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UP: सांप के जहर नहीं, अंधविश्वास ने ली मासूम की जान...घरवालों ने कर दी इतनी देर, मासूम की हो गई मौत
Tue, 04 Nov 2025 11:17 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 11:17 AM IST
सार
आगरा में जिस मासूम को सांप ने काटा, उसकी समय रहते जान बचाई जा सकती थी। परिवार के लोग अंधविश्वास के चलते मासूम को बायगीर के पास ले गए, इलाज में देरी से उसकी मौत हो गई।
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सांप
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
आगरा के थाना जगनेर के गांव हंसराज में बालिका को सांप ने डस लिया। परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक करने वाले (बायगीर) के पास लेकर गए। झाड़फूंक करने के बाद भी जब बालिका की हालत में सुधार नहीं हुआ तो बायगीर ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद परिजन उसे एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने कहा कि अगर समय पर बालिका आ जाती और उसे एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन दिया जाता तो जान बच सकती थी।
हंसराज निवासी हेत सिंह ने बताया कि वह जूनागढ़ में मजदूरी करते हैं। परिवार गांव में ही रहता है। रविवार रात चारपाई पर बेटी तनु (12) और छोटा बेटा जतिन (10) सो रहे थे। पास में ही मां रेखा दूसरे बेटे नैतिक के साथ सोई थीं। रात करीब दो बजे बेटा-बेटी चीखने लगे। इस पर रेखा जाग गईं। तनु दर्द से कराहने लगी। रेखा के पूछने पर बोल न सकी। जतिन ने मां को बताया कि दीदी के पैर के ऊपर से सांप जाते देखा है। उसे सांप ने डस लिया है।
रेखा अन्य परिजन के साथ बालिका को बेहोशी की हालत में पास के गांव में रहने वाले बायगीर के पास ले गईं। उसने निशान के पास पैर को रस्सी से कसकर बांध दिया। काफी देर तक झाड़फूंक करता रहा, लेकिन कोई फायदा न होने पर उसे अस्पताल ले जाने को कहा। परिजन बालिका को एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी माैत हो चुकी थी।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि झाड़फूंक से सर्पदंश का मरीज ठीक नहीं होता है। सांप के विष के प्रभाव को कम करने के लिए एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे मरीज की जान बच सकती है। लोगों से अपील है कि सर्पदंश पर झाड़फूंक कराने के बजाय तत्काल नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर लेकर जाएं। इससे जान बचने की पूरी संभावना रहती है।
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हंसराज निवासी हेत सिंह ने बताया कि वह जूनागढ़ में मजदूरी करते हैं। परिवार गांव में ही रहता है। रविवार रात चारपाई पर बेटी तनु (12) और छोटा बेटा जतिन (10) सो रहे थे। पास में ही मां रेखा दूसरे बेटे नैतिक के साथ सोई थीं। रात करीब दो बजे बेटा-बेटी चीखने लगे। इस पर रेखा जाग गईं। तनु दर्द से कराहने लगी। रेखा के पूछने पर बोल न सकी। जतिन ने मां को बताया कि दीदी के पैर के ऊपर से सांप जाते देखा है। उसे सांप ने डस लिया है।
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रेखा अन्य परिजन के साथ बालिका को बेहोशी की हालत में पास के गांव में रहने वाले बायगीर के पास ले गईं। उसने निशान के पास पैर को रस्सी से कसकर बांध दिया। काफी देर तक झाड़फूंक करता रहा, लेकिन कोई फायदा न होने पर उसे अस्पताल ले जाने को कहा। परिजन बालिका को एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी माैत हो चुकी थी।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि झाड़फूंक से सर्पदंश का मरीज ठीक नहीं होता है। सांप के विष के प्रभाव को कम करने के लिए एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे मरीज की जान बच सकती है। लोगों से अपील है कि सर्पदंश पर झाड़फूंक कराने के बजाय तत्काल नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर लेकर जाएं। इससे जान बचने की पूरी संभावना रहती है।