा जिले के बसरेहर थाना क्षेत्र के जैतपुर तोताराम गांव के निवासी रागिनी ने 23 जून 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया था कि उनके पति अरुण कुमार शाक्य ने 15 जनवरी 2022 को आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी, लखनऊ से 15 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा करवाया था, जिसकी वैधता 14 जनवरी 2023 तक थी। 4 मई 2022 को आगरा जाते समय इटावा-आगरा मार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में अरुण का निधन हो गया। बीमा के तहत क्लेम का कंपनी में दावा किया था। मगर, कंपनी ने भुगतान नहीं किया। आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास और नंद कुमार ने याचिका पर सुनवाई की। बैंक ने आयोग को बताया कि अरुण ने बीमा पॉलिसी में अपने पिता सुखलाल को नॉमिनी बनाया था। सुखलाल की मौत हो जाने के बाद मृतक की मां श्रीदेवी ने वारिसान प्रमाणपत्र के आधार पर बीमा कंपनी से बीमा की धनराशि के 15 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया था। बीमा कंपनी ने 30 मार्च 2023 को श्रीदेवी को भुगतान किया। मगर, आयोग ने पाया कि 23 जून 2022 को मृतक की पत्नी द्वारा दायर की गई याचिका की जानकारी बीमा कंपनी को नोटिस के माध्यम से हो चुकी थी। इसके बाद भी उन्होंने भुगतान एकतरफा कर दिया। इस पर रागिनी को बीमा की कुल 15 लाख की धनराशि में से 7.50 लाख रुपये का भुगतान दो माह के भीतर करे। साथ ही याचिका दायर होने की तिथि से इस राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज भी अदा करे। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बीमा कंपनी रागिनी को हुई परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मानसिक कष्ट के रूप में और 6 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी भुगतान करेगी। यह भुगतान भी दो महीने के भीतर करना होगा, लेकिन इस धनराशि पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। वहीं, शेष 7.50 लाख रुपये पर अगर, रागिनी चाहे तो वह न्यायिक प्रक्रिया करने को स्वतंत्र रहेगी।
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