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Agra: सौर ऊर्जा से पीने लायक बनेगा खारा पानी, उपकरण बनाने में छात्रों को लगे छह माह, 14,500 रुपये हुए खर्च
Sat, 06 Jul 2024 02:14 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज डेस्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज डेस्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sat, 06 Jul 2024 02:14 PM IST
सार
सौर ऊर्जा के उपयोग से खारा पानी पीने लायक बनेगा। उन्नत उपकरण बनाने में छात्रों को छह माह लगे। 14,500 रुपये खर्च हुए।
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छात्रों ने सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर डिस्टिलेशन बनाया
- फोटो : संवाद
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में खारे पानी को पीने योग्य बनाने के लिए छात्रों ने सौर ऊर्जा से चलने वाला एक उन्नत उपकरण (वाटर डिस्टिलेशन) बनाया है। इसमें पारंपरिक सिस्टम की क्षमता और उत्पादकता दोनों बढ़ जाती है। यह काम राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के चार छात्रों ने किया है।
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प्रोजेक्ट गाइड इंजी. अरुण सिंह, इंजी. दीपेश शर्मा ने बताया कि हेमिस्फेरिकल सौर ऊर्जा चालित वाटर डिस्टिलेशन उपकरण (स्टिल) को बनाने में छात्रों को 6 माह का समय लगा। कुल लागत 14,500 रुपये आई है।
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संस्थान के निदेशक प्रो. बीएस कुशवाह ने बताया कि यह नवाचार भविष्य में पेयजल संकट का एक उचित समाधान हो सकता है। इसमें सोलर ऊर्जा से समुद्री जल को डिस्टिल्ड वाटर में बदला जाता है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के यशस्वी कुमार सिंह, हर्षिता अग्रवाल, समीक्षा और यश तेत्रिया ने इस पारंपरिक स्टिल में बदलाव किया।
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फेस चेंज मैटेरियल (पीसीएम) के साथ-साथ पैराबोलिक रिफ्लेक्टर का प्रयोग किया है, जिसमें कॉपर ट्यूब से सिंथेटिक ऑयल प्रवाह किया जाता है। यह पैराबोलिक रिफ्लेक्टर से प्राप्त ऊष्मा को स्टिल के बेसिन तक ले जाता है।
इससे सिस्टम की दक्षता बढ़ जाती है। पारंपरिक सोलर स्टिल में कुल उत्पादकता जहां 920 से 1000 मिली प्रतिदिन होती है, अधिकतम तापमान 54 डिग्री सेल्सियस तक जाता है। वहीं छात्रों के मोडिफाइड स्टिल की उत्पादकता 3.5 लीटर प्रतिदिन है, तापमान अधिकतम 72 डिग्री सेल्सियस तक जाता है।
छात्रों ने कहा कि इस स्टिल का साइज यदि बड़ा बनाया जाए तो उत्पादकता और भी बढ़ जाएगी। विभागाध्यक्ष डॉ अमित अग्रवाल ने कहा कि इससे कोई भी स्टार्टअप शुरू हो सकता है। निदेशक वित्त एवं प्रशासनिक प्रो. पंकज गुप्ता ने कहा कि छात्र हमेशा से देश व समाज के लिए नित नए अविष्कार करते आ रहे हैं। छात्रों के इस कार्य में विभाग के अनुराग कुलश्रेष्ठ, अभिषेक दीक्षित और राघवेंद्र सिंह का अहम योगदान रहा है।