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Agra News: ताज की धवलता पर कालिख पोत रहा धुआं
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ताजगंज श्मशान घाट पर लगे एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम बंद पड़ा। संवाद
आगरा। ताजमहल की धवलता पर मोक्षधाम से उठ रहा काला धुआं कालिख पोत रहा है। मोक्षधाम में शवदाह से निकलने वाले धुएं को साफ करने किए लगा बेड स्क्रबर प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहा है। बिना फिल्टर हुए काला धुआं सीधे ताज की संगमरमरी दीवारों से टकरा रहा है, जिससे ऐतिहासिक धरोहर के काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि यमुना में पिछली साल आई बाढ़ के दौरान यह प्लांट पूरी तरह डूब गया था। करोड़ों की लागत से लगा यह सिस्टम हफ्तों पानी में डूबा रहा। पानी उतरने के बाद मशीन के पैनल और मोटर में तकनीकी खराबी आ गई, जिसे पांच महीने बाद भी ठीक नहीं किया जा सका है। वर्तमान में श्मशान घाट पर होने वाले दाह संस्कार से निकलने वाले रसायन, कार्बन और सूक्ष्म कण बिना किसी रुकावट के सीधे वातावरण में घुल रहे हैं। मोक्षधाम से ताजमहल की दीवारें सटी हैं। ऐसे में धुआं ताजमहल को नुकसान पहुंचा रहा है।
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में कड़े बनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में वर्ष 2015 में आगरा विकास प्राधिकरण के सहयोग से करोड़ों रुपये खर्च का धुआं साफ करने का आधुनिक सिस्टम लगाया गया था।
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पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया प्लांट का मकसद शवदाह के धुएं से निकलने वाले हानिकारक तत्वों को छानकर स्वच्छ हवा बाहर निकालना था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मशीन बंद होने से अब पारंपरिक तरीके से हो रहे अंतिम संस्कार का धुआं सीधे ताज की चमक को फीका कर रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद बंगारी का कहना है एडीए से जवाब मांगा जाएगा। टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। खराब प्लांट को चालू कराया जाएगा।
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प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि यमुना में पिछली साल आई बाढ़ के दौरान यह प्लांट पूरी तरह डूब गया था। करोड़ों की लागत से लगा यह सिस्टम हफ्तों पानी में डूबा रहा। पानी उतरने के बाद मशीन के पैनल और मोटर में तकनीकी खराबी आ गई, जिसे पांच महीने बाद भी ठीक नहीं किया जा सका है। वर्तमान में श्मशान घाट पर होने वाले दाह संस्कार से निकलने वाले रसायन, कार्बन और सूक्ष्म कण बिना किसी रुकावट के सीधे वातावरण में घुल रहे हैं। मोक्षधाम से ताजमहल की दीवारें सटी हैं। ऐसे में धुआं ताजमहल को नुकसान पहुंचा रहा है।
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ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में कड़े बनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में वर्ष 2015 में आगरा विकास प्राधिकरण के सहयोग से करोड़ों रुपये खर्च का धुआं साफ करने का आधुनिक सिस्टम लगाया गया था।
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पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया प्लांट का मकसद शवदाह के धुएं से निकलने वाले हानिकारक तत्वों को छानकर स्वच्छ हवा बाहर निकालना था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मशीन बंद होने से अब पारंपरिक तरीके से हो रहे अंतिम संस्कार का धुआं सीधे ताज की चमक को फीका कर रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद बंगारी का कहना है एडीए से जवाब मांगा जाएगा। टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। खराब प्लांट को चालू कराया जाएगा।