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खाने में कमियां निकालने लगे पति, कुछ कहने पर चीखते हैं, जानिए आखिर गर्मी में क्यों हो रहा ऐसा
Thu, 13 Jun 2019 05:28 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 13 Jun 2019 05:28 PM IST
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Stress
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केस स्टडी एक:
100 फुटा रोड, दयालबाग स्थित 28 साल की महिला मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास पहुंची और कहा कि उनके पति मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं। 15-20 दिन से उनके व्यवहार में चेंज आया है। खाने में कमियां निकालते हैं, गुस्सा करते हैं। मेरे कुछ कहने पर चीखकर बातें करते हैं। उनकी इस बदली आदत से कुछ कहने से भी डर लगने लगा है।
केस स्टडी दो:
कमला नगर के 34 साल के व्यक्ति कंपनी में सेल्स एग्जक्यूटिव हैं। थोड़ा कार्य करने से थकान होने, कार्य में मन न लगने, झल्लाहट होने की शिकायत लेकर डाक्टर के पास पहुंचे।
डाक्टर की पूछताछ में पता चला कि देर रात तक जागकर कंपनी का कार्य निपटाते हैं। दिन में भी आराम का वक्त नहीं मिलता। इस पर डाक्टर ने दवा से ज्यादा मानसिक आराम की जरूरत बताई।
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100 फुटा रोड, दयालबाग स्थित 28 साल की महिला मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास पहुंची और कहा कि उनके पति मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं। 15-20 दिन से उनके व्यवहार में चेंज आया है। खाने में कमियां निकालते हैं, गुस्सा करते हैं। मेरे कुछ कहने पर चीखकर बातें करते हैं। उनकी इस बदली आदत से कुछ कहने से भी डर लगने लगा है।
केस स्टडी दो:
कमला नगर के 34 साल के व्यक्ति कंपनी में सेल्स एग्जक्यूटिव हैं। थोड़ा कार्य करने से थकान होने, कार्य में मन न लगने, झल्लाहट होने की शिकायत लेकर डाक्टर के पास पहुंचे।
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डाक्टर की पूछताछ में पता चला कि देर रात तक जागकर कंपनी का कार्य निपटाते हैं। दिन में भी आराम का वक्त नहीं मिलता। इस पर डाक्टर ने दवा से ज्यादा मानसिक आराम की जरूरत बताई।
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stress
- फोटो : pexels.com
लगातार गर्मी से लोगों में चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा होने की शिकायत बढ़ रही है। गर्मी में नींद नहीं आने से दिमाग में ‘केमिकल लोचा’ (रासायनिक असंतुलन) से दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञ डाक्टरों के पास पांच से आठ फीसदी ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
पिछले दो सप्ताह से पारा 45 डिग्री के आसपास रह रहा है। लगातार तापमान ऐसा रहने से लोगों में तेज बोलने, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होने, थकावट आदि की शिकायत हो रही है।
एसएन मेडिकल कालेज में 90 से 120 मरीजों की रोजाना ओपीडी हो रही है। इसमें सात से 10 मरीज इस तरह की शिकायत लेकर आ रहे हैं। निजी चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या बढ़ी है।
पिछले दो सप्ताह से पारा 45 डिग्री के आसपास रह रहा है। लगातार तापमान ऐसा रहने से लोगों में तेज बोलने, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होने, थकावट आदि की शिकायत हो रही है।
एसएन मेडिकल कालेज में 90 से 120 मरीजों की रोजाना ओपीडी हो रही है। इसमें सात से 10 मरीज इस तरह की शिकायत लेकर आ रहे हैं। निजी चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या बढ़ी है।
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसी गर्ग बताते हैं कि मस्तिष्क में नॉर-एपिनेफ्रीन हार्मोन न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में कार्य करता है। लगातार गर्मी से इसमें परिवर्तन होता है, इससे लोग उत्तेजित हो जाते हैं। इसके चलते पत्नी से नोंकझोंक, चौराहों पर मामूली बात पर झगड़ा तक कर लेते हैं। यह समस्या अस्थायी रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में 230 से 260 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इसमें 10-15 मरीज ऐसे रहते हैं, जिनकी दवाएं बीच में छूटने से मर्ज बढ़ गई। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर बताते हैं कि गर्मी में कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है।
पर्याप्त नींद नहीं आने और काम के दबाव से लोगों के व्यवहार में बदलाव आता है। बात-बात पर गुस्सा, मामूली बात पर झगड़ा कर सकते हैं। लेकिन, मानसिक रोगियों की गर्मी के कारण दवाएं बंद होना ज्यादा खतरनाक है। इससे मर्ज बढ़ने पर वह हिंसक भी हो जाते हैं। इस तरह के मरीजों के तीमारदारों को दवाएं बंद न करने की सीख दे रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में 230 से 260 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इसमें 10-15 मरीज ऐसे रहते हैं, जिनकी दवाएं बीच में छूटने से मर्ज बढ़ गई। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर बताते हैं कि गर्मी में कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है।
पर्याप्त नींद नहीं आने और काम के दबाव से लोगों के व्यवहार में बदलाव आता है। बात-बात पर गुस्सा, मामूली बात पर झगड़ा कर सकते हैं। लेकिन, मानसिक रोगियों की गर्मी के कारण दवाएं बंद होना ज्यादा खतरनाक है। इससे मर्ज बढ़ने पर वह हिंसक भी हो जाते हैं। इस तरह के मरीजों के तीमारदारों को दवाएं बंद न करने की सीख दे रहे हैं।
गर्मी से बचाव के लिए ये करें उपाय :
- खूब पानी पिएं, छाछ, नारियल पानी, पना पीएं।
- ठंडा तरबूज खाएं, सलाद और हरी सब्जी उपयोग करें।
- मसालेदार, चिकनाईयुक्त और बाहर के भोजन से बचें।
- सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जल्दी सोने का प्रयास करें।
- देर रात तक मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचें
- खूब पानी पिएं, छाछ, नारियल पानी, पना पीएं।
- ठंडा तरबूज खाएं, सलाद और हरी सब्जी उपयोग करें।
- मसालेदार, चिकनाईयुक्त और बाहर के भोजन से बचें।
- सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जल्दी सोने का प्रयास करें।
- देर रात तक मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचें