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कूड़ा निकालने को यमुना में उतारे तैराक
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Wed, 18 Nov 2015 02:00 AM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद यमुना सफाई में नगर निगम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पानी में से पालीथिन बीनने के लिए नदी में तैराक उतार दिए है। मंगलवार शाम तक सफाई अभियान के दूसरे दिन दशहरा घाट से ताज टेनरी तक का अधिकांश कूड़ा उठा लिया गया।
एनजीटी ने सोमवार को यमुना को मूल स्वरूप में लाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ताजमहल के पूर्वी गेट की ओर स्थित यमुना किनारे लगे कूड़े के ढेर हटाने और नाला सफाई करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए दो दिन का समय दिया था। नगर निगम ने ट्रिब्युनल का आदेश मिलने से पहले ही ताजमहल स्थित दशहरा घाट से ताज टेनरी तक सफाई अभियान शुरू करा दिया था। 70 फीसदी कूड़ा सोमवार को ही उठा लिया गया था।नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने खुद अभियान का मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार सुबह से ही नगर निगम की टीम फिर से अभियान में जुट गई। कई ट्राली कूड़ा उठाया गया। यमुना किनारे लगे पालीथिन के ढेर साफ किए गए। नदी में से पालीथिन निकालने के लिए तैराक भी उतारने पड़े। शाम पांच बजे तक 90 फीसदी से ज्यादा यमुना किनारे साफ हो गए। वहीं, टेनरी के पास स्थित नाले की भी तली झाड़ सफाई लगभग पूरी हो गई।
अभी तो और भी हैं चुनौती
नगर निगम के लिए सिर्फ ताज टेनरी के पास ही एकत्रित कूड़ा चुनौती नहीं है। जनहित याचिकाकर्ता डीके जोशी ने यमुना किनारे गंदगी की और भी कई तस्वीरें बतौर साक्ष्य ट्रिब्युनल के समक्ष पेश की हैं। ऐसे में अगली सुनवाई के दौरान ट्रिब्युनल इन स्थानों की सफाई को लेकर भी सख्त हो सकता है।
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जुर्माने से बचने के लिए कवायद
ट्रिब्युनल ने पहली सुनवाई के दौरान यमुना में गंदगी डालने पर नगर निगम पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। तब तो अधिकारियों ने निगम के खाते से यह जुर्माने की रकम भर दी थी। मगर, इस बार एनजीटी ने यमुना में गंदगी साफ न करने पर संबंधित अधिकारियों पर एक लाख रुपये जुर्माना वसूलने की चेतावनी दी है। इसी से बचने के लिए निगम ने अपनी पूरी ताकत यमुना सफाई में झोंक दी है।
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एनजीटी ने सोमवार को यमुना को मूल स्वरूप में लाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ताजमहल के पूर्वी गेट की ओर स्थित यमुना किनारे लगे कूड़े के ढेर हटाने और नाला सफाई करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए दो दिन का समय दिया था। नगर निगम ने ट्रिब्युनल का आदेश मिलने से पहले ही ताजमहल स्थित दशहरा घाट से ताज टेनरी तक सफाई अभियान शुरू करा दिया था। 70 फीसदी कूड़ा सोमवार को ही उठा लिया गया था।नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने खुद अभियान का मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार सुबह से ही नगर निगम की टीम फिर से अभियान में जुट गई। कई ट्राली कूड़ा उठाया गया। यमुना किनारे लगे पालीथिन के ढेर साफ किए गए। नदी में से पालीथिन निकालने के लिए तैराक भी उतारने पड़े। शाम पांच बजे तक 90 फीसदी से ज्यादा यमुना किनारे साफ हो गए। वहीं, टेनरी के पास स्थित नाले की भी तली झाड़ सफाई लगभग पूरी हो गई।
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अभी तो और भी हैं चुनौती
नगर निगम के लिए सिर्फ ताज टेनरी के पास ही एकत्रित कूड़ा चुनौती नहीं है। जनहित याचिकाकर्ता डीके जोशी ने यमुना किनारे गंदगी की और भी कई तस्वीरें बतौर साक्ष्य ट्रिब्युनल के समक्ष पेश की हैं। ऐसे में अगली सुनवाई के दौरान ट्रिब्युनल इन स्थानों की सफाई को लेकर भी सख्त हो सकता है।
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जुर्माने से बचने के लिए कवायद
ट्रिब्युनल ने पहली सुनवाई के दौरान यमुना में गंदगी डालने पर नगर निगम पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। तब तो अधिकारियों ने निगम के खाते से यह जुर्माने की रकम भर दी थी। मगर, इस बार एनजीटी ने यमुना में गंदगी साफ न करने पर संबंधित अधिकारियों पर एक लाख रुपये जुर्माना वसूलने की चेतावनी दी है। इसी से बचने के लिए निगम ने अपनी पूरी ताकत यमुना सफाई में झोंक दी है।