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UP: बहन का कर दिया है कत्ल...लिखाई थी झूठी रिपोर्ट; कोर्ट ने वादी के खिलाफ दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश
Mon, 22 Apr 2024 04:49 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 22 Apr 2024 04:49 PM IST
सार
बहन की दहेज के लिए हत्या करने की उसके ससुराल वालों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखाना युवक को महंगा पड़ गया। कोर्ट ने वादी के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कासगंज में बहन के ससुराली जनों के खिलाफ दहेज हत्या की झूठी प्राथमिकी दर्ज कराना भाई को महंगा पड़ गया। अपर जिला सत्र न्यायाधीश न्यायालय ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए वादी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है।
पटियाली थाना क्षेत्र के ग्राम सुंनरपुरा निवासी संजीव सिंह ने 17 जुलाई 2022 को थाना पटियाली में प्राथमिक की दर्ज कराई थी कि दहेज की मांग पूरी न होने पर 15 जुलाई 2022 को उसकी बहन निशा की ससुरालीजन ने जहर देकर हत्या कर दी।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिक की दर्ज कर विवेचना करते हुए मृतका के पति जगमोहन, ससुर संतोष सिंह तथा सास रत्नेश के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 498, 304 बी, 328 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय में साक्ष्य के दौरान वादी संजीव सिंह पुलिस को पूर्व में दिए गए बयान से मुकर गया। इतना ही नहीं उसने पुलिस को दी गई तहरीर से भी इनकार करते हुए कहा कि ससुरालीजन ने उसकी बहन की हत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी बहन ने संतान न होने से परेशान होकर आत्महत्या की थी।
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गांव वालों ने कोरे कागज पर उसके हस्ताक्षर कर लिए थे। उस पर क्या लिखा उसे जानकारी नहीं है। प्रकरण में दोनों पक्षों की बहस सुनने के उपरांत पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोष मुक्त करते हुए वादी संजीव सिंह के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत प्रथक से मुकदमा दर्ज करने के आदेश सत्र लिपि को दिए हैं।
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पटियाली थाना क्षेत्र के ग्राम सुंनरपुरा निवासी संजीव सिंह ने 17 जुलाई 2022 को थाना पटियाली में प्राथमिक की दर्ज कराई थी कि दहेज की मांग पूरी न होने पर 15 जुलाई 2022 को उसकी बहन निशा की ससुरालीजन ने जहर देकर हत्या कर दी।
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तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिक की दर्ज कर विवेचना करते हुए मृतका के पति जगमोहन, ससुर संतोष सिंह तथा सास रत्नेश के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 498, 304 बी, 328 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय में साक्ष्य के दौरान वादी संजीव सिंह पुलिस को पूर्व में दिए गए बयान से मुकर गया। इतना ही नहीं उसने पुलिस को दी गई तहरीर से भी इनकार करते हुए कहा कि ससुरालीजन ने उसकी बहन की हत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी बहन ने संतान न होने से परेशान होकर आत्महत्या की थी।
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गांव वालों ने कोरे कागज पर उसके हस्ताक्षर कर लिए थे। उस पर क्या लिखा उसे जानकारी नहीं है। प्रकरण में दोनों पक्षों की बहस सुनने के उपरांत पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोष मुक्त करते हुए वादी संजीव सिंह के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत प्रथक से मुकदमा दर्ज करने के आदेश सत्र लिपि को दिए हैं।