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स्वच्छता की दौड़ में कूड़ा न रह जाए शहर
स्वच्छता की दौड़ में कूड़ा न रह जाए शहर
Updated Mon, 09 Jan 2017 01:01 AM IST
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स्वच्छता की दौड़ में कूड़ा न रह जाए शहर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत आगरा में सर्वे की प्रक्रिया 11 जनवरी से प्रारंभ होगी। आगरा को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अव्वल लाने के लिए भले ही नगर निगम की टीम दिन-रात मेहनत कर रही हो लेकिन हालात बदलते नजर नहीं आ रहे। सामुदायिक शौचालय अभी भी बंद हैं और सड़कों के किनारे कूड़ा नहीं उठ रहा है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष हुए स्वच्छता सर्वे में शहर को यूपी में 47वां स्थान मिला था। जबकि मैसूर शहर सफाई देश में अव्वल रहा था। आगरा को स्वच्छता के मामले में पहले पायदान पर लाने के लिए नगर निगम की ओर से कड़ी मशक्कत की जा रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को 2000 नंबर दिए जाएंगे। 45 फीसदी नंबर नगर निगम की ओर से की जा रहीं व्यवस्थाआें के लिए, 25 फीसदी नंबर आब्जरवेशन और 30 फीसदी नंबर शहर की जनता के फीडबैक के होंगे। सर्वे करने वाली टीम लोगों से सीधे संवाद करेगी।
भारत सरकार की टीम 10 जनवरी को शहर में डेरा डालेगी। 11 जनवरी से सर्वेक्षण प्रारंभ हो जाएगा। टीम के सदस्य शहर के किसी भी स्थान पर जाकर सफाई, शौचालय, नाले, नालियों को व्यवस्था देख सकते हैं। किसी भी क्षेत्र में जाकर जनता से सीधा संवाद स्थापित कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि नगर निगम के अधिकारी उनके साथ रहें।
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नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, दिन-रात काम हो रहा है। जागरूकता के लिए नगर निगम ने बहुत काम किया है। लेकिन हैरत की बात है कि शहर की लाइफ लाइन एमजी रोड पर ही बने पब्लिक टायलेट्स पर ही ताले जड़े हैं। प्रमुख मलिन बस्ती राजनगर में महिला टायेलट प्रारंभ नहीं हो सका है। दूसरा शौचालय का उपयोग नहीं किया जा सकता है। शहर के प्रमुख कालोनी आवास विकास कालोनी में ही सड़क के किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। गोकुलपुरा में सीवर चोक है, गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं। पाश कालोनी जयपुर हाउस में भी गंदगी का आलम है।
इनबाक्स...
निजी टायलेट स्कीम में भी लापरवाही
खुले में शौच मुक्ति के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। ओडीएफ स्कीम के तहत व्यक्तिगत शौचालय योजना में करीब 8,000 परिवारों को पात्र पाया गया है। इस योजना में टायलेट बनाने के लिए चार हजार केंद्र सरकार और चार हजार प्रदेश सरकार से अनुदान मिलता है। शेष राशि गृह स्वामी को स्वयं व्यय करनी होगी। इस योजना में भी नगर में अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब तक करीब 1200 से अधिक टायलेट बनाने वालों को धनराशि जारी हो पाई है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष हुए स्वच्छता सर्वे में शहर को यूपी में 47वां स्थान मिला था। जबकि मैसूर शहर सफाई देश में अव्वल रहा था। आगरा को स्वच्छता के मामले में पहले पायदान पर लाने के लिए नगर निगम की ओर से कड़ी मशक्कत की जा रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को 2000 नंबर दिए जाएंगे। 45 फीसदी नंबर नगर निगम की ओर से की जा रहीं व्यवस्थाआें के लिए, 25 फीसदी नंबर आब्जरवेशन और 30 फीसदी नंबर शहर की जनता के फीडबैक के होंगे। सर्वे करने वाली टीम लोगों से सीधे संवाद करेगी।
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भारत सरकार की टीम 10 जनवरी को शहर में डेरा डालेगी। 11 जनवरी से सर्वेक्षण प्रारंभ हो जाएगा। टीम के सदस्य शहर के किसी भी स्थान पर जाकर सफाई, शौचालय, नाले, नालियों को व्यवस्था देख सकते हैं। किसी भी क्षेत्र में जाकर जनता से सीधा संवाद स्थापित कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि नगर निगम के अधिकारी उनके साथ रहें।
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नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, दिन-रात काम हो रहा है। जागरूकता के लिए नगर निगम ने बहुत काम किया है। लेकिन हैरत की बात है कि शहर की लाइफ लाइन एमजी रोड पर ही बने पब्लिक टायलेट्स पर ही ताले जड़े हैं। प्रमुख मलिन बस्ती राजनगर में महिला टायेलट प्रारंभ नहीं हो सका है। दूसरा शौचालय का उपयोग नहीं किया जा सकता है। शहर के प्रमुख कालोनी आवास विकास कालोनी में ही सड़क के किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। गोकुलपुरा में सीवर चोक है, गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं। पाश कालोनी जयपुर हाउस में भी गंदगी का आलम है।
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निजी टायलेट स्कीम में भी लापरवाही
खुले में शौच मुक्ति के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। ओडीएफ स्कीम के तहत व्यक्तिगत शौचालय योजना में करीब 8,000 परिवारों को पात्र पाया गया है। इस योजना में टायलेट बनाने के लिए चार हजार केंद्र सरकार और चार हजार प्रदेश सरकार से अनुदान मिलता है। शेष राशि गृह स्वामी को स्वयं व्यय करनी होगी। इस योजना में भी नगर में अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब तक करीब 1200 से अधिक टायलेट बनाने वालों को धनराशि जारी हो पाई है।