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'भगवान के दर्शन' को बेटों ने दान कर दीं मां की आंखें, भावुक कर देने वाली है वजह
आसिफ अली, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 07 Aug 2018 10:19 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बेटे के साथ भगवान के दर्शन करने मथुरा आई एक बुजुर्ग महिला की सड़क हादसे में मौत हो गई। बुजुर्ग महिला की अपने आराध्य के दर्शन की इच्छा अधूरी ही रह गई।
इस पर बेटे ने मां की इच्छा पूरी करने के लिए उनकी दोनों आंखें दान कर दीं। मृतका के बेटे ने बताया कि अब उसकी मां की आंखें तो भगवान का दर्शन कर सकेंगी।
हरियाणा के जनपद होडल के ग्राम भिडुकी निवासी 58 वर्षीय हरवेजी अपने बेटे सुखराम के साथ मथुरा में भगवान के दर्शन को आई थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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इस पर बेटे ने मां की इच्छा पूरी करने के लिए उनकी दोनों आंखें दान कर दीं। मृतका के बेटे ने बताया कि अब उसकी मां की आंखें तो भगवान का दर्शन कर सकेंगी।
हरियाणा के जनपद होडल के ग्राम भिडुकी निवासी 58 वर्षीय हरवेजी अपने बेटे सुखराम के साथ मथुरा में भगवान के दर्शन को आई थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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टेंपो की टक्कर से मौत
मां-बेटे छटीकरा मार्ग पर बस से उतरे और सड़क पार करने लगे। इसी दौरान टेंपो ने हरवेजी को टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बेटे ने परिजनों को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने हरवेजी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर श्राफ हास्पिटल के चिकित्सक डॉ. जगत सिंह ने मृतका के बेटे देवीराम व सुखराम से बात की।
डॉक्टर ने मृतका के बेटों से कहा कि उसकी मां की इच्छा भगवान के दर्शन करने की थी तो वो अब भी पूरी हो सकती है। वो मां की आंखें दान कर दें। दोनों बेटों को डॉक्टर की बात समझ में आ गई और उन्होंने मां का नेत्रदान कर दिया।
एक-दो दिन में लगाई जाएंगी आंखें
श्राफ हास्पिटल के चिकित्सक डॉ. जगत सिंह और प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जीएस श्रीवास्तव ने बताया कि हरवेजी की आंखों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है। जांच की औपचारिकता पूरी हो जाने के बाद एक-दो दिन में आंखों को नियमानुसार किसी जरूरतमंद को प्रत्यारोपित कर दिया जाएगा।
मौके पर पहुंची पुलिस ने हरवेजी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर श्राफ हास्पिटल के चिकित्सक डॉ. जगत सिंह ने मृतका के बेटे देवीराम व सुखराम से बात की।
डॉक्टर ने मृतका के बेटों से कहा कि उसकी मां की इच्छा भगवान के दर्शन करने की थी तो वो अब भी पूरी हो सकती है। वो मां की आंखें दान कर दें। दोनों बेटों को डॉक्टर की बात समझ में आ गई और उन्होंने मां का नेत्रदान कर दिया।
एक-दो दिन में लगाई जाएंगी आंखें
श्राफ हास्पिटल के चिकित्सक डॉ. जगत सिंह और प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जीएस श्रीवास्तव ने बताया कि हरवेजी की आंखों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है। जांच की औपचारिकता पूरी हो जाने के बाद एक-दो दिन में आंखों को नियमानुसार किसी जरूरतमंद को प्रत्यारोपित कर दिया जाएगा।