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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   The death rattle is disturbed by the killer Salim

मौत की आहट से सहम गया हत्यारा सलीम

Sat, 23 May 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sat, 23 May 2015 02:00 AM IST
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केंद्रीय कारागार की हाई सिक्योरिटी बैरक में लगभग पांच सालों से बंद सलीम शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अखबार पढ़ते-पढ़ते एक खबर से सन्न रह गया। आंखें खुली की खुली रह गईं। बदन कांपने लगा। बड़ी तेजी से उठा, खिड़की से बाहर देखा, फिर माथे पर हाथ रखकर जमीन पर बैठ गया। काल कोठरी के बाहर खड़े बंदी रक्षक ने पूछा, क्या हुआ सलीम, ऐसा क्या छप गया अखबार में आज..? लड़खड़ाती आवाज में जवाब मिला, मेरी मौत का फरमान है भाई। जज ने मेरा डेथ वारंट जारी कर दिया है। यह कहकर गुमसुम हो गया।
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अमरोहा के जिला जज अशोक कुमार पाठक ने गुरुवार को ही सलीम और उसकी प्रेमिका शबनम का डेथ वारंट जारी किया। शबनम की मौत का आदेश तो गुरुवार शाम को ही अमरोहा जिला जेल पहुंच गया था, लेकिन सलीम का डेथ वारंट आगरा सेंट्रल जेल में शुक्रवार की रात तक भी नहीं आया। जेल के सूत्रों ने बताया कि सलीम को डेथ वारंट की जानकारी अखबार में खबर पढ़कर हुई।
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बता दें, शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14/15 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा के हसनपुर कस्बे से सटे गांव बावनखेड़ी में अपने परिवार के सात लोगों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया था। दोनों को 15 जुलाई 2010 को अमरोहा जिला जज ने सजा ए मौत सुनाई थी। हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को कंफर्म किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा बरकरार रखी। इसके बाद बृहस्पतिवार को दोनों का डेथ वारंट जारी कर दिया गया। शबनम अमरोहा जेल में बंद है, इसलिए उसका डेथ वारंट वहां भेजा गया। सलीम की मौत का फरमान आगरा सेंट्रल जेल आना है। जेलर लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि सलीम का डेथ वारंट अभी उन्हें नहीं मिला है। हालांकि सलीम को अखबार के माध्यम से इसकी जानकारी मिल गई है। सेंट्रल जेल में फांसी की व्यवस्था नहीं है। डेथ वारंट मिलने पर पता चलेगा कि उसे फांसी के लिए किस जेल में भेजना है। डेथ वारंट मिलते ही जेल प्रशासन उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजेगा।
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रोज पूछता है सलीम, कैसे टली थी कोली की फांसी
सलीम को अपनी मौत की आहट सुनाई देने लगी है। जेल के सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा बरकरार रहने के बाद वह ज्यादा बेचैन हुआ है। बंदी रक्षकों से पूछता है कि निठारी कांड के गुनहगार सुरेंद्र कोली की फांसी कैसे टली थी? उसे पता चला है कि दिल्ली की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर आए निर्णय से कोली फांसी पर लटकते लटकते रह गया था। इससे पहले मेरठ जेल में उसे फांसी देने का रिहर्सल भी हो चुका था। सलीम बंदी रक्षकों से उस संस्था का मोबाइल नंबर मांगता है। वह कहता है कि उसके भाई-बहन उन लोगों से संपर्क करेंगे।


मौत की सजा पाए 14 कैदी हैं यहां
सलीम, सजा ए मौत पाने वाला सेंट्रल जेल का अकेला कैदी नहीं है। यहां ऐसे 14 बंदी हैं, जिन्हें मृत्युदंड मिल चुका है। इनमें से आठ मथुरा के चर्चित मेहराना कांड के गुनहगार हैं। ये हैं कर्ण, सिर्रो, रमन, राम सिंह, कमल सिंह, तुलसीराम, बच्चू और तेज सिंह। इन्होंने 1991 में भरी पंचायत में प्रेमी युगल फंदे पर लटकाकर फांसी दे दी थी। इन सभी की याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। इनके अलावा झांसी का संतोष उर्फ तिड़के है, सुल्तानपुर का रामकरण, एटा का कमलेश, गाजियाबाद का सरोज। इन्होंने भी उच्च न्यायालय में अपील कर रखी है। इनके अतिरिक्त बुलंदशहर का संजय है, जिसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास है।
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