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Agra: 27 लाख खर्च करने पर भी नाले का पानी नहीं हुआ फिल्टर, प्रोजेक्ट बंद; एएमयू से वापस मांगे 63 लाख
Sun, 21 Sep 2025 04:31 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 21 Sep 2025 04:31 PM IST
सार
आगरा में यमुना में जा रहे नाले के पानी को फिल्टर करने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। प्रोजेक्ट के 90 लाख रुपये में से 27 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। अब इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया है।
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यमुना में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने के लिए था प्रोजेक्ट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा में स्मार्ट सिटी क्षेत्र के तौर पर ताजमहल के आसपास के क्षेत्र को चुना गया था। इसी क्षेत्र में ताज के पूर्वी गेट से होकर सीधे यमुना में गिरने वाले नाले के पानी को फिल्टर करने के लिए बायोरेमेडिएशन व वेटलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तैयार किया गया। 90 लाख रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लागू करने का जिम्मा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एएमयू को दिया गया। प्रोजेक्ट शुरू हुआ, लेकिन इसका लाभ होने की बजाय लोगों की परेशानी बढ़ गईं।
बारिश के दौरान घरों में ही नाले का गंदा पानी घुसने लगा। यही नहीं, पानी का फ्लो ज्यादा होने की वजह से वेटलैंड एरिया में पौधे भी नहीं टिक पा रहे थे। इस समस्या से जूझते हुए प्रोजेक्ट के 90 लाख रुपये में से 27 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। इसी साल फरवरी महीने में ताजगंज क्षेत्र के पार्षद ने लोगों के घरों में पानी भरने की समस्या के चलते प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए।
स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने इसपर एएमयू के डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के साथ मंथन शुरू किया। चर्चा के बाद अब प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला लिया गया है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में इस फैसले पर मुहर भी लग गई है। इस फैसले के साथ ही स्मार्ट सिटी ने एएमयू प्रशासन से बकाया 63 लाख रुपये लौटाने के लिए संपर्क साधा है।
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बारिश के दौरान घरों में ही नाले का गंदा पानी घुसने लगा। यही नहीं, पानी का फ्लो ज्यादा होने की वजह से वेटलैंड एरिया में पौधे भी नहीं टिक पा रहे थे। इस समस्या से जूझते हुए प्रोजेक्ट के 90 लाख रुपये में से 27 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। इसी साल फरवरी महीने में ताजगंज क्षेत्र के पार्षद ने लोगों के घरों में पानी भरने की समस्या के चलते प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए।
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स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने इसपर एएमयू के डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के साथ मंथन शुरू किया। चर्चा के बाद अब प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला लिया गया है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में इस फैसले पर मुहर भी लग गई है। इस फैसले के साथ ही स्मार्ट सिटी ने एएमयू प्रशासन से बकाया 63 लाख रुपये लौटाने के लिए संपर्क साधा है।
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