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यूपी के बालिका गृह में सहेली का कत्ल: नहीं था कोई पैरोकार, शिवानी को समझा लाचार, इसलिए उतार दिया मौत के घाट

Tue, 25 Aug 2026 01:50 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 25 Aug 2026 01:50 PM IST
सार

यूपी के बालिका गृह में किशोरी की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। आरोपी किशोरियों ने शिवानी को लाचार समझा था। उसका कोई पैरोकार नहीं था। इसलिए आरोपी किशोरियों ने मौत के घाट उतार दिया था।

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Teenage girl murdered in girls shelter She had no one to advocate for her Shivani was seen as helpless mathura
balika grih murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मथुरा के वृंदावन में राजकीय बाल गृह (बालिका) में हुई किशोरी की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राजकीय बाल गृह को बंद कराने के लिए दोनों किशोरियों ने सुनियोजित योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों किशोरियों ने 14 वर्षीय शिवानी को केवल इसलिए चुना था कि उसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है। 
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दोनों किशोरी जानती थीं कि शिवानी के पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसकी मां मानसिक बीमारी से ग्रसित है। ऐसे में वारदात का पता चलने के बाद भी शिवानी के न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए कोई आगे नहीं आएगा और वह आसानी से कानूनी चंगुल से छूट जाएंगी।
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हत्या की आरोपी अलीगढ़ और पीलीभीत की किशोरियों ने पूछताछ में बताया कि वह हर हाल में बाल गृह को बंद कराना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने हत्या और कानूनी चंगुल से बचने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने साथी लड़कियों की कुंडली खंगालनी शुरू की। 

 
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इस दौरान उन्हें शिवानी की पारिवारिक परिस्थिति के बारे में जानकारी हुई। शिवानी के पिता की मृत्यु हो चुकी थी और उसकी मां मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं। उनका लखनऊ के अस्पताल में उपचार चल रहा है। परिवार में देखभाल करने वाला कोई सदस्य न होने के कारण वह पांच साल की उम्र से ही बाल गृह में रह रही है। 
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इस जानकारी के बाद उन्होंने सोचा कि अगर वह शिवानी की हत्या कर देती हैं तो उसकी पैरवी करने के लिए कोई नहीं आएगा। ऐसे में वह हत्या करने के बाद भी आसानी से बच जाएंगी। इसके बाद दोनों किशोरियों ने 21 अगस्त को शिवानी की बाथरूम में पानी से भारी बाल्टी में सिर डुबोकर हत्या कर दी।

शिवानी की हत्या करने के बाद दोनों किशोरियां इस तरह व्यवहार करती रहीं, जैसे उन्हें मामले की कोई जानकारी ही नहीं हो। किशोरी के अस्पताल ले जाने के बाद इन्हीं ने अन्य लड़कियों को हंगामे के लिए बरगलाया था। पुलिस प्राथमिकी में शामिल अन्य लड़कियों की भूमिका की जांच कर रही है।

वहीं मामले में अधीक्षिका से भी सवाल जवाब किए हैं। कैमरों की फुटेज को एफएसएल भेजकर जांच कराई जाएगी। पुलिस ने घटनास्थल से कई अन्य साक्ष्य भी जुटाए हैं। अधिकारियों ने बालिका गृह में किशोरियों के व्यवहार और स्टाफ की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटाई है।

बड़ी उम्र होने से था दबदबा
जांच में यह भी सामने आया है कि अलीगढ़ और पीलीभीत की रहने वाली दोनों आरोपी किशोरियां अन्य बालिकाओं की तुलना में उम्र में बड़ी थीं। इससे दोनों का बालिका गृह में दबदबा था। दोनों साथी किशोरियों से जबरन अपनी बात मनवाती थीं। स्टाफ भी उनसे ज्यादा सख्ती नहीं करता था।

 

किशोर न्याय बोर्ड ने भेजा बाराबंकी
पुलिस ने दोनों आरोपी किशोरियों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया। बोर्ड के आदेश के बाद दोनों को बाराबंकी स्थित किशोर संप्रेषण गृह भेज दिया गया है। वहीं बाल कल्याण समिति सोमवार को जांच के लिए बालिका गृह नहीं पहुंच सकी।

समिति के अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशासन या बालिका गृह की अधीक्षिका की ओर से समिति को घटना की सूचना नहीं दी गई। समिति ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। अब मंगलवार को बालिका गृह जाकर समिति जांच करेगी।

बेटी का चेहरा नहीं देख पाई मां
पोस्टमार्टम के बाद शिवानी का मथुरा के ध्रुव घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। आखिरी समय में मानसिक बीमारी से जूझ रही मां को बेटी की मौत की न तो जानकारी हो पाई और न ही वह उसका चेहरा देख पाई।
 
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