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Agra News: अवैध हिरासत मामले में दरोगा सहित छह पुलिसकर्मी दोषी
Sat, 15 Nov 2025 11:22 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 15 Nov 2025 11:22 PM IST
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फोटो 5 राजकिशोर उर्फ बबलू दुबे
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मैनपुरी। थाना किशनी के नगला करनाई ढकरोई के राजकिशोर उर्फ बबलू दुबे को 28 साल पहले अवैध रूप से थाने में हिरासत में रखने के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष विजय सिंह सहित छह पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। उनको तीन महीने की परिवीक्षा अवधि पर छोड़ा है। सीजेएम विमलेश सरोज ने उन पर 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित को दो महीने के अंदर देने का आदेश दिया है।
वर्ष 1997 में आठ जुलाई को तत्कालीन थानाध्यक्ष किशनी विजय सिंह, दरोगा रामअवध सिंह, सिपाही सुशील कुमार, देवेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार गौतम, दुर्गेश कुमार की टीम ने एक चोरी की रिपीटर (स्वचालित असलाह) रखने के आरोप में गांव से राजकिशोर उर्फ बबलू को पकड़ने का दावा किया। इस के बाद उसके भाई बादशाह दुबे को भी जेल भेज दिया था। इस मामले की शिकायत पीडि़तों ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से की थी। पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 जनवरी 2003 को सीबीसीआईडी जांच कराने के आदेश दिए। सीबीसीआईडी आगरा यूनिट की जांच में सभी पुलिसकर्मियों को बबलू दुबे और बादशाह दुबे को अवैध रूप से हिरासत में रखने, लोकसेवक रहते हुए गलत रिकार्ड तैयार करने, झूठी गवाही देने, अपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया था। चार्जशीट के बाद बबलू को न्याय पाने के लिए 2025 तक इंतजार करना पड़ा। इस बीच बादशाह दुबे की माैत हाे गई। मुकदमे की सुनवाई में गवाही पूरी होने के बाद सीजेएम विमलेश सरोज ने सभी को दोषी पाया है। उनको तीन महीने की परिवीक्षा अवधि पर छोड़कर सीजेएम विमलेश सरोज ने 12 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। बसपा सरकार में राजनैतिक कारणों से पुलिस ने झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा था। सीबीसीआईडी जांच के बाद कुछ न्याय मिला।
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वर्ष 1997 में आठ जुलाई को तत्कालीन थानाध्यक्ष किशनी विजय सिंह, दरोगा रामअवध सिंह, सिपाही सुशील कुमार, देवेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार गौतम, दुर्गेश कुमार की टीम ने एक चोरी की रिपीटर (स्वचालित असलाह) रखने के आरोप में गांव से राजकिशोर उर्फ बबलू को पकड़ने का दावा किया। इस के बाद उसके भाई बादशाह दुबे को भी जेल भेज दिया था। इस मामले की शिकायत पीडि़तों ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से की थी। पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 जनवरी 2003 को सीबीसीआईडी जांच कराने के आदेश दिए। सीबीसीआईडी आगरा यूनिट की जांच में सभी पुलिसकर्मियों को बबलू दुबे और बादशाह दुबे को अवैध रूप से हिरासत में रखने, लोकसेवक रहते हुए गलत रिकार्ड तैयार करने, झूठी गवाही देने, अपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया था। चार्जशीट के बाद बबलू को न्याय पाने के लिए 2025 तक इंतजार करना पड़ा। इस बीच बादशाह दुबे की माैत हाे गई। मुकदमे की सुनवाई में गवाही पूरी होने के बाद सीजेएम विमलेश सरोज ने सभी को दोषी पाया है। उनको तीन महीने की परिवीक्षा अवधि पर छोड़कर सीजेएम विमलेश सरोज ने 12 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। बसपा सरकार में राजनैतिक कारणों से पुलिस ने झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा था। सीबीसीआईडी जांच के बाद कुछ न्याय मिला।

फोटो 5 राजकिशोर उर्फ बबलू दुबे
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