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Agra: मारपीट और धमकी देने के मामले में फंसे आगरा के सीएमओ, 6 कर्मचारियों पर भी कोर्ट में वाद हुआ दायर
Sat, 28 Sep 2024 09:57 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 28 Sep 2024 09:57 AM IST
सार
आगरा के सीएमओ सहित 6 कर्मचारी मारपीट और धमकी देने के मामले में फंस गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने सीएमओ सहित 6 अन्य डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ वाद प्रस्तुत किया।
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सीएमओ, आगरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में मारपीट, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने सीएमओ सहित 6 अन्य डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ वाद प्रस्तुत किया। अदालत ने बयान दर्ज करने के लिए 10 अक्तूबर 2024 की तारीख तय कर दी। अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता धीरज ने कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया। इसमें आरोप लगाया कि बीते 27 अगस्त 2024 को शाम 5.30 बजे के करीब वह अपने साथी योगेंद्र कुमार के साथ अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आगरा मंडल कार्यालय में मेडिकल बोर्ड गठित होने की सूचना प्राप्त करने पहुंचे थे।
वहां मौजूद लिपिक सुशील पांडे ने बताया कि एडी निरीक्षण करने के लिए मथुरा गए हैं। अधिवक्ता राजेंद्र ने बताया कि उनकी पुत्री गर्विता राज के मेडिकल कराने की बारी आने में 2 माह का समय लग गया। मेडिकल बोर्ड गठित होने की सूचना उन्हें नहीं दी गई। इसके चलते उनकी पुत्री की नौकरी की फाइल पुलिस कार्यालय में रुकी पड़ी है। इस पर सीएमओ का बाबू मनीष निगम कहने लगा कि सीएमओ साहब ने 13 अगस्त 2024 को मेडिकल बोर्ड गठित कर अभ्यर्थियों को जांच के लिए बुलाया था। गर्विता नहीं आई तो मेडिकल नहीं हो सका। कर्मचारियों से बात हो ही रही थी कि अपर निदेशक की गाड़ी कार्यालय पहुंची, वो कार से उतर कर अंदर चले गए। समस्या से अवगत कराने लिए उनसे मुलाकात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वो मिलने से मना कर दिए।
जब वो घर लौटने लगे तो पीछे से आए सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ. नंदन सिंह, भाग्यश्री और बाबू मनीष निगम ने उन्हें रोक लिया, और गालियां देने लगे। विरोध पर मारपीट कर जान से मारने की धमकी दिए।
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वहां मौजूद लिपिक सुशील पांडे ने बताया कि एडी निरीक्षण करने के लिए मथुरा गए हैं। अधिवक्ता राजेंद्र ने बताया कि उनकी पुत्री गर्विता राज के मेडिकल कराने की बारी आने में 2 माह का समय लग गया। मेडिकल बोर्ड गठित होने की सूचना उन्हें नहीं दी गई। इसके चलते उनकी पुत्री की नौकरी की फाइल पुलिस कार्यालय में रुकी पड़ी है। इस पर सीएमओ का बाबू मनीष निगम कहने लगा कि सीएमओ साहब ने 13 अगस्त 2024 को मेडिकल बोर्ड गठित कर अभ्यर्थियों को जांच के लिए बुलाया था। गर्विता नहीं आई तो मेडिकल नहीं हो सका। कर्मचारियों से बात हो ही रही थी कि अपर निदेशक की गाड़ी कार्यालय पहुंची, वो कार से उतर कर अंदर चले गए। समस्या से अवगत कराने लिए उनसे मुलाकात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वो मिलने से मना कर दिए।
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जब वो घर लौटने लगे तो पीछे से आए सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ. नंदन सिंह, भाग्यश्री और बाबू मनीष निगम ने उन्हें रोक लिया, और गालियां देने लगे। विरोध पर मारपीट कर जान से मारने की धमकी दिए।
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