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UP: गाड़ियों में इंस्टॉल होगा ऐसा सिस्टम...सड़क के गड्ढों की करेगा पहचान, RBS के छात्रों ने किया तैयार
Sun, 18 May 2025 06:58 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 18 May 2025 06:58 AM IST
सार
आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी के छात्रों द्वारा एआई आधारित गड्ढा पहचान प्रणाली के लिए तैयार किए गए इस सिस्टम से सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
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प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट तैयार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भारत की सड़कों में गड्ढों की समस्या बहुत गंभीर है। वर्ष 2022 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार गड्ढों के कारण 4,446 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,856 लोगों की मृत्यु हुई। केंद्र सरकार ने 2024-25 के बजट में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क रखरखाव के लिए 2,600 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। गड्ढों का पता लगाने के पारंपरिक तरीकों में आमतौर पर मैन्युअल निरीक्षण या सर्वेक्षण अधिकारियों की रिपोर्ट शामिल होती है, जो की बहुत धीमी प्रक्रिया है।
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आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विभाग के छात्र तनिष्क कुमार, दिव्यांशु पांडे, शशांक परमार और शुभम कुशवाहा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का प्रयोग करते हुए सड़कों पर गड्ढों का पता लगाने के लिए प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट तैयार किया है। विभागाध्यक्ष डॉ. जयकुमार के मार्गदर्शन में छह माह के समय एवं करीब 11,000 रुपये की लागत से छात्रों ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है। वहीं इलेक्ट्रिकल विभाग के शिक्षक इंजीनियर उपेंद्र पाल सिंह और इंजीनियर उपासना सपरा ने भी सहयोग प्रदान किया है।
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योलो (यू ओनली लुक वन्स) सिस्टम से पता चलती है गड्ढे की लोकेशन
विभागाध्यक्ष डॉ. जयकुमार ने बताया कि गड्ढों की पहचान करने वाले एक प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट मॉडल में छात्रों ने रीयल-टाइम प्रोसेसिंग और कंट्रोल के लिए कैमरे का उपयोग किया है। पूरे सिस्टम को किसी भी गाड़ी पर इंस्टॉल किया जा सकता है। डॉ. जयकुमार ने बताया कि यह सिस्टम सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त सड़कों की तस्वीर लेता रहता है, तस्वीरों के आधार और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के योलो मॉडल से सिस्टम यह पता लगता है कि, रोड में कहां पर गड्ढा है। जहां गड्ढे प्राप्त हुए हैं उन लोकेशन के जीपीएस पर टैग कर लिया जाता है, जिससे हमें सड़क पर गड्ढे की लोकेशन पता चल जाता है।
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विभागाध्यक्ष डॉ. जयकुमार ने बताया कि गड्ढों की पहचान करने वाले एक प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट मॉडल में छात्रों ने रीयल-टाइम प्रोसेसिंग और कंट्रोल के लिए कैमरे का उपयोग किया है। पूरे सिस्टम को किसी भी गाड़ी पर इंस्टॉल किया जा सकता है। डॉ. जयकुमार ने बताया कि यह सिस्टम सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त सड़कों की तस्वीर लेता रहता है, तस्वीरों के आधार और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के योलो मॉडल से सिस्टम यह पता लगता है कि, रोड में कहां पर गड्ढा है। जहां गड्ढे प्राप्त हुए हैं उन लोकेशन के जीपीएस पर टैग कर लिया जाता है, जिससे हमें सड़क पर गड्ढे की लोकेशन पता चल जाता है।
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देशभर में उपयोगी साबित होगा प्रोजेक्ट
निदेशक (एकेडमिक) प्रो. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रोटोटाइप भविष्य में एक व्यावसायिक उत्पाद का रूप ले सकता है। यह समय रहते दुर्घटना बचाने में, लोगों का यात्रा में समय बचाने में, समय रहते हुए सड़कों की सही समय पर मरम्मत करने में मदद करेगा। यह देश भर में उपयोगी साबित होगा। निदेशक (वित्त एवं प्रशासन) प्रो. पंकज गुप्ता ने छात्रों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
निदेशक (एकेडमिक) प्रो. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रोटोटाइप भविष्य में एक व्यावसायिक उत्पाद का रूप ले सकता है। यह समय रहते दुर्घटना बचाने में, लोगों का यात्रा में समय बचाने में, समय रहते हुए सड़कों की सही समय पर मरम्मत करने में मदद करेगा। यह देश भर में उपयोगी साबित होगा। निदेशक (वित्त एवं प्रशासन) प्रो. पंकज गुप्ता ने छात्रों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।