आगरा: एसपी सिंह बघेल के मामले में कोर्ट में अधिवक्ता ने की बहस, जाति प्रमाणपत्र पर उठाए सवाल
अधिवक्ता ने कहा कि प्रोफेसर बघेल ने आगरा के पत्ते से जाति प्रमाण पत्र बनवाया है, जो स्वत: ही निरस्त करने योग्य है। प्रमाणपत्र बनाने वालों ने नियमों का पालन नहीं किया है।
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आगरा के सांसद एवं केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और एससी-एसटी एक्ट के मामले में शुक्रवार को स्पेशल जज (एमएलए-एमपी) की कोर्ट में बहस हुई।
वादी अधिवक्ता सुरेश चंद सोनी ने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल गांव गट्टपुरा विकास खंड, औरैया के मूल निवासी हैं। इसलिए नियमानुसार उनका जाति प्रमाणपत्र निवास स्थान के पते के अनुसार बनना चाहिए था।
अधिवक्ता ने यह हवाला दिया
सुरेश चंद सोनी ने सुप्रीम कोर्ट और सरकार के आदेश का हवाला दिया। आदेश की प्रति भी कोर्ट के समक्ष रखी। यह भी कहा कि इसके बावजूद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने आगरा के पते से जाति प्रमाणपत्र बनवाया है, जो स्वत: ही निरस्त होने योग्य है।
प्रमाणपत्र बनवाने और बनाने वालों ने नियम का पालन नहीं किया। प्रमाणपत्र पर किसी भी अधिकारी की मुहर नहीं है। वैसे भी धनगर जाति अनुसूचित जाति में नहीं आती है।
अधिवक्ता ने अपने तर्कों के आधार को महत्वपूर्ण और आवश्यक बताते हुए प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में न्याय हित में दर्ज करने की अपील की। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद पत्रावली आदेश के लिए अपने पास रख ली है।