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श्रीपारस अस्पताल: नोटिस देकर 15 महीने से कार्रवाई भूला विकास प्राधिकरण
Mon, 12 Sep 2022 05:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 12 Sep 2022 05:10 PM IST
सार
एडीए के अलावा श्रीपारस अस्पताल के पास अग्निशमन, नगर निगम, जल एवं वायु प्रदूषण, राष्ट्रीय राजमार्ग, नजूल व सिंचाई विभाग की एनओसी भी नहीं थीं।
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श्रीपारस अस्पताल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा विकास प्राधिकरण की दोहरी नीतियां देखिए। एक तरफ लेवाना होटल अग्निकांड में 4 लोगों की मौत के बाद अनियमितता व लापरवाही पर लखनऊ प्राधिकरण के 15 अधिकारी व इंजीनियर निलंबित हो गए हैं, दूसरी तरफ कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन मॉकड्रिल कांड से सुर्खियों में आए श्रीपारस अस्पताल के विरुद्ध अवैध निर्माण का नोटिस जारी होने के 15 महीने बाद एडीए कार्रवाई नहीं की गई है।
पिछले साल अप्रैल में आगरा विकास प्राधिकरण ने श्रीपारस को अवैध निर्माण करने व बिना नक्शा पास कराए अस्पताल संचालित करने पर नोटिस दिया था। लेकिन रसूख के आगे यहां नियम-कायदे बौने साबित हुए। नोटिस देने के बाद ध्वस्तीकरण करने की बजाय विकास प्राधिकरण कार्रवाई भूल गया। जबकि मुख्यमंत्री के आदेश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण लेवाना होटल के विरुद्ध अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने जा रहा है।
एडीए के अलावा श्रीपारस अस्पताल के पास अग्निशमन, नगर निगम, जल एवं वायु प्रदूषण, राष्ट्रीय राजमार्ग, नजूल व सिंचाई विभाग की एनओसी भी नहीं थीं। जिस प्लॉट में अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी की गई उसका 20 साल पहले आवासीय भवन में नक्शा पास हुआ था। जबकि मौके पर अस्पताल के रूप में व्यावसायिक गतिविधियां हो रही थीं। इस मामले में प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठे थे। प्रशासन ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी। पुलिस ने एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की। उधर, अब शासन से भी अस्पताल को क्लीनचिट मिल गई है।
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पिछले साल अप्रैल में आगरा विकास प्राधिकरण ने श्रीपारस को अवैध निर्माण करने व बिना नक्शा पास कराए अस्पताल संचालित करने पर नोटिस दिया था। लेकिन रसूख के आगे यहां नियम-कायदे बौने साबित हुए। नोटिस देने के बाद ध्वस्तीकरण करने की बजाय विकास प्राधिकरण कार्रवाई भूल गया। जबकि मुख्यमंत्री के आदेश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण लेवाना होटल के विरुद्ध अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने जा रहा है।
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एडीए के अलावा श्रीपारस अस्पताल के पास अग्निशमन, नगर निगम, जल एवं वायु प्रदूषण, राष्ट्रीय राजमार्ग, नजूल व सिंचाई विभाग की एनओसी भी नहीं थीं। जिस प्लॉट में अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी की गई उसका 20 साल पहले आवासीय भवन में नक्शा पास हुआ था। जबकि मौके पर अस्पताल के रूप में व्यावसायिक गतिविधियां हो रही थीं। इस मामले में प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठे थे। प्रशासन ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी। पुलिस ने एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की। उधर, अब शासन से भी अस्पताल को क्लीनचिट मिल गई है।
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