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कलेक्ट्रेट में दिखा सत्ता का रसूख, घूमते रहे सपाई

Fri, 08 Jan 2016 01:47 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 08 Jan 2016 01:47 AM IST
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Showing the influence of power in Collectorate
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में प्रतिबंध के बावजूद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट में घूमते रहे और भाजपा के कार्यकर्ताओं को दाखिल नहीं होने दिया। सांसद बाबूलाल के पुत्र रामेश्वर सिंह की पुलिस अधिकारियों के साथ झड़प भी हुई।
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सुबह 11.30 बजे सांसद बाबूलाल के पुत्र रामेश्वर सिंह कलेक्ट्रेट पहुंच गए। वे कुछ दूर ही गए थे कि किसी ने एसपी सिटी को बता दिया कि रामेश्वर अंदर घूम रहे हैं। इस पर एसपी सिटी ने रोक दिया, बाहर जाने को कहा। रामेश्वर सिंह ने विरोध किया। उनका कहना था कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव तो मतदान कक्ष के अंदर तक दाखिल हो गए हैं। एसपी सिटी ने कहा, पप्पू यादव मतदाता के सहयोगी हैं, वोट दिलवाने गए हैं। पुलिसकर्मी भी पहुंच गए और रामेश्वर को जबरन बाहर कर दिया। करीब दो बजे के बाद तक बड़ी संख्या में सपाई कलेक्ट्रेट में थे। एक बार तो सपा के उत्साहित कार्यकर्ताओं का एक जत्था मिठाई लेकर अंदर घुसने लगा। कुछ सिपाहियों ने रोकने की कोशिश की तो कार्यकर्ता उनसे भिड़ गए। बाद में अधिकारियों ने लट्ठ फटकार कर खदेड़ा।
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परेशान फरियादी, नहीं हुए कोई काम
चुनाव के चलते कलेक्ट्रेट में सरकार कामकाज नहीं हुआ। वकील भी कम पहुंचे। कुछ लोगों की इस बात की नाराजगी भी थी। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया जिला पंचायत कार्यालय में भी हो सकती थी।
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हार भाजपा की या बाबूलाल की!
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में राजनीति के दांवपेंच फेल हो जाने के बाद सांसद चौधरी बाबूलाल के लिए अब अपनी ही पार्टी की अंदरूनी राजनीति’ चुनौती होगी। क्योंकि विरोधी खेमे ने चुनाव परिणाम आने के साथ ही उनके घेराबंदी के लिए मोर्चा खोल दिया है।
बता दें कि भाजपा में सांसद चौधरी बाबूलाल के विरोधियों की संख्या ठीकठाक है। इस खेमे के नेताओं ने जिला पंचायत चुनाव के लिए पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के चयन पर भी सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि सांसद ने सामाजिक, जातिगत समीकरण को दरकिनार करने के साथ ही पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर अपने चहेतों को प्रत्याशी घोषित कराया था। इसी वजह से पार्टी समर्थित सिर्फ सात या आठ प्रत्याशी की जीत सके। सूत्रों की मानें तो ऐसे में विरोधी खेमा जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा की नहीं बल्कि बाबूलाल की हार बता रहा है। इसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाया जा रहा है। इस हार ने ठंडे पड़े विरोधियों को ऊर्जा दे दी है। इसके अलावा जिला जेल पर हुए प्रकरण को भी फिर से हवा दी जा रही है।
सदस्यों को कराई जयपुर की सैर
भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भाजपा भले ही हार गई हो लेकिन पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन करने वाले सदस्यों की खूब बल्ले-बल्ले रही। सूत्रों की मानें तो भाजपा प्रत्याशी ने अपने समर्थित सदस्यों को जयपुर की सैर कराई। वे मतदान से कुछ घंटे पहले ही शहर पहुंचे।
जिपंअ के लिए सपा-भाजपा ने जितनी जोड़तोड़ की, उतनी ही इन्हें रोके रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। विरोधियों के संपर्क में आने से बचाने के लिए भाजपा ने अपने समर्थित सदस्यों को दो दिन पहले ही जयपुर भेज दिया। सूत्रों की मानें तो यहां उन्हें फाइव स्टार होटल में रुकवाया गया। खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा गया। इस दौरान उनके मोबाइल फोन भी बंद करा दिए गए। उन्हें मतदान के लिए गुरुवार सुबह ही शहर लाया गया था।

हर गाड़ी पर ‘पहरेदार’
मतदान के लिए जिला पंचायत सदस्यों को लेकर सांसद चौधरी बाबूलाल की गाड़ियों का काफिला गोविंद नगर, शाहगंज से रवाना हुआ। हर गाड़ी में दो सदस्य थे। इनके साथ एक ‘पहरेदार’ भी था। दोपहर लगभग एक बजे गाड़ियों का काफिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। सभी 17 सदस्यों को ‘पहरेदार’ के साथ ही एक के बाद एक मतदान कक्ष में ले जाया गया।
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