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आगरा में सप्लाई हो रहे पानी से इस लाइलाज बीमारी का खतरा

Tue, 06 Feb 2018 05:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Tue, 06 Feb 2018 05:17 PM IST
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supply of impure water in agra
यमुना का जलस्तर घटा - फोटो : अमर उजाला
आगरा में जलकल विभाग शहर को कभी शुद्ध पानी तो दे नहीं सका, लेकिन अब पानी के नाम पर ‘धीमा जहर’ जरूर पिला रहा है।जीवनी मंडी वाटर वर्क्स से पोषित इलाकों में पानी में मात्रा से अधिक क्लोरीन पाई जा रही है। 
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जलकल विभाग ने 25 स्थानों से नमूने लिए हैं, जहां पानी में अधिक क्लोरीन पाई गई है। चिकित्सकों के मुताबिक क्लोरीन की अधिक मात्रा मानव शरीर के लिए हानिकारक होती है। 
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शहर में जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटर वर्क्स से पानी की आपूर्ति होती है। वाटर वर्क्स से शोधित होने के बाद घरों तक पहुंचने वाला कितना शुद्ध रहता है, इसकी समय-समय पर जांच होती है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के पानी की जांच शहर में 25 प्वाइंट हैं। 
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यहां से नमूने लिए जाते हैं। जलकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक घरों तक पहुंचने वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा 0.1 या अधिक से अधिक 0.2 पीपीएम होनी चाहिए। यदि क्लोरीन नहीं पाई जाएगी तो इसका मतलब है कि पानी अशुद्ध है।  

लेकिन मात्रा से अधिक क्लोरीन मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती है। एसएन मेडिकल कॉलेज मेडीसिन विभाग के डॉ.टीपी सिंह के मुताबिक क्लोरीन की अधिक मात्रा पेट के रोग पैदा करती है। 

लंबे समय तक अधिक क्लोरीन के पीने से कैंसर भी हो सकता है। अधिक क्लोरीन युक्त पानी से नहाने से त्वचा के रोग हो सकते हैं। 

1100 क्यूसेक का डिस्चार्ज फिर भी पानी नहीं 

जलकल विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक गोकुल बैराज से 1100 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है, लेकिन जीवनी मंडी वाटर वर्क्स पर पानी की कमी है। 

हालात यह हैं कि जीवनी मंडी वाटर वर्क्स की क्षमता 225 एमएलडी पानी प्रतिदिन सप्लाई की है, लेकिन जलकल विभाग शहर में महज 80-90 एमएलडी पानी की सप्लाई कर पा रहा है। 

दरअसल गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे जीर्णोद्धार के चलते 45 एमएलडी का प्लांट तो पिछले कई दिनों से बंद चल रहा है। 10-15 फीसदी पानी शोधन में वेस्ट हो जाता है। बावजूद इसके महज 80-90 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। 

कर्मचारी कहते हैं कि वाटर वर्क्स पर पानी नहीं आ रहा है। इस वजह से यह यमुना पर बन रहे पुल की वजह से सेतु निगम ने धारा को मोड़ दिया है, लेकिन यदि जलकल विभाग चाहे तो वहां पाइप डालकर पानी सीधा वाटर वर्क्स की ओर ला सकता है। 

क्लोरीन और एलम का नहीं है हिसाब

जलकल विभाग के सूत्रों का कहना है कि यहां क्लोरीन और एलम की कितनी डोज पानी में डाली जा रही है, इसका नियम नहीं है। नदी में प्रदूषण बताकर क्लोरीन और एलम की डोज बढ़ा दी जाती है। कभी-कभी तो 90 पीपीएम तक की डोज दी जाती है। 

एक दिन में एलम की सिल्लियां 30-35 तक पहुंच जाती हैं। अब कितनी डोज दी जा रही है, यह जलकल विभाग के अफसर ही जानें।वर्तमान में यमुना के पानी को शुद्ध करने के लिए 42 पीपीएम क्लोरीन और 85 पीपीएम एलम की डोज दी जा रही है, जबकि 10 पीपीएम से अधिक क्लोरीनेशन नहीं किया जाना चाहिए। 

जलकल विभाग के सचिव चंदन सिंह का कहना है कि सामान्यत: एंड प्वाइंट पर क्लोरीन की मात्रा 0.1 से 0.2 पीपीएम तक होनी चाहिए, लेकिन प्रदूषण अधिक होता है तो प्लांट पर क्लोरीन बढ़ानी पड़ती है। 

इससे एंड प्वाइंट पर क्लोरीन की बढ़ जाती है। हालांकि हमारी केमिकल शाखा का मानना है कि 0.3-0.4 पीपीएम तक क्लोरीन पानी में हो सकती है। क्लोरीन क्यों बढ़ रही है, इसका पता लगाया जाएगा और इसमें सुधार किया जाएगा।
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