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ठंडी नहीं हुई थी पत्नी व दो बच्चों की चिताएं, मासूम बेटे ने भी तोड़ दिया दम

Mon, 20 Aug 2018 12:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला फिरोजाबाद Updated Mon, 20 Aug 2018 12:55 PM IST
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six year old son death due to negligence of doctors
तीन बच्चों के साथ मां ने लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद के रामनगर में आग लगाकर आत्महत्या करने वाली महिला व उसके दो बच्चों के शवों का अंतिम संस्कार कर परिजन घर लौटे भी न थे कि गंभीर रूप से झुलसे तीसरे बालक की भी मौत हो गई। एक परिवार में चार मौतों से मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। परिजनों ने बच्चे के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
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थाना लाइनपार में रामनगर अस्पताल वाली गली निवासी पवन ओझा उर्फ बंटी की पत्नी अनीता ने आर्थिक तंगी के चलते दो बेटा और एक बेटी के साथ कमरा में बंद होकर केरोसिन डालकर शनिवार को आग लगा ली थी। अनीता, बेटी रागिनी व बेटा साहिल की मौके पर ही मौत हो गई थी। 
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गंभीर रूप से झुलसे अंशुल (6) को जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया था। रविवार सुबह महिला व दो बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए थे। घटना के बाद से थाने में बैठा रखे अनीता के पति पवन को पुलिस ने छोड़ दिया। परिजन तीनों शवों को घर ले गए। 
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अंशुल की मौत से हर कोई हैरान

six year old son death due to negligence of doctors
woman burnt alive - फोटो : अमर उजाला
एक साथ तीन शवों को देखकर कोहराम मच गया। मोहल्ले के महिला-पुरुष शवों को देख बिलख पड़े। इसके बाद महिला की स्वर्गाश्रम में अंत्येष्टि की और रागिनी व साहिल के शव दफना दिए। परिजन शवों का अंतिम संस्कार करके घर ही लौटे थे, तभी बर्न वार्ड में भर्ती अंशुल की मौत की खबर मिली। 

परिजन अस्पताल पहुंच गए। उनका आरोप था कि अस्पताल के चिकित्सकों ने बालक का ठीक से उपचार नहीं किया। यदि उसकी उचित देखभाल होती तो शायद जान नहीं जाती। सूचना पर नगर विधायक मनीष असीजा, भगवान सिंह झा, सुनील शर्मा, रमाकांत, चंद्रभान राठौर आदि पहुंच गए।

आग से झुलसे पवन के बड़े बेटे अंशुल की मौत से हर कोई स्तब्ध है। अंशुल के दोनों हाथ जले थे। वो आसानी से बात भी कर रहा था। शनिवार शाम जब अंशुल से बात की गई, तो उसने पूरे घटनाक्रम बयां किया था। मम्मी-पापा के विवाद और मां द्वारा उठाए गए कदम की जानकारी दी। 

विधायक की हिदायत दरकिनार

विधायक मनीष असीजा ने झुलसे बालक का बेहतर उपचार का निर्देश प्रभारी सीएमएस डॉ. आलोक को दिया था, लेकिन लचर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने 24 घंटे के भीतर ही बालक की जान ले ली। उसके उपचार में घोर लापरवाही बरती गई। विधायक ने बच्चे का हाल जानने को शाम को सीएमएस को फोन किया था। सीएमएस को बच्चे की मौत की जानकारी तक नहीं थी, जबकि उसकी मौत काफी पहले हो गई थी। 

विधायक असीजा ने कहा कि शनिवार को वह चिकित्सकों को सख्त हिदायद देकर आए थे, लेकिन तब डाक्टरों ने बच्चे की स्थिति खतरे से बाहर बताई थी। रविवार को जिला अस्पताल पहुंचे विधायक मनीष असीजा ने डाक्टरों को जमकर खरीखोटी सुनाई। उन्होंने एसडीएम को भी जिला अस्पताल बुला लिया। विधायक ने डाक्टरों से पूछा बच्चे की स्थिति देखने कितनी बार वार्ड में गए।
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