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ताज महोत्सवः स्थानीय कलाकारों की गायकी व नृत्य से झूमा मुक्ताकाशीय मंच
Sat, 29 Feb 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 29 Feb 2020 12:08 AM IST
सार
हॉलीवुड, बॉलीवुड, लोग गीतों, लोक नृत्य, समूह गायन, एकल गायन, मिमिक्री आदि का देर रात तक दौर चला।
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ताज महोत्सव में स्थानीय कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक मार्च तक बढ़े ताज महोत्सव में शुक्रवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समा बांध दिया। नन्हें कलाकारों से लेकर युवा कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा दिखाकर दर्शकों का दिल जीता। शिल्पग्राम के मुक्ताकाशीय मंच पर दोपहर से शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में हॉलीवुड, बॉलीवुड, लोग गीतों, लोक नृत्य, समूह गायन, एकल गायन, मिमिक्री आदि का देर रात तक दौर चला।
स्थानीय कलाकार शिल्पी अग्रवाल ने सुन रहा है न तू, रहा हूं मैं गाकर काफी वाहवाही लूटी। विशाल अग्रवाल की सुरीली आवाज को दर्शकों ने काफी सराहा। उदिति सिंह द्वारा प्रस्तुत किया भरतनाट्यम को दर्शकों ने काफी सराहा।
लुईब्रिल दृष्टि संस्थान के बच्चों की गायकी प्रतिभा का दर्शकों ने लोहा मान लिया। मुक्ताकाशीय मंच में मौजूद संगीत के जानकारों ने सुर, लय और ताल पर पकड़ की प्रशंसा की। स्थानीय गायिका नेहा ने मैं तो जुगनी, जुगनी सुनाकर शिल्पग्राम मंच के मुक्ताकाशीय मंच के कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
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स्थानीय कलाकार शिल्पी अग्रवाल ने सुन रहा है न तू, रहा हूं मैं गाकर काफी वाहवाही लूटी। विशाल अग्रवाल की सुरीली आवाज को दर्शकों ने काफी सराहा। उदिति सिंह द्वारा प्रस्तुत किया भरतनाट्यम को दर्शकों ने काफी सराहा।
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लुईब्रिल दृष्टि संस्थान के बच्चों की गायकी प्रतिभा का दर्शकों ने लोहा मान लिया। मुक्ताकाशीय मंच में मौजूद संगीत के जानकारों ने सुर, लय और ताल पर पकड़ की प्रशंसा की। स्थानीय गायिका नेहा ने मैं तो जुगनी, जुगनी सुनाकर शिल्पग्राम मंच के मुक्ताकाशीय मंच के कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
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दूसरे शहरों से आए कारीगरों को ताज महोत्सव की तिथि बढ़ने पर अपने नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद दिखाई दी। शुक्रवार को ताज महोत्सव में शाम से शहर के लोगों की भीड़ काफी बढ़ गई।
डिजाइनदार परिधान, खूबसूरी से उकेरी गईं मूर्तियां, महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन और खानपान वाले स्टाल्स पर काफी भीड़ दिखी। बच्चों के कपड़े, खिलौनों से लेकर अंग्रेजी नोबल और हिंदी साहित्य की दुकानों पर भी पाठकों ने अपनी रुचि की पुस्तकों को खोजा।
युवाओं में दिखी खुशी
ताज महोत्सव आगे बढ़ने को लेकर ताज महोत्सव पहुंचे युवा काफी खुश दिखे। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) में पढ़ने वाले राखी का कहना था कि लगभग सारे प्रदेशों की संस्कृति के सभी रुपों में यहां दर्शन होते हैं।
कुछ वस्तुएं काफी अच्छी हैं, लेकिन महंगी हैं। आनंद इंजीनियरिंग कालेज के छत्र आशुतोष का कहना था कि कई दिनों से सभी दोस्त ताज महोत्सव का प्रोग्राम बना रहे थे। तीन दिन बढ़ने की जानकारी होने पर हम सभी आज ही यहां आ गए।
डिजाइनदार परिधान, खूबसूरी से उकेरी गईं मूर्तियां, महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन और खानपान वाले स्टाल्स पर काफी भीड़ दिखी। बच्चों के कपड़े, खिलौनों से लेकर अंग्रेजी नोबल और हिंदी साहित्य की दुकानों पर भी पाठकों ने अपनी रुचि की पुस्तकों को खोजा।
युवाओं में दिखी खुशी
ताज महोत्सव आगे बढ़ने को लेकर ताज महोत्सव पहुंचे युवा काफी खुश दिखे। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) में पढ़ने वाले राखी का कहना था कि लगभग सारे प्रदेशों की संस्कृति के सभी रुपों में यहां दर्शन होते हैं।
कुछ वस्तुएं काफी अच्छी हैं, लेकिन महंगी हैं। आनंद इंजीनियरिंग कालेज के छत्र आशुतोष का कहना था कि कई दिनों से सभी दोस्त ताज महोत्सव का प्रोग्राम बना रहे थे। तीन दिन बढ़ने की जानकारी होने पर हम सभी आज ही यहां आ गए।