Shri Krishna Janmabhoomi: मथुरा में शाही ईदगाह को हटाने की मांग वाली याचिका मंजूर, शुरू होगा मुकदमे का ट्रायल
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा की जिला अदालत ने श्रीकृष्ण विराजमान की रिवीजन याचिका स्वीकार कर ली है। जिला जज अब किस कोर्ट को सुनवाई के लिए यह प्रकरण देंगे, अभी फैसला नहीं लिया गया है। 26 मई को अगली सुनवाई होगी।
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह विवाद के मामले में 13.37 एकड़ जमीन पर सबसे पहले दावा पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के वाद को जिला जज राजीव भारती की अदालत ने बृहस्पतिवार को सुनवाई योग्य मानते हुए दर्ज कर लिया। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने श्रीकृष्ण विराजमान की भक्त बनकर वाद पेश किया है। इस केस में अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने 25 सितंबर 2020 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा पेश किया था, जिसमें उन्होंने वर्ष 1967 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान तथा शाही ईदगाह के बीच हुए समझौते को गलत बताकर इसे रद्द करने की मांग की। दावे में उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि मंदिर को तोड़ा गया और औरंगजेब ने इस स्थान पर ईदगाह बनवाई। विगत करीब दो वर्ष की लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद उनके वाद को अदालत ने दर्ज करने संबंधी निर्णय दिया। रंजना ने कहा कि यह भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की जीत है।
20 माह में मिलीं 36 तारीखें
अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के वाद को अदालत ने 20 माह में 36 तारीखों की लंबी सुनवाई के बाद दर्ज होने योग्य माना है। 25 सितंबर 2020 को वाद खारिज कर दिया गया था। 12 अक्तूबर 2020 को जिला जज की अदालत में अपील की गई। जिला जज ने 18 जनवरी 2021 में अपील को रिवीजन में सुनवाई का निर्णय लिया। जनवरी से लेकर अब तक केस की सुनवाई के लिए 36 तारीख पड़ीं। इस दौरान वक्फ बोर्ड शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी द्वारा अदालत में वाद दर्ज न होने देने के लिए तमाम प्रयास किए गए।
हमारे ठाकुर जी टेढे़ हैं : रंजना
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना ने कहा कि ठाकुरजी को मैं भाई मानती हूं। हमारे ठाकुरजी टेढ़ी टांग वाले हैं। उन्होंने हमारी परीक्षा ली है। अब जीत लगभग तय है।