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गन्ना भुगतान: इस साल 50 फीसदी भुगतान हीं कर सकेगी चीनी मिल
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कासगंज की न्यौली चीनी मिल
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। इस साल गन्ना बिक्री के एवज चीनी मिल पर बकाए भुगतान की आस लगाए बैठे किसानों की उम्मीद पूरी नहीं हो पाएगी। न्यौली चीनी मिल से विभाग द्वारा संकलित की गई जानकारी में स्पष्ट हुआ है कि चीनी मिल इस बार मात्र 50 फीसद भुगतान हीं किसानों को कर सकेगी। गन्ना विभाग चीनी बिक्री का सत्यापन करेगा। अब तक के सत्यापन में स्पष्ट हुआ है कि इस बार तैयार की गई अधिकांश चीनी की बिक्री कर दी गई है, लेकिन भुगतान पुराने सत्र का पूरा करने पर जोर है।
जिले में एकमात्र चीनी मिल है। कासगंज जिले के ही नहीं बल्कि पड़ोसी जिला बदायूं ,अलीगढ़ के भी किसान यहां गन्ना बिक्री करते हैं। इस साल किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि जल्द से जल्द पूरा भुगतान हो जाएगा, लेकिन अब उनकी इस उम्मीद पर पानी फिर रहा है, क्योंकि गन्ना विभाग द्वारा पूर्व में जो नोटिस जारी किया गया था उसके जवाब में न्यौली चीनी मिल ने स्पष्ट किया है कि पुराने सत्र का भुगतान बकाया होने के कारण इस सत्र का पूरा भुगतान करना संभव नहीं है।
इस सत्र में तैयार की गई चीनी बिक्री से पुराने सत्र के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। इधर गन्ना विभाग ने फिर से चीनी मिल को नोटिस जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक भुगतान करने की कोशिश करें। हालांकि अब चीनी मिल के स्पष्टीकरण से स्थिति साफ हुई है कि किसानों को इस सत्र में बिक्री किए गए गन्ने का पूरा भुगतान नहीं हो सकेगा।
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गन्ना किसान हरवीर सिंह, पहलवान सिंह, राकेश कुमार कहते हैं कि न्यौली चीनी मिल का रवैया पिछले कई सालों से इसी तरह का है। चीनी मिल पूरे साल भुगतान नहीं कर पाती है। जबकि नई पेराई सत्र में फिर से गन्ना बिक्री कर दिया जाता है। किसानों का करोड़ों रुपए बकाया रह जाता है। किसान अन्य स्रोतों से कर्ज लेते हैं।
न्यौली चीनी मिल में भंडारित चीनी का सत्यापन समय-समय पर किया जाता है। इस बार स्थिति स्पष्ट हुई है कि चीनी मिल में जो चीनी अब तक बिक्री की है। उससे पुराने सत्र और नए सत्र दोनों का भुगतान किया जा रहा है। पुराने सत्र का पूरा भुगतान करने पर चीनी मिल जोर दे रही है। नोटिस जारी किया गया है कि इस सत्र का भी अधिक से अधिक भुगतान करें।
ओम प्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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जिले में एकमात्र चीनी मिल है। कासगंज जिले के ही नहीं बल्कि पड़ोसी जिला बदायूं ,अलीगढ़ के भी किसान यहां गन्ना बिक्री करते हैं। इस साल किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि जल्द से जल्द पूरा भुगतान हो जाएगा, लेकिन अब उनकी इस उम्मीद पर पानी फिर रहा है, क्योंकि गन्ना विभाग द्वारा पूर्व में जो नोटिस जारी किया गया था उसके जवाब में न्यौली चीनी मिल ने स्पष्ट किया है कि पुराने सत्र का भुगतान बकाया होने के कारण इस सत्र का पूरा भुगतान करना संभव नहीं है।
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इस सत्र में तैयार की गई चीनी बिक्री से पुराने सत्र के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। इधर गन्ना विभाग ने फिर से चीनी मिल को नोटिस जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक भुगतान करने की कोशिश करें। हालांकि अब चीनी मिल के स्पष्टीकरण से स्थिति साफ हुई है कि किसानों को इस सत्र में बिक्री किए गए गन्ने का पूरा भुगतान नहीं हो सकेगा।
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गन्ना किसान हरवीर सिंह, पहलवान सिंह, राकेश कुमार कहते हैं कि न्यौली चीनी मिल का रवैया पिछले कई सालों से इसी तरह का है। चीनी मिल पूरे साल भुगतान नहीं कर पाती है। जबकि नई पेराई सत्र में फिर से गन्ना बिक्री कर दिया जाता है। किसानों का करोड़ों रुपए बकाया रह जाता है। किसान अन्य स्रोतों से कर्ज लेते हैं।
न्यौली चीनी मिल में भंडारित चीनी का सत्यापन समय-समय पर किया जाता है। इस बार स्थिति स्पष्ट हुई है कि चीनी मिल में जो चीनी अब तक बिक्री की है। उससे पुराने सत्र और नए सत्र दोनों का भुगतान किया जा रहा है। पुराने सत्र का पूरा भुगतान करने पर चीनी मिल जोर दे रही है। नोटिस जारी किया गया है कि इस सत्र का भी अधिक से अधिक भुगतान करें।
ओम प्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी