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सरकारी फर्ज के संग निभाते रहे जन सेवा का धर्म

Wed, 30 Jun 2021 10:58 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jun 2021 10:58 PM IST
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The concern of the family was not ahead of the duty
कासगंज चिकित्सक दिवस की खबर से संबंधित फोटो डा.राजकिशोर, सीएमएस - फोटो : KASGANJ
कासगंज। चिकित्सकों को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता, बल्कि चिकित्सक कुछ ऐसा करते भी हैं कि लोग उन्हें धरती का भगवान मानते रहें। ऐसा ही प्रमाण चिकित्सकों ने कोरोना काल में दिया। जब सरकारी सेवा के साथ साथ मानवीय आधार पर जन सेवा करते रहे। घर परिवार से दूरी रही, लेकिन फर्ज से कदम नहीं डिगे।
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कोरोना संक्रमित होने के बाद भी करते रहे दायित्वों का निर्वहन
- जिला चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा. राजकिशोर डॉक्टर डे की पूर्व संध्या पर सेवानिवृत्त हुए। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग उनकी सेवा और समर्पण की सराहना कर रहा है। कोविड अस्पताल का उन्होंने बखूबी संचालन किया। कोरोना संक्रमित होने के बाद भी उन्होंने अपनी सेवाएं चिकित्सालय में दीं। होम क्वारंटीन रहते हुए वर्चुअली हॉस्पिटल की सेवाएं देखीं। मरीजों का इलाज किया। कोरेाना की पहली और दूसरी लहर से अब तक कोरोना अस्पताल का बखूबी संचालन करते रहे। उनका कहना है कि वे लोगों के लिए जुटकर कार्यकर रहे थे, लेकिन कोरोना काल में उन्हें और उनके परिवार के लोगों को पड़ोसियों के भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन ऐसी परिस्थिति में वे हिम्मत नहीं हारे और अपनी सेवाएं देते रहे।
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संक्रमित होकर भी फोन से बनाईं व्यवस्थाएं
- कोरोना महामारी से बचाव की व्यवस्था में कोई कमी न रहे इसके लिए अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसपी सिंह सजग रहे। कोरोना संक्रमित होने के बाद भी होम क्वारंटीन में रहे लेकिन फर्ज की चिंता सताती रही। उन्होंने बताया कि कोरोना का इलाज घर पर ही रह कर लिया। साथ ही अस्पताल की व्यवस्थाएं भी फोन के माध्यम से संचालित कीं। अब कोरोना को मात देकर ड्यूटी पर वापस लौट आए हैं।
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शुरू से ही रहे कोरोना टीम का हिस्सा
- सोरों के चिकित्साधीक्षक डा. हरीश कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 से वे लेगातार कोरोना टीम मे रहे हैं। संक्रमितों का लगातार इलाज किया। इसके अलावा चिकित्सालय की अन्य व्यवस्थाएं भी संचालित कीं। लोगों को कोरोना जांच के लिए प्रेरित किया और अब टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हमेशा एक ही उद्देश्य रखा कि किसी मरीज को कोई दिक्कत न हो।
कई माह तक नहीं पहुंचे घर
- जिले के कोरोना अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले डा. धर्मेंद्र पौनिया कहते हैं कि अपने परिवार से दूर रहकर जिला अस्पताल में संक्रमितों का इलाज किया। दिनरात टीम के साथ व्यवस्थाओं में जुटे रहे। परिवार के लोगेंा से केवल फोन पर ही बातचीत करने का मौका मिलता था। पहली लहर जब शांत हुई तब घर जाने का मौका मिला। फिर दूसरी लहर के समय भी यही आलम रहा।
खुद संक्रमित हुए, लेकिन जज्जा नहीं छोड़ा
- जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक विनायक यादव बताते हैं कि पहली कोरोना लहर के दौरान वह अपने घर से दूर रहे। अस्पताल में ड्यूटी करते हुए कोरोना संक्रमितों का इलाज किया। पिछले वर्ष सितंबर माह में वह खुद भी संक्रमण का शिकार हुए और क्वारंटीन रहकर खुद का इलाज किया। उसके बाद ठीक होने पर फिर से उसी जज्बे के साथ काम पर लौट आए और अब भी मरीजों की सेवा के लिए तत्पर हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ भी हुए कोरोना का शिकार
- जिले के एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ डा. दिनेश शर्मा जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी पर रहे। प्रत्येक ड्यूटी के बाद दो दिन के लिए होम क्वारंटीन रहते थे, लेकिन लगातार सेवा करने के बाद हार नहीं मानी। वे जिस जज्बे से ड्यूटी करते थे उसी जज्बे को अपने साथी चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों के बीच बनाकर रखते रहे। परिवार के लोगों ने भी उनका हौंसला बढ़ाया। डा. दिनेश शर्मा का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य पर हर अभिभावक ध्यान दें। बच्चों के खान पान पर विशेष ध्यान दिया जाए जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रहे
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