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आगरा: लॉकडाउन से आया संकट झेला लेकिन नहीं मानी हार, शुरू किया नया व्यापार
Sun, 17 Jan 2021 11:56 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 17 Jan 2021 11:56 AM IST
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लॉकडाउन के बाद नया कारोबार शुरू करने वाले व्यापारी
- फोटो : अमर उजाला
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अमित, राजा, राजकुमार और धवल भी उन लोगों में से हैं, जिन्होंने लॉकडाउन से आया संकट झेला। लेकिन उनके धैर्य और हिम्मत ने संकट से पार लगा दिया। न केवल खुद बल्कि और लोगों के लिए रोजगार खड़ा कर दिया। किसी ने नया कारोबार, नई इकाई तो किसी ने काम का ट्रेंड ही बदल डाला। मिडनाइट बाजार में चारों ने अलग-अलग उत्पादों की स्टॉल लगाई हुई है। अमित ने नमकीन, राजा ने कपड़े, राजकुमार ने घर में इस्तेमाल में आने वाला सामान और धवल ने कंबल और बेडशीट का स्टॉल लगाया है।
बेटे के साथ से 50 लोगों को मिल रहा रोजगार
कमला नगर निवासी अमित सिंघल पिछले 15 सालों से नमकीन बनाने का कारोबार कर रहे हैं। लेकिन लॉकडाउन में काम एकदम ठप हो गया। इसे दोबारा शुरू करना चुनौती बन गई थी। क्योंकि बाजार में पहले से बड़ी और स्थापित कंपनियों की पैठ बनी हुई थी। ऐसे में बेटे का साथ मिला। उसने कारोबार को बढ़ाने के लिए वैरायटी बढ़ाने को कहा। लेकिन ये आसान नहीं था। इसके लिए प्रशिक्षित लोगों को काम पर रखा। धीरे धीरे पूर्वांचल तक काम फैला दिया। इस समय 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
पति-पत्नी ने मिलकर बनाई पहचान
मारुति एस्टेट निवासी राजा और पत्नी वर्षा चंद्रवानी का 10 साल पुराना कपड़े का काम है। घर से काम करते हैं। लेकिन ये सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। खासकर लॉकडाउन ने परेशान किया, हिम्मत से मुश्किल सफर पार किया। वे बताते हैं कि लॉकडाउन में जब कपडे़ का काम ठप हो गया तो पैसों की आवक बंद हो गई। ऐसे में किसी ने मसाले का काम करने का सुझाया। घर-दुकान जाकर आपूर्ति की। इस समय कपड़े, मसाले और फिनायल का काम अच्छे से चल रहा है।
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बेटे के साथ से 50 लोगों को मिल रहा रोजगार
कमला नगर निवासी अमित सिंघल पिछले 15 सालों से नमकीन बनाने का कारोबार कर रहे हैं। लेकिन लॉकडाउन में काम एकदम ठप हो गया। इसे दोबारा शुरू करना चुनौती बन गई थी। क्योंकि बाजार में पहले से बड़ी और स्थापित कंपनियों की पैठ बनी हुई थी। ऐसे में बेटे का साथ मिला। उसने कारोबार को बढ़ाने के लिए वैरायटी बढ़ाने को कहा। लेकिन ये आसान नहीं था। इसके लिए प्रशिक्षित लोगों को काम पर रखा। धीरे धीरे पूर्वांचल तक काम फैला दिया। इस समय 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
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पति-पत्नी ने मिलकर बनाई पहचान
मारुति एस्टेट निवासी राजा और पत्नी वर्षा चंद्रवानी का 10 साल पुराना कपड़े का काम है। घर से काम करते हैं। लेकिन ये सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। खासकर लॉकडाउन ने परेशान किया, हिम्मत से मुश्किल सफर पार किया। वे बताते हैं कि लॉकडाउन में जब कपडे़ का काम ठप हो गया तो पैसों की आवक बंद हो गई। ऐसे में किसी ने मसाले का काम करने का सुझाया। घर-दुकान जाकर आपूर्ति की। इस समय कपड़े, मसाले और फिनायल का काम अच्छे से चल रहा है।
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लॉकडाउन के बाद डाली फैक्टरी
कर्मयोगी निवासी राजकुमार जैन ने बताया कि उनका सराफा का पुश्तैनी काम है। लॉकडाउन में काम हल्का हुआ, तो सोचा कि कुछ और काम भी शुरू करना चाहिए। काम को लेकर कशमकश थी कि क्या शुरू किया जाए। ऐसे में अपने मित्र की सलाह पर टॉयलेट क्लिनर जैसे उत्पाद बनाने शुरू कर दिया। इसके लिए मार्केटिंग जरूरी थी। ऐसे में दो लोगों को काम पर रखा। काम चल निकला। इस समय आगरा मंडल में सामान की आपूर्ति हो रही है।
...तो ऑनलाइन शुरू किया काम
शिवाजी नगर निवासी धवल अग्रवाल का करीब 100 साल पुराना बेडशीट, कंबल आदि का काम है। वे पांचवीं पीढ़ी हैं, जो इस काम में हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन ने जमे जमाए काम को काफी प्रभावित किया। ऐसे में समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। इंजीनियर बड़े भाई ने काम को ऑनलाइन भी शुरू करने को कहा। उनका कहा काम कर गया। ई प्लेटफॉर्म पर भी आपूर्ति करनी शुरू कर दिया। इधर, ये काम भी व्यवस्था पर पहले जैसा आ गया। नए काम से चार लोगों को रोजगार मिल रहा है।
कर्मयोगी निवासी राजकुमार जैन ने बताया कि उनका सराफा का पुश्तैनी काम है। लॉकडाउन में काम हल्का हुआ, तो सोचा कि कुछ और काम भी शुरू करना चाहिए। काम को लेकर कशमकश थी कि क्या शुरू किया जाए। ऐसे में अपने मित्र की सलाह पर टॉयलेट क्लिनर जैसे उत्पाद बनाने शुरू कर दिया। इसके लिए मार्केटिंग जरूरी थी। ऐसे में दो लोगों को काम पर रखा। काम चल निकला। इस समय आगरा मंडल में सामान की आपूर्ति हो रही है।
...तो ऑनलाइन शुरू किया काम
शिवाजी नगर निवासी धवल अग्रवाल का करीब 100 साल पुराना बेडशीट, कंबल आदि का काम है। वे पांचवीं पीढ़ी हैं, जो इस काम में हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन ने जमे जमाए काम को काफी प्रभावित किया। ऐसे में समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। इंजीनियर बड़े भाई ने काम को ऑनलाइन भी शुरू करने को कहा। उनका कहा काम कर गया। ई प्लेटफॉर्म पर भी आपूर्ति करनी शुरू कर दिया। इधर, ये काम भी व्यवस्था पर पहले जैसा आ गया। नए काम से चार लोगों को रोजगार मिल रहा है।