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ऐलान : सूकरक्षेत्र को सरकार ने तीर्थस्थल का दर्जा नहीं दिया तो फैसला लेगा महामंडलेश्वर
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सोरों में महामंडलेश्वर संत तीर्थस्थल घोषित करने की मांग करते>
- फोटो : KASGANJ
सोरों(कासगंज)। प्राचीन धर्मनगरी सोरों को प्रदेश सरकार से तीर्थस्थल घोषित करने की मांग को लेकर सूकर क्षेत्र संयुक्त विकास मोर्चा के बैनर तले आंदोलन जारी है। अब इस आंदोलन में बड़े संत महात्माओं के साथ ही महामंडलेश्वर भी जुड़ गए हैं। कैलाश पीठ बनारस के महामंडलेश्वर ने एलान किया है कि जल्द ही सोरों को तीर्थ का दर्जा न दिया गया तो धर्म संसद होगी।
महामंडलेश्वर आशुतोष आनंद द्वारा सोरों में आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मंच से महामंडलेश्वर संत स्वामी प्रकाशानंद ने सोरों तीर्थ बनाने के लिए चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को सोरों को जल्द से जल्द तीर्थस्थल घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सूकर क्षेत्र सोरों हिंदू धर्म में आस्था का बड़ा केंद्र है। वराह भगवान की मोक्ष स्थली भागीरथी गंगा व आदि गंगा को अपने आंचल में समेटे हुए है। यह स्थान हिंदू धर्म में बेहद ही प्राचीन एवं पवित्र स्थान है। इस पर सरकार का ध्यान केंद्रित न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने सभी संतो, मंडलेश्वरो, पीठाधीश्वरो से सूकर क्षेत्र सोरों के संबंध में वार्ता की है।
इस संबंध में अगर उत्तर प्रदेश सरकार शीघ्र ही सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थ स्थल की घोषणा नहीं करती है तो जल्द से जल्द यहां एक बड़ी धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़े-बड़े संतो को सोरों तीर्थ के लिए आमंत्रित करेंगे। बाल योगी रविदास ने बताया कि आज यहां सूक्ष्म रूप में मंडलेश्वरो की धर्म संसद का आयोजन किया गया है। जिसमें तीर्थ के मुद्दे को लेकर गहन मंथन हुआ है। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने एक प्रतिनिधिमंडल बनाया है जो शीघ्र ही उत्तर प्रदेश सरकार से मिलेगा और सोरों के तीर्थ की बात रखेगा।
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वराहपीठ के प्रमुख संत स्वामी विदेहानंद महाराज ने बताया कि तीर्थ आंदोलन का नेतृत्व अब जल्द ही संत करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार को इस पर जल्द निर्णय ले लेना चाहिए नहीं तो वराह पीठ के नेतृत्व में एक बड़ी धर्म संसद का आयोजन होगा। इस दौरान स्वामी प्रकाशानंद महाराज, विद्यानंद महाराज, रविदास महाराज, के गणेश जी, रघुनंदन,आनंद जी महाराज उपस्थित थे।
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महामंडलेश्वर आशुतोष आनंद द्वारा सोरों में आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मंच से महामंडलेश्वर संत स्वामी प्रकाशानंद ने सोरों तीर्थ बनाने के लिए चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को सोरों को जल्द से जल्द तीर्थस्थल घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सूकर क्षेत्र सोरों हिंदू धर्म में आस्था का बड़ा केंद्र है। वराह भगवान की मोक्ष स्थली भागीरथी गंगा व आदि गंगा को अपने आंचल में समेटे हुए है। यह स्थान हिंदू धर्म में बेहद ही प्राचीन एवं पवित्र स्थान है। इस पर सरकार का ध्यान केंद्रित न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने सभी संतो, मंडलेश्वरो, पीठाधीश्वरो से सूकर क्षेत्र सोरों के संबंध में वार्ता की है।
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इस संबंध में अगर उत्तर प्रदेश सरकार शीघ्र ही सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थ स्थल की घोषणा नहीं करती है तो जल्द से जल्द यहां एक बड़ी धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़े-बड़े संतो को सोरों तीर्थ के लिए आमंत्रित करेंगे। बाल योगी रविदास ने बताया कि आज यहां सूक्ष्म रूप में मंडलेश्वरो की धर्म संसद का आयोजन किया गया है। जिसमें तीर्थ के मुद्दे को लेकर गहन मंथन हुआ है। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने एक प्रतिनिधिमंडल बनाया है जो शीघ्र ही उत्तर प्रदेश सरकार से मिलेगा और सोरों के तीर्थ की बात रखेगा।
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वराहपीठ के प्रमुख संत स्वामी विदेहानंद महाराज ने बताया कि तीर्थ आंदोलन का नेतृत्व अब जल्द ही संत करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार को इस पर जल्द निर्णय ले लेना चाहिए नहीं तो वराह पीठ के नेतृत्व में एक बड़ी धर्म संसद का आयोजन होगा। इस दौरान स्वामी प्रकाशानंद महाराज, विद्यानंद महाराज, रविदास महाराज, के गणेश जी, रघुनंदन,आनंद जी महाराज उपस्थित थे।