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शरद पूर्णिमा 2021: सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रदेव की पूजा करने से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

Wed, 20 Oct 2021 12:18 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 20 Oct 2021 12:18 AM IST
सार

मान्यता है कि पूरे साल केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। इस दिन चंद्रदेव की पूजा करना शुभ होता है। हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का खासा महत्व है। अन्य सभी पूर्णिमा की अपेक्षा शरद पूर्णिमा को विशेष कल्याणकारी माना जाता है। चंद्र देव की पूजा अर्चना यदि विधान पूर्वक की जाए तो निश्चित ही कृपा बरसती है। 

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Sharad Purnima 2021 worshiping of chandra dev puja vishi timing
शरद पूर्णिमा 2021 - फोटो : istock

विस्तार

बुधवार का अश्विन मास की पूर्णिमा है। इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा को कौमुदी, कोजागिरी या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन चंद्रदेव की पूजा विधिविधान पूर्वक की जाए तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रदेव इस दिन धरती के सबसे निकट होते हैं। 

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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण चंद्रमा की सभी सोलह कलाओं से युक्त हैं। इस पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती हैं। नवविवाहिता महिलाओं द्वारा किए जाने वाले पूर्व व्रत की शुरुआत शरद पूर्णिमा के त्यौहार से ही होती है, जिसे शुभ माना जाता है। 
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इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत रखने के बाद पूर्ण रात्रि देवी लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से धन समस्याओं का अंत होता है और धन तथा वैभव की प्राप्ति होती है।

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ऐसे करें पूजा अर्चना 
कासगंज के सोरों के ज्योतिषाचार्य पंडित रामबल्लभ ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। समस्त देवी देवताओं का आह्वान करें और वस्त्र,अक्षत, आसन, पुष्प, धूप, दीप नैवेद्य, सुपारी व दक्षिणा आदि अर्पित करने के बाद पूजा करनी चाहिए। 

संध्याकाल में दूध की खीर में घी मिलाकर अर्धरात्रि के समय भगवान को भोग लगाना चाहिए। रात्रि के समय चंद्रमा के उदय होने के बाद चंद्र देव की पूजा करें और खीर का नैवेद्य अर्पित करें। रात में खीर से भरे बर्तन को चंद्रमा की अमृत समान चांदनी में रखना चाहिए और अगले दिन सुबह प्रसाद रूप में सब को बांटना चाहिए। 

यह है शुभ समय 
शरद पूर्णिमा तिथि 19 अक्टूबर की शाम 7:03 पर शुरू हो गई, जो 20 अक्टूबर रात 8:26 पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत 20 अक्टूबर बुधवार के दिन रखा जाएगा।

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