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‘खामोश’ ताज के सामने बयां की दास्तां ए जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Mon, 29 Feb 2016 02:18 AM IST
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डूबते हुए सूरज की रोशनी में सुनहरा सा दिखता ताज। महताब बाग के पास ताज लिटरेचर फेस्टिवल के समापन में 11 सिड्डी के नए ताज व्यू प्वाइंट से फिल्मी सितारों ने पल पल रंग बदलते ताज के सामने जिंदगी के हर पन्ने को छुआ। अभिनेत्री विद्या बालन ने खामोश ताज के सामने कविताएं सुनाईं तो अभिनेता कबीर बेदी ने आतंकवाद के दिए दर्द से निकले शब्दों को अपनी बुलंद आवाज दी।
ताज लिटरेचर फेस्टिवल में शाम पांच बजे अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी जीवनी एनीथिंग बट खामोश से जुड़े तथ्यों को सामने रखा। उनसे लेखिका भारती प्रधान, अजय मांगो ने सवाल पूछे। करीब 40 मिनट के इस सेशन के बाद पियानो पर पूनम चडढा की किताब ‘सीकर्स आफ सोलफुल लव’ की कविताओं को अभिनेत्री विद्या बालन और अभिनेता कबीर बेदी ने आवाज दी। निर्देशक फिरोज अब्बास खान, अभिनेत्री और मॉडल मारिया गुरेटी ने कविताओं को सुनाया। कबीर बेदी और विद्या बालन ताज देखकर इसकी खूबसूरती में खो गए। कबीर ने कहा कि शाहजहां का किरदार वह दो बार निभा चुके हैं। आगरा किला और ताज के सामने वह जादुई रोमांच महसूस कर रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक है मेरी जीवनी
सात सालों में साए की तरह पीछे लगकर लेखिका भारती प्रधान ने शत्रुघ्न सिन्हा की जीवनी ‘एनीथिंग बट खामोश’ लिखी, जिसे शत्रु सबसे ईमानदार, अनोखी और पारदर्शी किताब मानते हैं। उन्होंने कहा कि युवा उनकी जिंदगी से प्रेरणा ले सकते हैं। मेरे संघर्ष, पैशन की दास्तां से सीखें कि कैसे पटना का लड़का रोल करते करते रोल मॉडल बन गया। राजनीति में उतरा तो बिना किसी गॉड फादर, रिश्तेदार के केबिनेट मंत्री बना। मैं बना तो आप भी बन सकते हो, बस आगे बढ़िए, रिस्क लीजिए। अपनी किताब में जिन्होंने मेरे खिलाफ बोला, उन्हें भी बोलने का मौका दिया है।
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अहम से न करें बच्चों के भविष्य का फैसला
शत्रुघ्न सिन्हा ने अभिभावकों से कहा कि अपने अहम से बच्चों के भविष्य का फैसला न करें। जो क्षमता बच्चे में हो, वही क्षेत्र अपनाने दें। अपनी इच्छा न थोपें। मेरे पिता मुझे डाक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन मैं कंपाउंडर बनने लायक भी नहीं था। अब सभी को मुझ पर गर्व है।
मातृभाषा को महत्व दें
सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघभन सिन्हा ने हिंदी में ही सभी का अभिवादन किया और कहा कि अंग्रेजी की जगह साहित्य उत्सव में हिंदी में बोला जाए, जिससे विचार सभी तक पहुचें। राष्ट्रभाषा और मातृभाषा को महत्व दें।
एसएस ने कराया पत्नी से झगड़ा
शॉटगन ने खुलासा किया कि एसएस नाम का लॉकेट, बाली, पैंडेंट मेरी पत्नी पहना करती थीं, लेकिन यह इतना प्रसिद्ध हो गया कि उस समय कई हीरोइनें भी पहनने लगीं। यहीं से झगड़ा शुरू हो गया और एसएस की दास्तान खत्म हो गई। शत्रु ने चुटकी लेते हुए कहा कि पटना से पुणे जाते वक्त मैं और एक लड़की रो रही थी, उसी लड़की से मेरी शादी हुई और अब भी चरित्र नहीं बदला, हम दोनों अब भी रो रहे हैं।
विद्या बालन मंच पर, कुर्सियां खालीं
