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आगरा में कूड़े से बनेगी बिजली, कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर प्लांट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति

Fri, 19 Feb 2021 11:38 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 19 Feb 2021 11:38 AM IST
सार

  • चार साल से ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में अटके वेस्ट टू एनर्जी (कूडे़ से बिजली बनाने) प्लांट को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है।

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Supreme Court gave permission to plant to make electricity from garbage in TTZ agra
कुबेरपुर लैंडफिल साइट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा नगर निगम द्वारा कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट के लिए सर्वोच्च अदालत से अनुमति मांगी गई थी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि कूड़े का निपटारा करना पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। राज्य सरकार ने अनुमति मिलने पर कहा कि नीरी ने जो सुझाव दिए हैं, उनका पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

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टीटीजेड में कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट के लिए अक्तूबर 2017 में चेक रिपब्लिक के प्राग शहर की कंपनी स्पार्क ब्रेसन ने पैरवी की थी। कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट कुबेरपुर में यही कंपनी लगाएगी। 
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इस प्लांट की अनुमति के लिए गुरुवार को हुई सुनवाई में आगरा नगर निगम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी करते हुए कहा कि नेशनल एनवायरमेंट एंड इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने प्लांट को लेकर कोई आपत्ति नहीं की है। पर्यावरण प्रभाव आकलन प्लांट के पक्ष में है। नीरी के सुझाव के मुताबिक काम किया जाएगा। इस पर कोर्ट ने प्लांट को मंजूरी दे दी।

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550 मीट्रिक टन कचरे से बनेगी 10 मेगावाट बिजली
कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर चेकोस्लोवाकिया की कंपनी स्पार्क ब्रेसन 175 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट लगाएगी। इसमें नगर निगम का कोई पैसा खर्च नहीं होगा। कंपनी कूड़े से बिजली बनाकर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को बेचेगी। हर दिन 550 मीट्रिक टन कचरे से 10 मेगावाट बिजली बनाई जाएगी। बाद में इस प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 750 मीट्रिक टन की जा सकती है। तब 15 मेगावाट तक बिजली बनाई जा सकेगी। उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला प्लांट है।

सूखे और गीले कचरे से बिजली बनाने वाले देश का पहला प्लांट
स्पार्क ब्रेसन अधिकारियों का दावा है कि पूरे देश में ही अपनी तरह का यह अकेला प्लांट होगा। अन्य शहरों में केवल आरडीएफ यानी सूखे कचरे से ही बिजली बनाने के प्लांट लगाए गए हैं, जबकि इसमें सूखा और गीला दोनों तरह का मिक्स कचरा इस्तेमाल हो पाएगा। इसमें 4 फीसदी से ज्यादा सिल्ट नहीं होगी। इससे ज्यादा सिल्ट पर प्लांट में तकनीकि दिक्कतें आ जाएंगी। इसलिए सिल्ट और सीएंडडी वेस्ट के लिए अलग से 140 टीपीडी का प्लांट लगाया गया है, जो कुबेरपुर में ही लगाया जाएगा।

140 टीपीडी प्लांट को भी मिली मंजूरी
गुरुवार को न केवल कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट को अनुमति दी गई, बल्कि नगर निगम का सी एंड डी वेस्ट से ईंट, भराव के लिए मिट्टी निकालने और टाइल्स तैयार करने के 140 टीपीडी प्लांट को भी सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इन दोनों प्लांट के बनने के बाद शहर में हर दिन निकल रहे 750 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण हो पाएगा और कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ नजर ही नहीं आएंगे। 

आगरा नगर निगम से पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी सुप्रीम कोर्ट में लगातार पक्ष रखने के लिए गए। पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने बताया कि कूड़े से बिजली बनाने में जहां सूखा और गीला कचरा निस्तारित होगा, वहीं सीएंडडी वेस्ट से टाइल्स, ईंट, भराव के लिए मिट्टी निकलेगी। वैट स्क्रबर तकनीक का इस्तेमाल इस प्लांट में किया जाएगा।

नीरी के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट ने राह की आसान
नीरी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा. एसके गोयल और सीपीसीबी के अतिरिक्त निदेशक डा. एसके निगम ने कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट को जरूरी मानते हुए रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे कोर्ट ने न केवल माना, बल्कि नीरी की सिफारिशों को लागू करने के लिए भी कहा। नीरी एवं विशेषज्ञों ने कहा कि चिमनी से निकलने वाली गैस प्रमुखत जलवाष्प और कार्बन डाईऑक्साइड गैस होगी। 

इस प्लांट के प्रदूषण नियंत्रण मानक भारत स्टेज और यूरो मानकों के मुताबिक होंगे। पहले से जमा 6 लाख टन कूड़े के कारण मीथेन गैस बन रही है जो इस प्लांट के काम करने से नहीं बनेगी। तकनीक, ड्राइंग और कार्बन उत्सर्जन का पूरा ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया।

'14 महीने में होगा पूरा'
नगर आयुक्त निखिल टी. फुंडे ने बताया कि कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट को 14 माह में पूरा कर लिया जाएगा। प्लांट बनने के बाद कचरे का निस्तारण होने के साथ ऊर्जा जरूरतें भी पूरी होंगी। 

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