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आगरा: ठीक होने के बाद तीन बार कराई जांच, हर बार कोरोना पॉजिटिव, ऐसे छह मामले मिले

Mon, 15 Feb 2021 01:32 PM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 15 Feb 2021 01:32 PM IST
सार

  • आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में ऐसे छह केस आ चुके हैं। इनके शरीर में कोरोना वायरस मर चुका है, लेकिन जांच रिपोर्ट में आ रहा है

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Agra Six Corona Cases: six cases of coronavirus reinfection reported in agra
आगरा: कोरोना वायरस (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) में ऐसे छह मामले आ चुके हैं, जिनमें कोरोना संक्रमित लोगों के शरीर में वायरस के मर जाने के बाद भी उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। तीन बार ऐसा हो चुका है। इनके शरीर में एंटीबॉडी बन चुकी हैं। कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण भी इनमें नहीं है। इनकी साइकल थ्रेशोल्ड वैल्यू (सीटी वैल्यू) नामक जांच कराई गई तो पता चला कि इनके शरीर में मृत वायरस मौजूद है। ऐसे मामले सामने आने से चिकित्सक भी हैरान हैं। 

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एसएन मेडिकल कॉलेज में कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि ठीक हो चुके इन लोगों की जब दो बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इसे री-इन्फेक्शन का मामला समझा, लेकिन तीन बार ऐसा ही हुआ तो शरीर में मृत वायरस की आशंका हुई। इसके लिए सीटी वैल्यू की जांच कराई, जिसमें वायरस का लोड 28 से 32 मिला। इन लोगों में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज भी मिलीं। इससे साबित हुआ कि इनके शरीर में मृत वायरस है, जिसके कारण रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।
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चार महीने तक रहता है मृत वायरस का असर
डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कई जगह हुए अध्ययन में ऐसा पाया गया है कि कुछ लोगों में मृत वायरस शरीर में तीन से चार महीने तक रहता है। इस दौरान कोरोना की जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव ही आएगी। इसके बाद रिपोर्ट निगेटिव रहेगी।

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सीटी वैल्यू 28-30 तो शरीर में मृत वायरस
एसएन के माइक्रोबायलॉजिस्ट डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि वायरस के लोड की पता करने के लिए सीटी वैल्यू करते हैं। किसी की सीटी वैल्यू 28 से 30 है और जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव ही आ रही है तो इसका मतलब है कि शरीर में मृत वायरस है।

सीटी वैल्यू 24 से अधिक होने पर संक्रमण का खतरा नहीं: डॉ. आशीष गौतम
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि सीट वैल्यू 10 से कम है तो वायरस का लोड ज्यादा है। वैल्यू 24 से अधिक है तो उससे संक्रमण फैलने नहीं फैलता है। किसी तरह की परेशानी भी नहीं होती है।

नौकरी, साक्षात्कार, यात्रा के लिए हो रही है दिक्कत
यात्रा, कॉलेज-नौकरी ज्वाइन करने, यात्रा करने के लिए कोरोना वायरस की निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। इन छह लोगों की जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो ये संबंधित कार्य नहीं कर पा रहे हैं।

केस- 1
शरीर में मृत वायरस, जांच में पॉजिटिव

धनौली निवासी 47 साल के किडनी मरीज संक्रमित होने के बाद निगेटिव रिपोर्ट आने पर घर भेज दिए गए। डायलिसिस के लिए दोबारा आने पर फिर जांच की तो कोरोना पॉजिटिव मिले। तीसरी डायलिसिस पर भी यही हाल रहा। चिकित्सकों की जांच में शरीर में एंटीबॉडी मिलीं। सीटी वैल्यू 28 से 30 मिली। इससे उनके शरीर में मृत वायरस की जानकारी हुई।

केस- 2
ठीक हो गईं लेकिन रिपोर्ट में संक्रमित
फरीदाबाद निवासी 23 साल की छात्रा एसएन में पढ़ाई कर रही हैं। छुट्टी लेकर घर गईं, वहां पर संक्रमित हो गईं। इलाज के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई। कॉलेज में कक्षा में आने से पहले दोबारा कोरोना की जांच की तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कुछ समय बाद जांच कराई फिर पॉजिटिव निकलीं। लगातार तीन बार ऐसा हुआ। जांच की तो उसमें एंटीबॉडी मिली। सीटी वैल्यू कराने पर शरीर में मृत वायरस मिला।
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