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विश्वविद्यालय की योजना : कॉलेजों से मिलेंगी वर्ष 2015 से 18 तक की डिग्रियां
Fri, 28 Aug 2020 01:11 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 28 Aug 2020 01:11 PM IST
सार
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्रियां कॉलेजों को भेजने का निर्णय लिया
- वर्ष 2015 से 19 तक की 7,38,747 डिग्रियां बनीं, महज 5000 डिस्पैच कीं
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2015 से 2018 तक की डिग्रियां कॉलेजों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने इस पर मुहर लगा दी है। कॉलेजों को आदेश जारी किया जाएगा कि वह छात्र-छात्राओं को डिग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराएंगे।
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विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 से 2019 तक की कुल 7,38,747 डिग्रियां बनीं हैं। इसमें से महज 5000 ही डिस्पैच की गईं हैं। करीब 7.32 लाख डिग्रियां विश्वविद्यालय में रखी हैं। डिग्री विभाग के प्रभारी प्रो. अनिल वर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के पास सभी छात्र-छात्राओं के सही पते नहीं हैं। इससे डिग्री उनके घरों पर नहीं भेजी जा सकती है।
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इस पर रास्ता निकाला गया है कि कॉलेजों के माध्यम से विद्यार्थियों को डिग्री उपलब्ध कराई जाएगी। कॉलेजों ने विद्यार्थियों के फॉर्म भरे हैं, उनके पास पते होंगे। उन पतों पर डिग्री भेजी जा सकती है। कुलपति ने इस निर्णय पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। कॉलेजों से समय-समय पर डिग्री वितरण की प्रगति पूछी जाएगी।
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छात्रों को विश्वविद्यालय की दौड़ नहीं लगानी होगी
कॉलेजों से डिग्री मिलने पर छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की दौड़ नहीं लगानी होगी। विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 के बाद की डिग्री के लिए आवेदन करने पर 300 रुपये भी जमा करने पड़ते हैं, इसकी बचत होगी। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी डिग्री घर नहीं पहुंच रही। आवेदकों को कई बार विवि के चक्कर काटने पड़ते हैं। डिग्री के लिए करीब 18 हजार ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं।
16 वर्षों की डिग्री का रिकॉर्ड नहीं
प्रोफेसर अनिल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1998 से 2014 तक की डिग्री का रिकॉर्ड मेंटेन नहीं है। किस वर्ष कितने विद्यार्थियों ने डिग्री के लिए आवेदन किया और कितने को डिग्री दी गई। इसका भी रिकॉर्ड बनवाया जा रहा है। वहीं, 1998 के पहले की कितनी डिग्री लंबित है, इसका भी रिकॉर्ड नहीं है।
कॉलेजों से डिग्री मिलने पर छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की दौड़ नहीं लगानी होगी। विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 के बाद की डिग्री के लिए आवेदन करने पर 300 रुपये भी जमा करने पड़ते हैं, इसकी बचत होगी। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी डिग्री घर नहीं पहुंच रही। आवेदकों को कई बार विवि के चक्कर काटने पड़ते हैं। डिग्री के लिए करीब 18 हजार ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं।
16 वर्षों की डिग्री का रिकॉर्ड नहीं
प्रोफेसर अनिल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1998 से 2014 तक की डिग्री का रिकॉर्ड मेंटेन नहीं है। किस वर्ष कितने विद्यार्थियों ने डिग्री के लिए आवेदन किया और कितने को डिग्री दी गई। इसका भी रिकॉर्ड बनवाया जा रहा है। वहीं, 1998 के पहले की कितनी डिग्री लंबित है, इसका भी रिकॉर्ड नहीं है।