श्री पारस अस्पताल प्रकरण: मृतकों के परिजन दूर-दराज से लेकर आए थे सिलिंडर, नहीं मिले वापस
आगरा में ऑक्सीजन प्लांट से 15-15 हजार रुपये में सिक्योरिटी जमा कर लिए सिलिंडर की सिक्योरिटी वापस कराने के लिए भी पीड़ित भटक रहे हैं।
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आगरा के श्री पारस अस्पताल में मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आए तीमारदारों को खाली सिलिंडर नहीं लौटाए। कोई फतेहाबाद से सिलिंडर लाया, तो किसी ने धौलपुर से मंगाया था। मरीज की मृत्यु के बाद भी पीड़ितों को खाली सिलिंडर वापस नहीं मिले।
ऑक्सीजन संकट के विकराल दौर में आगरा में सिर्फ सिकंदरा प्लांट से सिलिंडर मिल रहे थे। दूसरी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। तब टेढ़ी बगिया में प्लांट चालू नहीं हो सका था। होम आईसोलेशन व घर पर भी मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर तीमारदारों ने प्लांट से खरीदे।
नगला मोहन लाल निवासी गोपाल शंकर ने बताया कि 15 हजार रुपये देकर एक सिलिंडर सिकंदरा प्लांट से लाया था। मेरे पिता को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। दो हजार रुपये गैस व 13 हजार रुपये सिक्योरिटी जमा कराई।
दो महीने बाद भी नहीं मिला सिलिंडर
गोपाल ने बताया कि मैंने 23 अप्रैल को सिलिंडर खरीदा था। 12 मई को मैंने सिलिंडर वापस करने गया तो सिलिंडर रखवा लिया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए। मैंने रसीदें भी दिखाई। परंतु पैसे सिक्योरिटी राशि वापस नहीं की गई। एक तरफ श्री पारस अस्पताल में दिए सिलिंडर तीमारदारों को वापस नहीं हुए, दूसरी तरफ प्लांट से लाए सिलिंडर के बदले वसूली गई रकम भी पीड़ितों को वापस नहीं की गई।
मधु नगर निवासी 62 वर्षीय रामवती 11 दिन श्री पारस अस्पताल में भर्ती रहीं। पति नत्थीलाल ने बताया कि 26 अप्रैल को ऑक्सीजन खत्म होने की बात कह स्टाफ ने सिलिंडर लाने को कहा। मैंने धोलपुर से एंबुलेंस चालक से छह हजार रुपये में सिलिंडर मंगाया। शाम को पत्नी की मृत्यु हो गई। अस्पताल से खाली सिलिंडर वापस नहीं मिला।
मालवीय कुंज निवासी 58 वर्षीय मीना ग्रोवर की मृत्यु 26 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में हुई थी। उनकी ननद गीतिमा ने बताया कि हमने फतेहाबाद से 12 हजार रुपये में ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाकर अस्पताल में दिया। उसे लगाया नहीं गया। सिलिंडर भी वापस नहीं मिला। अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं होने के कारण मरीजों की मौत हुई हैं।
डी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत दूसरी लहर से पहले 500 रुपये थी। मई में जिला प्रशासन ने भी 500 रुपये कीमत तय कीं। परंतु अप्रैल में जब ऑक्सीजन का संकट था तब 500 रुपये का सिलिंडर 1200 से 1500 रुपये में कोविड व नॉन कोविड अस्पतालों को बेचे गए। तीन अस्पताल संचालकों ने 700 से 1000 रुपये अधिक लेने पर आपत्ति जताई थी, परंतु उनकी सुनवाई नहीं हुई।