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श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण कर रहे ऑनलाइन भोजन
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वृंदावन (मथुरा)। कोरोना संक्रमण के दौरान श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण ऑनलाइन भोजन कर रहे हैं। कोई भी व्यक्ति घर बैठे ब्राह्मणों को भोज करा सकता है। पितृपक्ष में लोगों को श्राद्ध के लिए ब्राह्मण नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि कोरोना की डर की वजह से ब्राह्मण भी यजमान के यहां जाने से कतरा रहे हैं। इसे देखते हुए श्रीराधाकांत मंदिर कमेटी ने अनोखी पहल की है।
मंदिर कमेटी ने ऑनलाइन ब्राह्मण भोज कराने की व्यवस्था की है। भारत में कहीं भी किसी भी वर्ग के लोगों को अपने पितरों के श्राद्ध के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। आचार्य मृदुल शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध के लिए ब्राह्मणों की नि:शुल्क व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपना पूर्ण विवरण निर्धारित फार्म पर ऑनलाइन देना होगा। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन मंदिर में कराया जाएगा। मंदिर में ही ब्राह्मण श्राद्ध से संबंधित व्यक्ति के नाम का संकल्प आदि भी लेगा। इसका ऑनलाइन प्रसारण भी होगा। श्राद्ध कराने वाला व्यक्ति इसका प्रसारण देखकर इसमें शामिल हो सकेगा।
आधुनिक युग में श्राद्ध कर्म से विहीन हो रहे हैं लोग: वागीश महाराज
श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म जो अपने पितरों (पूर्वजों) के निमित्त किया जाता है उसी का नाम श्राद्ध है। आचार्य पीठ के अध्यक्ष वैष्णवाचार्य मारुति नंदन वागीश महाराज ने बताया वर्तमान आधुनिक युग में लोग श्राद्ध कर्म से विहीन होते जा रहे हैं। इसे उचित नहीं कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य मात्र के ऊपर तीन ऋण हैं। देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। श्राद्ध कर्म द्वारा पितृ ऋण उतारा जाता है। ऐसा करने से पितृ गण प्रसन्न होते हैं। वागीश जी महाराज ने कहा भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति में श्राद्ध कर्म की विशेष महिमा है जिस वंश कुल परंपरा में हमारा जन्म हुआ। यह शरीर मिला हम सभी का कर्तव्य है कि आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृपक्ष में अपने कर्मों श्रद्धा एवं समर्पण द्वारा श्राद्ध कर्म कर अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करें। इस पितृपक्ष में वर्जित कार्य भी नहीं करने चाहिए।
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मंदिर कमेटी ने ऑनलाइन ब्राह्मण भोज कराने की व्यवस्था की है। भारत में कहीं भी किसी भी वर्ग के लोगों को अपने पितरों के श्राद्ध के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। आचार्य मृदुल शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध के लिए ब्राह्मणों की नि:शुल्क व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपना पूर्ण विवरण निर्धारित फार्म पर ऑनलाइन देना होगा। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन मंदिर में कराया जाएगा। मंदिर में ही ब्राह्मण श्राद्ध से संबंधित व्यक्ति के नाम का संकल्प आदि भी लेगा। इसका ऑनलाइन प्रसारण भी होगा। श्राद्ध कराने वाला व्यक्ति इसका प्रसारण देखकर इसमें शामिल हो सकेगा।
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आधुनिक युग में श्राद्ध कर्म से विहीन हो रहे हैं लोग: वागीश महाराज
श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म जो अपने पितरों (पूर्वजों) के निमित्त किया जाता है उसी का नाम श्राद्ध है। आचार्य पीठ के अध्यक्ष वैष्णवाचार्य मारुति नंदन वागीश महाराज ने बताया वर्तमान आधुनिक युग में लोग श्राद्ध कर्म से विहीन होते जा रहे हैं। इसे उचित नहीं कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य मात्र के ऊपर तीन ऋण हैं। देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। श्राद्ध कर्म द्वारा पितृ ऋण उतारा जाता है। ऐसा करने से पितृ गण प्रसन्न होते हैं। वागीश जी महाराज ने कहा भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति में श्राद्ध कर्म की विशेष महिमा है जिस वंश कुल परंपरा में हमारा जन्म हुआ। यह शरीर मिला हम सभी का कर्तव्य है कि आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृपक्ष में अपने कर्मों श्रद्धा एवं समर्पण द्वारा श्राद्ध कर्म कर अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करें। इस पितृपक्ष में वर्जित कार्य भी नहीं करने चाहिए।
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