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दोस्ती हो तो शिवा-शाहरुख जैसी: कांवड़ उठाकर निकले दोनों दोस्त, तीन साल से दे रहे हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
Thu, 20 Aug 2026 09:01 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 20 Aug 2026 09:01 PM IST
सार
सच्ची दोस्ती और अटूट श्रद्धा के आगे कोई सरहद या मजहब आड़े नहीं आता। कांवड़ लेकर चल रहे शिवा और शाहरुख इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। दोनों जिगरी दोस्त कछला गंगाघाट से बटेश्वर तक 140 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय कर रहे हैं।
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कांवड़ यात्रा पर निकले शाहरुख और शिवा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जहां एक ओर समाज में जाति और धर्म की दीवारें अक्सर दूरियां पैदा करती हैं, वहीं दो जिगरी दोस्तों ने मोहब्बत और भाईचारे की एक ऐसी इबारत लिखी है जो हर नफरत का जवाब है। बचपन से शुरू हुई यारी अब आस्था के उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां मजहब की लकीरें बेमानी हो जाती हैं। आगरा के बटेश्वर के रहने वाले शिवा और उनके जिगरी दोस्त शाहरुख पिछले तीन साल से हर साल कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं।
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इस बार भी 51 लीटर गंगाजल का कांवड़ उठाए कछला गंगाघाट से बटेश्वर तक की 140 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर निकले ये दोनों दोस्त साबित कर रहे हैं कि सच्ची दोस्ती और अटूट श्रद्धा के आगे कोई सरहद या मजहब आड़े नहीं आता। कस्बे से गुजरने पर कैंप में विश्राम पर चर्चा किए जाने पर शिवा ने बताया हम दोनों बचपन से साथ पढ़ रहे हैं। तीन वर्ष पहले शिवा के कांवड़ लाने की इच्छा जताने पर शाहरूख ने साथ देने का वादा किया था जो निरंतर निभा रहे हैं। धर्म उनकी आस्था और श्रद्धा में कतई आढ़े नहीं है।
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शिवा ने कहा कछला से कांवड़ लेने और बटेश्वर जाने, शिवालय पहुंचकर जलाभिषेक करने तक शाहरूख साथ रहता है। शाहरूख ने कहा भोलेनाथ सभी के हैं, रास्ते में मिलने वाले लोगों का आदर से स्वागत किए जाने से आत्मिक शांति मिलती है। शाहरूख ने कहा दोस्ती में धर्म और जाति आढ़े नहीं आनी चाहिए।
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