शौक को बनाया जुनून तो बदल गया जीवन: अदिति ने मुख्यमंत्री का बनाया पोट्रेट तो पल ने कथक नृत्य का रिकॉर्ड
फाइन आर्ट्स की छात्रा अदिति ने अब रंगों और कूची से पेंटिंग में इतने पुरस्कार जीते कि लंबी फेहरिस्त बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोट्रेट बनाकर दिया तो मुख्यमंत्री भी सराहना करने से नहीं चूके।
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बचपन में शौक था आड़ी तिरछी रेखाओं को खींचकर उनमें रंग भरने का। यही शौक उम्र बढ़ने के साथ हुनर में बदल गया। इससे उनका जीवन बदल गया। फाइन आर्ट्स की छात्रा अदिति ने अब रंगों और कूची से पेंटिंग में इतने पुरस्कार जीते कि लंबी फेहरिस्त बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोट्रेट बनाकर दिया तो मुख्यमंत्री भी सराहना करने से नहीं चूके। उनकी तरह पल गुप्ता ने बचपन के नृत्य के शौक को आगे बढ़ाया और अब कथक नृत्य में दो हजार चक्कर लगाने का रिकॉर्ड कायम कर दिया।
अदिति ने पेंटिंग साथ रंगोली, निबंध लेखन में भी जीते पुरस्कार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में पढ़ने वाली बीएफए चतुर्थ वर्ष की छात्रा अदिति पेंटिंग में अपनी अलग पहचान बना रही है। पेंटिंग के साथ प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, रंगोली प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विश्वविद्यालय में आने पर अदिति ने उनका पोट्रेट बनाकर भेंट किया था। इसे मुख्यमंत्री ने सराहा था। अदिति वर्ष 2017 आईजीडी बांबे से डिप्लोमा प्राप्त किया। विश्वविद्यालय में हुए सृजन मूर्तिकला कार्यशाला 2017 व 2019 में हिस्सा लिया। इसी वर्ष एबीवीपी की रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2020 में संभावना कला मंच की ओर से ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता में कांस्य पदक प्राप्त किया।
पल गुप्ता गुप्ता ने ताजनगरी का नाम किया रोशन
दस साल की बच्ची ने सन 2016 में लगातार डेढ़ घंटे तक कथक कर गोल्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया, तो देश में ताजनगरी एक बार फिर सुर्खियों में आईं। कमला नगर की रहने वाली पल गुप्ता को शुरू से ही नृत्य करने का शौक रहा। उनकी मां पूजा गुप्ता भी एक नृत्यांगना हैं। सन 2011 में भी कथक नृत्यांगना पल ने कथक नृत्य में 11 साल की उम्र में लगातार दो हजार चक्कर लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया।
उनका यह कारनामा भी गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। पल कहती हैं कि नृत्य उनका जुनून है। सेंट पेट्रिक्स में कक्षा दसवी की छात्रा पल के पिता केतुल कुमार गुप्ता भी पल के इस जुनून को आगे बढ़ाने में उसका साथ देते हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही पल टीवी और मोबाइल पर कथक के अलावा कुछ नहीं देखती थी।
चित्रकारी से लगभग 30अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते
दयालबाग की रहने वाली 17 साल की अलीशा ने अपनी चित्रकारी से लगभग 30अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। जल संसाधन मंत्रालय, दिल्ली में उनकी ओर से तैयार की गई जल संचयन की पेंटिंग सन 2016 से मंत्रालय की शोभा बढ़ा रही है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ सूचना केंद्र की ओर से सन 2017 में हुई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे पेंटिंग प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। सन 2018 से वैंकटप्पा आर्ट गैलरी, बंगलूरू में राष्ट्रीय पर्यावरण प्रतियोगिता में बनाई गई अलीशा की पेंटिंग दीर्घा में लगी हुई है। अलीशा का कहना है कि चित्रकारी उनका जुनून है। आर्किटेक्ट डॉ. अनिरुद्ध राघव का कहना है हर समय आलीशा के दिमाग में पेंटिंग को लेकर नई-नई थीम चलती रहती हैं।
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