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भगवान श्रीकृष्ण विराजमान मामला: दो संस्थाओं ने वाद में पक्षकार बनाने के लिए अपील की
Thu, 12 Nov 2020 07:31 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 12 Nov 2020 07:31 AM IST
सार
श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के मामले में पूर्व में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान व लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में एक वाद दायर किया गया था।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से जन्मभूमि पर मालिकाना हक को लेकर जिला जज की अदालत में दायर वाद में दो संस्थाओं ने पक्षकार बनाने के लिए अपील की है। माथुर चतुर्वेद परिषद और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने बुधवार को जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किए हैं।
संबंधित खबर: मथुरा: कोर्ट ने स्वीकार की 'श्रीकृष्ण विराजमान' की अपील, जन्मभूमि मामले पर 18 नवंबर को अगली सुनवाई
माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी, निरीक्षक संजीव और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक, उपाध्यक्ष नवीन नागर ने बुधवार को जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में अलग-अलग प्रार्थना पत्र दिए। जिनमें कहा गया है कि भगवान श्रीकृष्ण का हमसे बड़ा भक्त कोई नहीं हो सकता। हम ऐसे समाज से जुड़े हैं, जिसका जीवन पंडा व पुरोहितगिरी पर आधारित है। यदि पूर्व में दायर हुए वाद से कोई विवाद होता है तो इसका सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ेगा।
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दाखिल किए गए प्रार्थना पत्र में 1991 में लागू हुए उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम का भी हवाला दिया गया है। कहा है कि यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से लागू माना गया है। जबकि कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह पिछले तीन सौ साल से कायम चली आ रही है। ऐसे में ये वाद इस अधिनियम से बाधित है और दायर ही नहीं किया जा सकता है। दोनों संस्थाओं की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि इस मामले में हमें पक्षकार बनाया जाए। माथुर चतुर्वेद परिषद के अधिवक्ता केके अरोड़ा और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अधिवक्ता रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि अदालत इस मामले में 18 नवंबर को सुनवाई करेगी।
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माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी, निरीक्षक संजीव और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक, उपाध्यक्ष नवीन नागर ने बुधवार को जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में अलग-अलग प्रार्थना पत्र दिए। जिनमें कहा गया है कि भगवान श्रीकृष्ण का हमसे बड़ा भक्त कोई नहीं हो सकता। हम ऐसे समाज से जुड़े हैं, जिसका जीवन पंडा व पुरोहितगिरी पर आधारित है। यदि पूर्व में दायर हुए वाद से कोई विवाद होता है तो इसका सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ेगा।
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दाखिल किए गए प्रार्थना पत्र में 1991 में लागू हुए उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम का भी हवाला दिया गया है। कहा है कि यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से लागू माना गया है। जबकि कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह पिछले तीन सौ साल से कायम चली आ रही है। ऐसे में ये वाद इस अधिनियम से बाधित है और दायर ही नहीं किया जा सकता है। दोनों संस्थाओं की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि इस मामले में हमें पक्षकार बनाया जाए। माथुर चतुर्वेद परिषद के अधिवक्ता केके अरोड़ा और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अधिवक्ता रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि अदालत इस मामले में 18 नवंबर को सुनवाई करेगी।
ये है मामला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसाइटी और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह के मामले में पूर्व में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान व लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में एक वाद दायर किया गया था। इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह को प्रतिवादी बनाया गया था।
इसमें 1968 में शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान है) के बीच हुए समझौते को रद कर मस्जिद को हटाने और 13.37 एकड़ की भूमि ट्रस्ट को देने की मांग की गई थी।
इस मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से वाद खारिज हो गया था। ऐसे में 12 अक्तूबर को वादी की ओर से जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में अपील दायर की गई थी। जिला जज ने मामले की सुनवाई करते हुए चारों प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसाइटी और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह के मामले में पूर्व में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान व लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में एक वाद दायर किया गया था। इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह को प्रतिवादी बनाया गया था।
इसमें 1968 में शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान है) के बीच हुए समझौते को रद कर मस्जिद को हटाने और 13.37 एकड़ की भूमि ट्रस्ट को देने की मांग की गई थी।
इस मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से वाद खारिज हो गया था। ऐसे में 12 अक्तूबर को वादी की ओर से जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में अपील दायर की गई थी। जिला जज ने मामले की सुनवाई करते हुए चारों प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।