आगरा। महताब बाग के पास 11 सिड्डी पर जिस समय अभिनेत्री विद्या बालन और अभिनेता कबीर बेदी कविताएं पढ़ रहे थे, उस समय दर्शक दीर्घा में महज 40 लोग ही बैठे थे। खाली कुर्सियां देखकर आयोजकों ने कुर्सियों को उठवा कर रखवा दिया। विद्या बालन और कबीर की प्रस्तुति के दौरान अधिकांश लोग जा चुके थे। कछपुरा गांव की महिलाएं और बच्चे विद्या बालन को देखने पहुंचे, लेकिन बाउंसरों ने उन्हें भगा दिया।
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ताज लिटरेचर फेस्टिवल में शाम पांच बजे अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी जीवनी एनीथिंग बट खामोश से जुड़े तथ्यों को सामने रखा। उनसे लेखिका भारती प्रधान, अजय मांगो ने सवाल पूछे। करीब 40 मिनट के इस सेशन के बाद पियानो पर पूनम चडढा की किताब ‘सीकर्स आफ सोलफुल लव’ की कविताओं को अभिनेत्री विद्या बालन और अभिनेता कबीर बेदी ने आवाज दी। निर्देशक फिरोज अब्बास खान, अभिनेत्री और मॉडल मारिया गुरेटी ने कविताओं को सुनाया। कबीर बेदी और विद्या बालन ताज देखकर इसकी खूबसूरती में खो गए। कबीर ने कहा कि शाहजहां का किरदार वह दो बार निभा चुके हैं। आगरा किला और ताज के सामने वह जादुई रोमांच महसूस कर रहे हैं।
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युवाओं के लिए प्रेरणादायक है मेरी जीवनी
सात सालों में साए की तरह पीछे लगकर लेखिका भारती प्रधान ने शत्रुघ्न सिन्हा की जीवनी ‘एनीथिंग बट खामोश’ लिखी, जिसे शत्रु सबसे ईमानदार, अनोखी और पारदर्शी किताब मानते हैं। उन्होंने कहा कि युवा उनकी जिंदगी से प्रेरणा ले सकते हैं। मेरे संघर्ष, पैशन की दास्तां से सीखें कि कैसे पटना का लड़का रोल करते करते रोल मॉडल बन गया। राजनीति में उतरा तो बिना किसी गॉड फादर, रिश्तेदार के केबिनेट मंत्री बना। मैं बना तो आप भी बन सकते हो, बस आगे बढ़िए, रिस्क लीजिए। अपनी किताब में जिन्होंने मेरे खिलाफ बोला, उन्हें भी बोलने का मौका दिया है।
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अहम से न करें बच्चों के भविष्य का फैसला
शत्रुघ्न सिन्हा ने अभिभावकों से कहा कि अपने अहम से बच्चों के भविष्य का फैसला न करें। जो क्षमता बच्चे में हो, वही क्षेत्र अपनाने दें। अपनी इच्छा न थोपें। मेरे पिता मुझे डाक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन मैं कंपाउंडर बनने लायक भी नहीं था। अब सभी को मुझ पर गर्व है।
मातृभाषा को महत्व दें
सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघभन सिन्हा ने हिंदी में ही सभी का अभिवादन किया और कहा कि अंग्रेजी की जगह साहित्य उत्सव में हिंदी में बोला जाए, जिससे विचार सभी तक पहुचें। राष्ट्रभाषा और मातृभाषा को महत्व दें।
एसएस ने कराया पत्नी से झगड़ा
शॉटगन ने खुलासा किया कि एसएस नाम का लॉकेट, बाली, पैंडेंट मेरी पत्नी पहना करती थीं, लेकिन यह इतना प्रसिद्ध हो गया कि उस समय कई हीरोइनें भी पहनने लगीं। यहीं से झगड़ा शुरू हो गया और एसएस की दास्तान खत्म हो गई। शत्रु ने चुटकी लेते हुए कहा कि पटना से पुणे जाते वक्त मैं और एक लड़की रो रही थी, उसी लड़की से मेरी शादी हुई और अब भी चरित्र नहीं बदला, हम दोनों अब भी रो रहे हैं।
विद्या बालन मंच पर, कुर्सियां खालीं
आगरा। महताब बाग के पास 11 सिड्डी पर जिस समय अभिनेत्री विद्या बालन और अभिनेता कबीर बेदी कविताएं पढ़ रहे थे, उस समय दर्शक दीर्घा में महज 40 लोग ही बैठे थे। खाली कुर्सियां देखकर आयोजकों ने कुर्सियों को उठवा कर रखवा दिया। विद्या बालन और कबीर की प्रस्तुति के दौरान अधिकांश लोग जा चुके थे। कछपुरा गांव की महिलाएं और बच्चे विद्या बालन को देखने पहुंचे, लेकिन बाउंसरों ने उन्हें भगा दिया।